सोमवार, 27 जुलाई 2026
Logo
Madhaya Pradesh

भोपाल मेट्रो बनी घाटे की सवारी! पहले ही महीने में खर्च लाखों, कमाई हजारों में सिमटी

23 जन, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
भोपाल मेट्रो बनी घाटे की सवारी! पहले ही महीने में खर्च लाखों, कमाई हजारों में सिमटी

भोपाल मेट्रो बनी घाटे की सवारी! पहले ही महीने में खर्च लाखों, कमाई हजारों में सिमटी

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल में जिस मेट्रो को लोगों ने ‘जॉय राइड’ समझकर देखा था, वही अब सरकार के लिए सिरदर्द बनती जा रही है। बड़े-बड़े दावों और चमक-दमक के साथ शुरू हुई भोपाल मेट्रो रेल सेवा अपने पहले ही महीने में घाटे के ट्रैक पर दौड़ती नजर आ रही है। हालत ये है कि रोज लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं और कमाई हजारों में सिमट गई है।


पहले महीने में ही फिसली मेट्रो की गाड़ी

21 दिसंबर 2025 को शुरू हुई भोपाल मेट्रो के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। सिर्फ एक महीने में मेट्रो के संचालन पर करीब 2.5 करोड़ रुपये खर्च हो गए, जबकि टिकट बिक्री से आमदनी सिर्फ 4.5 से 5 लाख रुपये ही हो पाई।


रोज 8 लाख खर्च, कमाई सिर्फ 15 हजार

सुभाष नगर से एम्स तक बने 7 किलोमीटर लंबे प्रायोरिटी कॉरिडोर पर मेट्रो चलाने में रोजाना करीब 8 लाख रुपये का खर्च आ रहा है, लेकिन यात्रियों से होने वाली आय सिर्फ 15 हजार रुपये प्रतिदिन तक सीमित है।


यात्रियों की संख्या में भारी गिरावट

शुरुआत में जहां रोज करीब 7 हजार यात्री सफर कर रहे थे, अब ये आंकड़ा घटकर 300 से 350 के बीच रह गया है। यात्रियों की कमी के चलते मेट्रो प्रबंधन को ट्रिप्स की संख्या भी 17 से घटाकर 13 करनी पड़ी है।


2225 करोड़ का निवेश, फिर भी खाली डिब्बे

भोपाल मेट्रो के इस हिस्से पर अब तक करीब 2225 करोड़ रुपये का निवेश हो चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक मेट्रो को एंड-टू-एंड कनेक्टिविटी नहीं मिलेगी, तब तक यात्रियों की संख्या में खास बढ़ोतरी मुश्किल है।


कमाई के वैकल्पिक रास्ते अब तक अधूरे

दिल्ली मेट्रो की तरह विज्ञापन, पार्किंग और कमर्शियल स्पेस जैसे विकल्प अभी तक भोपाल मेट्रो में पूरी तरह लागू नहीं हो पाए हैं। हालांकि इनके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।


मार्च के बाद सुधर सकती है तस्वीर

अधिकारियों के मुताबिक मार्च तक सिग्नलिंग का काम पूरा होने के बाद ट्रिप्स बढ़ाए जा सकते हैं। एंड-टू-एंड कनेक्टिविटी मिलने पर ही राजस्व में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।


भोपाल मेट्रो फिलहाल घाटे की पटरी पर है, लेकिन अगर समय रहते कनेक्टिविटी और कमाई के नए रास्ते नहीं खोले गए, तो यह ‘जॉय राइड’ सरकार के लिए भारी पड़ सकती है।

पाठकों की राय (0)

इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

अपनी प्रतिक्रिया दें