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भोपाल मेट्रो को CMRS की ‘ओके’ रिपोर्ट: दिसंबर में दौड़ेगी मेट्रो, मोदी दिखा सकते हैं हरी झंडी!

04 दिस, 20250 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
भोपाल मेट्रो को CMRS की ‘ओके’ रिपोर्ट: दिसंबर में दौड़ेगी मेट्रो, मोदी दिखा सकते हैं हरी झंडी!

भोपाल मेट्रो को CMRS की ‘ओके’ रिपोर्ट: दिसंबर में दौड़ेगी मेट्रो, मोदी दिखा सकते हैं हरी झंडी!

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल वालों, तैयार हो जाइए… शहर की रफ्तार बदलने वाली घड़ी आ गई है! भोपाल मेट्रो को आखिरकार कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) से हरी झंडी मिल गई है। तीन बार सघन निरीक्षण के बाद सीएमआरएस ने अपनी ‘ओके’ रिपोर्ट सौंप दी है। यानी अब दिसंबर में ही सुभाषनगर से एम्स के बीच मेट्रो का कमर्शियल रन संभव है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों लोकार्पण की भी पूरी संभावना है। 


CMRS की ‘ओके’ रिपोर्ट मिलते ही तेज हुई तैयारियां

भोपाल मेट्रो के कमर्शियल रन के लिए CMRS ने अपनी एनओसी (No Objection Certificate) दे दी है। रिपोर्ट में सभी व्यवस्थाओं को ‘ओके’ बताया गया है। इसके बाद यह रिपोर्ट प्रदेश सरकार को सौंप दी गई है। अब नई दिल्ली से अंतिम मंजूरी मिलते ही मेट्रो के कमर्शियल संचालन की शुरुआत हो जाएगी।


दिसंबर में मेट्रो की शुरुआत, 13 दिसंबर पर मंथन

सूत्रों के मुताबिक, मेट्रो के लोकार्पण को लेकर 13 दिसंबर की तारीख पर मंथन चल रहा है। हालांकि, इसे आगे बढ़ाने की संभावना भी जताई जा रही है। सरकार की कोशिश है कि मेट्रो का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों ही कराया जाए। 


यह भी चर्चा है कि प्रधानमंत्री मोदी भोपाल मेट्रो के पहले यात्री बन सकते हैं। इससे पहले इंदौर मेट्रो का लोकार्पण उन्होंने 31 मई को वर्चुअल तरीके से किया था। भोपाल में भी वर्चुअली उद्घाटन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, हालांकि मेट्रो अफसर फिलहाल इस पर कुछ भी कहने से बच रहे हैं।


टिकट सिस्टम मैन्युअल रहेगा, ऑनलाइन की जगह हाथ से कटेगा टिकट

कमर्शियल रन के दौरान एक अहम बदलाव यह रहेगा कि टिकट सिस्टम ऑनलाइन नहीं, मैन्युअल होगा। मेट्रो में टिकट कलेक्शन करने वाली तुर्किए की कंपनी का ठेका मेट्रो कॉरपोरेशन पहले ही निरस्त कर चुका है। नई एजेंसी के आने तक यात्रियों को मैन्युअल टिकट सिस्टम से ही सफर करना होगा। यही व्यवस्था फिलहाल इंदौर मेट्रो में भी लागू है।


तीन बार निरीक्षण कर चुकी है CMRS की टीम

सीएमआरएस की टीम 12 नवंबर को भोपाल पहुंची थी। इसके बाद तीन दिन तक लगातार निरीक्षण हुआ—


12 नवंबर: टीम भोपाल पहुंची।

13 नवंबर:

डिपो, एम्स स्टेशन तक ट्रैक की जांच

सिग्नलिंग और सेफ्टी सिस्टम की टेस्टिंग

आरकेएमपी स्टेशन पर पानी गिराकर ट्रैक लेवल चेक

सुभाषनगर डिपो में प्रोजेक्ट रिपोर्ट का मूल्यांकन

 (करीब 8 घंटे तक निरीक्षण)


14 नवंबर:

मेट्रो ट्रेन में बैठकर ब्रेकिंग सिस्टम की जांच

रूट: सुभाषनगर, केंद्रीय स्कूल, डीबी मॉल, रानी कमलापति, डीआरएम ऑफिस, अलकापुरी, एम्स

डिपो में विस्तृत समीक्षा

(करीब 10 घंटे तक जांच)


15 नवंबर:

ट्रैक का दोबारा निरीक्षण

मेट्रो स्टेशनों की विजिट

मेट्रो अफसरों के साथ बैठक

(सुबह से रात तक निरीक्षण)


CMRS ने क्या-क्या जांचा?

सीएमआरएस टीम ने हर स्तर पर मेट्रो की सुरक्षा और व्यवस्था को परखा:

डिपो और ट्रेनें (Rolling Stock)

सभी स्टेशन (सुभाषनगर से एम्स तक)

ट्रैक और टर्नआउट

सिग्नलिंग और ट्रेन कंट्रोल सिस्टम

थर्ड रेल पॉवर सप्लाई

ऑपरेशन और मेंटेनेंस सिस्टम

फायर सेफ्टी और इमरजेंसी सिस्टम

यात्री सुविधाएं और स्टेशन मैनेजमेंट

लिफ्ट, एस्कलेटर और पब्लिक एड्रेस सिस्टम


डिपो के कंट्रोल रूम से ट्रेनों की आवाजाही, सिग्नल और पॉवर सप्लाई सिस्टम पर विशेष नजर रखी गई।


आगे की प्रक्रिया क्या होगी?

CMRS की मंजूरी के बाद अब ये स्टेप पूरे किए जाएंगे—

✔️ CMRS की रिपोर्ट मेट्रो कॉरपोरेशन को मिली।

✔️ रिपोर्ट प्रदेश सरकार को सौंपी गई।

✔️ प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री कार्यालय से तारीख मांगेगी।

✔️ तारीख तय होते ही कमर्शियल रन की शुरुआत होगी।


प्रायोरिटी कॉरिडोर के बाद कहां पहुंचेगी मेट्रो?

फिलहाल सुभाषनगर से एम्स तक प्रायोरिटी कॉरिडोर पर मेट्रो चलेगी। इस हिस्से में कुल 8 स्टेशन हैं। इसके बाद ऑरेंज लाइन का दूसरा फेज: सुभाषनगर से करोंद

ब्ल्यू लाइन: भदभदा से रत्नागिरी

इन दोनों सेक्शन पर काम तेजी से पूरा किया जाएगा।


CMRS की भूमिका क्या है?

CMRS ही किसी भी मेट्रो प्रोजेक्ट को सुरक्षा की अंतिम मंजूरी देता है। जब तक उनकी रिपोर्ट ‘ओके’ नहीं होती, तब तक यात्रियों के लिए मेट्रो शुरू नहीं हो सकती।


पहले अक्टूबर था टारगेट, अब दिसंबर में उम्मीद

सरकार ने पहले अक्टूबर में मेट्रो शुरू करने का लक्ष्य रखा था। इसी वजह से सितंबर और अक्टूबर में भी CMRS के दो निरीक्षण हो चुके थे। पूर्व मेट्रो कमिश्नर जनक गर्ग ने स्वयं 6.22 किमी लंबे प्रायोरिटी कॉरिडोर का निरीक्षण किया था।

अब तीसरे और आखिरी निरीक्षण के बाद रिपोर्ट मिल चुकी है और उम्मीद है कि भोपाल मेट्रो जल्द ही आम जनता के लिए पटरी पर दौड़ती नजर आएगी।

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