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भोपाल मेट्रो परियोजना में बड़ा बदलाव, ऐशबाग और गोविंदपुरा स्टेशन हटाने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया

10 जुल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
भोपाल मेट्रो परियोजना में बड़ा बदलाव, ऐशबाग और गोविंदपुरा स्टेशन हटाने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल मेट्रो परियोजना में प्रस्तावित ऐशबाग और गोविंदपुरा मेट्रो स्टेशन हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने संशोधित डीपीआर केंद्र सरकार को मंजूरी के लिए भेज दी है। यदि केंद्र सरकार प्रस्ताव को स्वीकृति देती है तो परियोजना में प्रस्तावित स्टेशनों की कुल संख्या 29 से घटकर 27 रह जाएगी। यह बदलाव करीब 8 साल पहले तैयार हुई डीपीआर में किया जा रहा है।


केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद होगा अंतिम फैसला

मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के अनुसार, परियोजना में संशोधन का प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार को भेजा गया है। अंतिम निर्णय केंद्र की स्वीकृति मिलने के बाद ही प्रभावी होगा। कॉर्पोरेशन का कहना है कि संशोधित डीपीआर के लागू होने पर ऐशबाग और गोविंदपुरा स्टेशन आधिकारिक रूप से परियोजना का हिस्सा नहीं रहेंगे।


लागत और तकनीकी अध्ययन के आधार पर लिया गया निर्णय

मेट्रो अधिकारियों के मुताबिक यह फैसला वैल्यू इंजीनियरिंग, निर्माण लागत कम करने और तकनीकी अध्ययन के आधार पर लिया गया है। समीक्षा के दौरान यह निष्कर्ष सामने आया कि इन दोनों स्टेशनों को हटाने से निर्माण प्रक्रिया अधिक व्यावहारिक होगी और परियोजना पर आने वाला खर्च भी कम किया जा सकेगा।


संचालक मंडल ने दी मंजूरी

मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के प्रबंध संचालक एस. कृष्णा चैतन्य ने बताया कि कंपनी के संचालक मंडल ने इस संशोधन को मंजूरी दे दी है। इसके बाद संशोधित डीपीआर को स्वीकृति के लिए केंद्र सरकार के पास भेजा गया है। अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही परियोजना में यह बदलाव लागू होगा।


8 साल पुरानी डीपीआर में बदलाव पर उठ रहे सवाल

भोपाल मेट्रो की डीपीआर तैयार हुए लगभग 8 वर्ष बीत चुके हैं। ऐसे में अब किए जा रहे संशोधन को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि यदि तकनीकी मूल्यांकन और लागत का विश्लेषण पहले किया जाता, तो यह बदलाव शुरुआती चरण में ही संभव हो सकता था। लंबे अंतराल के बाद लिए गए इस निर्णय को लेकर लोगों के बीच भी अलग-अलग चर्चाएं हो रही हैं।


परियोजना पर क्या पड़ेगा असर

भोपाल मेट्रो को शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के लिए अहम परियोजना माना जा रहा है। ऐसे में स्टेशनों की संख्या में संभावित कमी का असर परियोजना की लागत, निर्माण कार्य और यात्रियों की सुविधा से जुड़े पहलुओं पर पड़ेगा। अब पूरा मामला केंद्र सरकार के निर्णय पर निर्भर है, जिसके बाद परियोजना के अंतिम स्वरूप की तस्वीर स्पष्ट होगी।


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