
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के नए मास्टर प्लान को लेकर लंबे इंतजार के बाद मंगलवार को अहम प्रगति हुई। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को इसके ड्राफ्ट के प्रकाशन की अनुमति दे दी, जिससे 21 साल से अटकी प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
फाइनल मास्टर प्लान को सार्वजनिक करने से पहले सरकार को सुप्रीम कोर्ट को इसकी जानकारी देनी होगी। न्यायालय की अनुमति मिलने के बाद ही अंतिम प्लान प्रकाशित किया जा सकेगा।
सीलिंग कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी
रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सीलिंग की कार्रवाई में कथित लापरवाही का मुद्दा भी उठा। कोर्ट ने अपने आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
सील किए गए प्रतिष्ठानों के सुबह बंद रहने और शाम को फिर खुलने की शिकायतें भी सामने आईं। सुनवाई से पहले रहवासियों की ओर से 9 शिकायतें रखी गई थीं।
नगर निगम को कार्रवाई जारी रखने के निर्देश
शिकायतों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने नगर निगम को सीलिंग की कार्रवाई प्रभावी तरीके से जारी रखने को कहा है। इस मामले में अब नई कमेटी गठित नहीं की जाएगी।
इससे पहले आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर नगर निगम की कार्रवाई के आंकड़े और प्रतिष्ठानों पर की गई कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखी गई थी।
62,500 प्रतिष्ठान चिन्हित, 8,084 को नोटिस
नगर निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक आवासीय क्षेत्रों में संचालित 62,500 प्रतिष्ठानों को सूचीबद्ध किया गया। इनमें से 8,084 प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए गए।
इसके बाद 190 प्रतिष्ठानों को तीन दिन तक बंद कराया गया था। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के 5 अगस्त के आदेश के बाद शुरू हुई थी।
23 नवंबर को फिर होगी सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को निर्धारित है। तब तक राज्य सरकार और नगर निगम को अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करनी होगी।
भोपाल में विकास गतिविधियां फिलहाल 2005 के मास्टर प्लान के आधार पर संचालित हो रही हैं, जबकि नया प्लान करीब 21 साल से लागू नहीं हो पाया है।
2047 को ध्यान में रखकर तैयार किया गया खाका
नए मास्टर प्लान का खाका तैयार किया जा चुका है। इसमें भोपाल के आगामी विकास को ध्यान में रखते हुए 2047 तक की अनुमानित आबादी को आधार बनाया गया है।
प्लान में यातायात व्यवस्था, नए आवासीय क्षेत्र, व्यावसायिक गतिविधियां और शहर के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे को भी शामिल किया गया है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों से लिए जाएंगे सुझाव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसी महीने निर्देश दिए थे कि मास्टर प्लान को अंतिम रूप देने से पहले भोपाल के स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सलाह और सुझाव लिए जाएं।
अब सुप्रीम कोर्ट से ड्राफ्ट प्रकाशित करने की अनुमति मिलने के बाद अगला चरण शुरू होगा। फाइनल प्लान के प्रकाशन के लिए न्यायालय को इसकी जानकारी देना अनिवार्य रहेगा।
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