
भोपाल मेट्रो को उम्मीद के मुताबिक यात्री नहीं मिल रहे, जिससे किराए से होने वाली कमाई संचालन खर्च के मुकाबले कम पड़ रही है। अब मेट्रो प्रबंधन ने आय बढ़ाने के लिए स्टेशन परिसरों को कमर्शियल हब बनाने की दिशा में नई रणनीति तैयार की है।
किराए से कम कमाई, अब नए रास्तों की तलाश
मेट्रो प्रोजेक्ट्स में आमतौर पर टिकट से होने वाली आय प्रमुख मानी जाती है, लेकिन भोपाल में यात्री संख्या कम होने के कारण संचालन खर्च निकालना चुनौती बन गया है। इसी वजह से मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन अब ‘नॉन-फेयर रेवेन्यू’ यानी किराए के अलावा अन्य स्रोतों से आय बढ़ाने पर जोर दे रहा है। स्टेशन प्लेटफॉर्म और परिसर की खाली जगह को व्यावसायिक गतिविधियों के लिए देने की कोशिश पहले भी की गई, लेकिन कम फुटफॉल के कारण लाइसेंस देने में ज्यादा सफलता नहीं मिल सकी।
फूड कोर्ट से लेकर ट्यूटोरियल सेंटर तक, क्या है नई योजना
अब मेट्रो प्रबंधन ने कमर्शियल स्पेस को अलग तरीके से इस्तेमाल करने की योजना बनाई है।
नई रणनीति में शामिल प्रस्ताव:
फूड कोर्ट और खानपान स्टॉल
रिटेल आउटलेट और सुविधा स्टोर
कोचिंग और ट्यूटोरियल सेंटर
सैलून और छोटे सर्विस बिजनेस
एटीएम, क्लिनिक और ब्रांडेड शोरूम
मेट्रो स्टेशन पर कोचिंग क्लास या ट्यूटोरियल सेंटर की अवधारणा नई मानी जा रही है, क्योंकि आमतौर पर ऐसे स्पेस सिर्फ रिटेल या फूड आउटलेट्स के लिए ही दिए जाते हैं।
नॉन-फेयर रेवेन्यू क्यों बन रहा जरूरी
देश के कई शहरों में मेट्रो प्रोजेक्ट्स अपनी आय बढ़ाने के लिए विज्ञापन, कमर्शियल स्पेस और ब्रांडेड स्टोर्स पर निर्भर होते हैं। भोपाल में भी अब यही मॉडल अपनाने की तैयारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि, स्टेशन परिसर में व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ने से लोगों की आवाजाही बढ़ सकती है। यात्रियों के साथ आम नागरिक भी स्टेशन तक पहुंचेंगे, जिससे मेट्रो की पहचान मजबूत होगी।
यात्री सुविधा पर नहीं पड़ेगा असर
मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि लाइसेंस देने के दौरान यह सुनिश्चित किया जाएगा कि यात्रियों के आवागमन या सुरक्षा पर कोई असर न पड़े। स्टेशन के डिजाइन और मूवमेंट एरिया को ध्यान में रखते हुए ही स्पेस आवंटन किया जाएगा।
क्या यह मॉडल सफल हो पाएगा?
कम यात्री संख्या के चलते कमर्शियल स्पेस देने में अब तक चुनौतियां रही हैं। ऐसे में अब विविध गतिविधियों को शामिल कर स्टेशन को ‘मल्टी-यूज स्पेस’ बनाने की कोशिश की जा रही है। यदि योजना सफल होती है तो भोपाल मेट्रो के आर्थिक मॉडल को स्थिर करने में मदद मिल सकती है।
पाठकों की राय (0)
इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

