
भोपाल शनिवार सुबह एक ऐतिहासिक पल की दहलीज पर खड़ा है। शहर की बहुप्रतीक्षित मेट्रो के कमर्शियल रन का रास्ता साफ होने जा रहा है, क्योंकि आज कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) का निरीक्षण दौरे का आखिरी और सबसे अहम दिन है। कमिश्नर नीलाभ्र सेनगुप्ता खुद शनिवार को मेट्रो में सवार होकर डीआरएम ऑफिस, एम्स और अलकापुरी स्टेशन का निरीक्षण करेंगे। इससे पहले वे शुक्रवार को प्रायोरिटी कॉरिडोर के 5 अहम स्टेशनों—सुभाषनगर, केंद्रीय स्कूल, डीबी मॉल, एमपी नगर और रानी कमलापति—का पूरा मुआयना कर चुके हैं।
टीम शाम 6 बजे तक भोपाल में रहेगी और ट्रेन से लेकर ट्रैक तक नट-बोल्ट लेवल पर सबकुछ चेक किया जाएगा। अगर आज का निरीक्षण पूरी तरह संतोषजनक रहा तो भोपाल मेट्रो इसी महीने जनता के लिए दौड़ सकती है!
क्या-क्या हुआ पिछले दो दिनों में?
12 नवंबर — टीम भोपाल पहुंची
CMRS की टीम ने शहर में उतरते ही प्रोजेक्ट की डॉक्युमेंटेशन और तैयारी को देखा।
13 नवंबर — ट्रैक और सुरक्षा की गहराई से जांच
➡️ डिपो से लेकर एम्स स्टेशन तक ट्रैक और सिग्नलिंग की जांच
➡️ आरकेएमपी स्टेशन पर पानी गिराकर ट्रैक की ढाल व जल निकासी की टेस्टिंग
➡️ सुभाषनगर डिपो में पूरे प्रोजेक्ट का डेटा और ब्लूप्रिंट चेक
➡️ पहले दिन टीम ने लगभग 8 घंटे तक लगातार निरीक्षण किया।
14 नवंबर — ट्रेन की ‘रियल टाइम’ टेस्टिंग
टीम ने मेट्रो में बैठकर ब्रेकिंग सिस्टम, सिग्नलिंग रिस्पॉन्स, प्लेटफॉर्म अलाइनमेंट जैसे पहलुओं को गहराई से परखा। कमिश्नर नीलाभ्र सेनगुप्ता खुद ट्रेन में मौजूद रहे।
तीसरे दिन भी ट्रैक पर उतरेगी टीम
शनिवार को लगातार तीसरे दिन CMRS टीम ट्रेन में सफर कर टेक्निकल फैक्टर, स्टॉपिंग पॉइंट सेफ्टी, आपात निकासी, स्टेशन सिस्टम, ट्रैक अलाइनमेंट जैसी बारीकियां जांचेगी। हर बिंदु पर टीम नोट्स बना रही है, जिनके आधार पर दिल्ली जाकर रिपोर्ट तैयार होगी। और यदि रिपोर्ट में लिखा हुआ मिल गया— “O.K.”— तो भोपाल मेट्रो नवंबर में कॉमर्शियल रन के लिए ग्रीन सिग्नल पा लेगी।
क्या है CMRS की भूमिका?
CMRS किसी भी मेट्रो सिस्टम के लिए सुरक्षा की अंतिम स्वीकृति देता है। सीधे शब्दों में— उनकी ‘ओके’ रिपोर्ट के बिना कोई भी मेट्रो यात्रियों को नहीं बिठा सकती।
किन बिंदुओं पर चल रही जांच?
ट्रैक स्ट्रेंथ
सिग्नलिंग सिस्टम
ब्रेक सिस्टम टेस्ट
प्लेटफॉर्म-ट्रेन अलाइनमेंट
स्टेशन सुरक्षा
इमरजेंसी निकासी व्यवस्था
किसी भी बिंदु पर खामी मिली तो पहले सुधार, फिर ही अनुमति।
पिछले दो दौरे में जिन मुद्दों पर ध्यान दिया गया था, उन्हें सुधार लिया गया है। इसलिए उम्मीद है कि इस बार रिपोर्ट पॉजिटिव आएगी।
पहली बार भोपाल आए हैं नए कमिश्नर
मेट्रो कमिश्नर नीलाभ्र सेनगुप्ता पहली बार भोपाल पहुंचे हैं। उनसे पहले जनक कुमार गर्ग कमिश्नर थे, जो रिटायर हो चुके हैं। टीम वही है, इसलिए निरीक्षण में रुकावट की कोई संभावना नहीं।
क्यों October की बजाय अब November में दौड़ेगी मेट्रो?
सरकार ने पहले अक्टूबर 2024 में मेट्रो चलाने का लक्ष्य दिया था। सितंबर और अक्टूबर में CMRS के दो प्रमुख निरीक्षण भी हो चुके थे। लेकिन बिहार विधानसभा चुनाव के चलते अक्टूबर स्लॉट खाली नहीं मिल सका। अब सभी तैयारियां पूरी हैं—और उम्मीद है कि नवंबर में भोपाल मेट्रो आखिरकार ट्रैक पर दौड़ेगी।
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