
भोपाल की मेट्रो को शुरू हुए एक महीना हो गया है, लेकिन जिस जोश के साथ इसका आगाज हुआ था, वैसी रफ्तार यात्रियों की संख्या में नजर नहीं आ रही। 20 दिसंबर को मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री ने भोपाल मेट्रो का उद्घाटन किया था। 21 दिसंबर से आम जनता के लिए मेट्रो शुरू हुई, लेकिन अब हालात यह हैं कि दिनभर में चलने वाली मेट्रो में गिने-चुने लोग ही सफर कर रहे हैं।
यात्रियों की कमी से बदली टाइमिंग और ट्रिप
मेट्रो को शुरू हुए महज 14 दिन भी नहीं बीते थे कि यात्रियों की कमी के चलते इसके समय और ट्रिप में बदलाव करना पड़ा। फिलहाल दिन में 13 ट्रिप चलाई जा रही हैं, लेकिन इनमें कुल मिलाकर 300 से भी कम यात्री सफर कर रहे हैं। यानी तीन कोच वाली एक मेट्रो में औसतन प्रति ट्रिप सिर्फ 30 यात्री ही बैठ रहे हैं।
उम्मीद से कहीं कम निकली सवारी
भोपाल मेट्रो कॉरपोरेशन को इतनी कम संख्या की उम्मीद नहीं थी। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले समय में पास सुविधा शुरू होने से रोजाना अप-डाउन करने वालों को राहत मिलेगी। साथ ही छात्रों और बुजुर्गों के लिए किराए में छूट देने पर भी विचार किया जा रहा है।
नया शेड्यूल, फिर भी हालात जस के तस
3 जनवरी से नया शेड्यूल लागू किया गया। अब एम्स स्टेशन से मेट्रो सुबह 9 बजे की जगह दोपहर 12 बजे चलती है और आखिरी मेट्रो शाम 7:30 बजे। इसके बावजूद यात्रियों की संख्या में खास बढ़ोतरी नहीं हुई। वीकेंड पर ही थोड़ी भीड़ नजर आती है, बाकी दिनों में संख्या 300–400 के बीच सिमटी रहती है।
आंकड़ों में सच्चाई
13 से 20 जनवरी के बीच करीब 3350 यात्रियों ने मेट्रो में सफर किया।
15 जनवरी को सिर्फ 275 यात्री
18 जनवरी (रविवार) को करीब 1000 यात्री
यह साफ दिखाता है कि वीकेंड के अलावा मेट्रो आम दिनों में लोगों की पहली पसंद नहीं बन पाई है।
कमाई से ज्यादा खर्च
मेट्रो संचालन पर रोजाना करीब 1 लाख रुपए का खर्च आ रहा है, जबकि टिकट से औसतन सिर्फ 10 हजार रुपए की आमदनी हो रही है। हालांकि, मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि आगे चलकर स्टेशनों पर एटीएम, फूड जोन और किड्स जोन जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे अतिरिक्त आय होगी।
इस बीच एक राहत की खबर यह है कि सभी 8 स्टेशनों पर फेयर कलेक्शन सिस्टम लगाने का काम शुरू हो चुका है, जिससे टिकटिंग व्यवस्था और बेहतर होगी।
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