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भोपाल मेट्रो सिग्नलिंग सिस्टम की जांच पूरी होने की ओर, जुलाई से बदलेगा शेड्यूल और बढ़ेगी ट्रेनों की संख्या

25 जून, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
भोपाल मेट्रो सिग्नलिंग सिस्टम की जांच पूरी होने की ओर, जुलाई से बदलेगा शेड्यूल और बढ़ेगी ट्रेनों की संख्या
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल मेट्रो के सिग्नलिंग सिस्टम की जांच के लिए कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम गुरुवार को ट्रैक पर उतरी। निरीक्षण पूरा होने के बाद सिग्नलिंग सिस्टम शुरू किया जाएगा, जिसके बाद जुलाई में नया संचालन शेड्यूल जारी किया जाएगा।


परीक्षण के दौरान पहली बार रानी कमलापति स्टेशन और एमपी नगर स्टेशन के बीच एक ही ट्रैक पर दो मेट्रो ट्रेनों को आमने-सामने लाकर सिस्टम की कार्यप्रणाली परखी गई। यह प्रक्रिया करीब 30 मिनट तक चली।


दो टीमों ने अलग-अलग ट्रेनों में बैठकर किया परीक्षण

सीएमआरएस की दो अलग-अलग टीमें अलग-अलग मेट्रो ट्रेनों में सवार होकर निरीक्षण कर रही हैं। परीक्षण के दौरान यह देखा जा रहा है कि यदि दोनों ट्रेनें एक-दूसरे के सामने आ जाएं तो सिग्नलिंग सिस्टम किस तरह प्रतिक्रिया देता है। निरीक्षण में अचानक ब्रेक लगाने, ट्रेन की गति और अन्य तकनीकी बिंदुओं की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार यह पूरा कार्यक्रम शाम 5 बजे तक निर्धारित है, जिसके बाद टीम वापस लौट जाएगी।


रिपोर्ट मिलने के बाद शुरू होगा सिग्नलिंग सिस्टम

मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि निरीक्षण पूरा होने के बाद सीएमआरएस की अनुमति मिलने पर सिग्नलिंग सिस्टम चालू किया जाएगा। इसके बाद मेट्रो संचालन का नया शेड्यूल और समय तय किया जाएगा। प्रबंधन के मुताबिक, जुलाई में सिग्नलिंग सिस्टम लागू होने के बाद नई टाइमिंग जारी की जाएगी।


26 जून से फिर तय समय पर चलेगी मेट्रो

मेट्रो प्रबंधन के अनुसार निरीक्षण और परीक्षण पूरा होने के बाद 26 जून से मेट्रो सेवा फिर अपने निर्धारित समय के अनुसार संचालित होगी। सुभाष नगर से एम्स के बीच करीब 7 किलोमीटर लंबे प्रायोरिटी कॉरिडोर पर सिग्नलिंग सिस्टम का काम पूरा हो चुका है।


फिलहाल 12 किलोमीटर तक ही चल रही है मेट्रो

भोपाल और इंदौर मेट्रो के ऑरेंज-येलो लाइन के दोनों रूट मिलाकर करीब 30 किलोमीटर लंबे हैं। अभी केवल 12 किलोमीटर हिस्से में ही मेट्रो का संचालन हो रहा है। धीमी रफ्तार और सीमित संचालन को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।


800 करोड़ रुपये की परियोजना का पहला चरण

भोपाल मेट्रो की गति और संचालन क्षमता बढ़ाने के लिए सिग्नलिंग सिस्टम का काम पूरा किया गया है। करीब 30 किलोमीटर नेटवर्क के लिए लगभग 800 करोड़ रुपये के टेंडर के तहत यह पहला चरण पूरा हुआ है।


अभी केवल एक ट्रैक पर चल रही है मेट्रो

भोपाल और इंदौर दोनों शहरों में अभी सिग्नलिंग सिस्टम उपलब्ध नहीं होने के कारण ट्रेनों का संचालन केवल डाउन ट्रैक पर किया जा रहा है। इसी वजह से भोपाल में ट्रेनों की फ्रिक्वेंसी 75 मिनट रखी गई है। यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ता है और फिलहाल दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बाद ही मेट्रो का संचालन हो रहा है।


जिस ट्रैक से जाती है, उसी से लौटती भी है

सुभाष नगर से एम्स के बीच ट्रेन एक ही डाउन ट्रैक का उपयोग दोनों दिशाओं में कर रही है। अप ट्रैक यानी एम्स से सुभाष नगर की दिशा में अभी ट्रेनें संचालित नहीं हो रही हैं। नया सिग्नलिंग सिस्टम लागू होने के बाद दोनों ट्रैक पर संचालन शुरू हो सकेगा।


क्यों जरूरी है सिग्नलिंग सिस्टम

सिग्नलिंग सिस्टम किसी भी मेट्रो नेटवर्क के संचालन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यही सिस्टम ट्रेनों के बीच सुरक्षित दूरी तय करता है, अधिकतम और न्यूनतम गति नियंत्रित करता है, ऑटोमेटेड ऑपरेशन और इमरजेंसी कंट्रोल संभालता है। इसके बिना एक साथ कई ट्रैक पर प्रभावी संचालन संभव नहीं हो पाता।


दिल्ली मेट्रो जैसी तकनीक होगी लागू

भोपाल मेट्रो में वही आधुनिक सिग्नलिंग तकनीक लागू की जा रही है जिसका उपयोग दिल्ली मेट्रो में किया जाता है। इसके लागू होने के बाद दोनों ट्रैक पर ट्रेनें चलाई जा सकेंगी और ट्रेनों के बीच का अंतर कम होने से उनकी फ्रिक्वेंसी भी बढ़ाई जा सकेगी।


नए सिस्टम से यात्रियों को क्या फायदा मिलेगा

सिग्नलिंग सिस्टम शुरू होने के बाद यात्रियों को कई सुविधाएं मिलेंगी।

- दोनों ट्रैक पर ट्रेन संचालन संभव होगा।

- 75 मिनट का अंतर कम किया जा सकेगा।

- ट्रेनों की संख्या बढ़ेगी।

- यात्रियों को मेट्रो के लिए कम इंतजार करना पड़ेगा।

- सुबह और शाम ऑफिस समय में भी मेट्रो सेवा उपलब्ध हो सकेगी।

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