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भोपाल में जमीन के 60 फीट नीचे बन रही मेट्रो सुरंग, दो TBM ने तैयार किया 260 मीटर लंबा रास्ता

10 अग, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
भोपाल में जमीन के 60 फीट नीचे बन रही मेट्रो सुरंग, दो TBM ने तैयार किया 260 मीटर लंबा रास्ता
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल मेट्रो के भूमिगत हिस्से में निर्माण की गति बढ़ गई है। दो टनल बोरिंग मशीनें (TBM) अब तक 260 मीटर सुरंग तैयार कर चुकी हैं और दोनों मशीनें भोपाल रेलवे स्टेशन से ऐशबाग की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।


यह कॉरिडोर घनी आबादी वाले इलाके से होकर गुजरेगा, जिसमें भोपाल रेलवे स्टेशन और नादरा बस स्टैंड जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। मेट्रो अधिकारियों के अनुसार भूमिगत रूट का काम अगले डेढ़ से दो साल में पूरा होने की उम्मीद है।

60 फीट नीचे बन रही हैं दो सुरंगें

अंडरग्राउंड कॉरिडोर का निर्माण दो चरणों में किया जा रहा है। पहले चरण में दोनों TBM भोपाल रेलवे स्टेशन से ऐशबाग की ओर सुरंग तैयार कर रही हैं। मशीनों को जमीन की सतह से करीब 60 फीट नीचे काम करने के लिए लगाया गया है। पहली TBM लगभग 160 मीटर, जबकि दूसरी करीब 100 मीटर सुरंग बना चुकी है। TBM आगे बढ़ते समय मिट्टी काटती है। इसी प्रक्रिया के साथ सुरंग के अंदर स्थायी प्री-कास्ट RCC रिंग लगाई जाती हैं, जो तैयार सुरंग को मजबूती देने में मदद करती हैं।


इमारतों और जमीन की लगातार निगरानी

भूमिगत निर्माण के दौरान सुरंग के ऊपर मौजूद भवनों और अन्य संरचनाओं पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। इसके लिए इंस्ट्रूमेंटेशन और मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया गया है। इस व्यवस्था से संभावित वाइब्रेशन और जमीन के सेटलमेंट में होने वाले बदलावों का पता लगाया जाता है। किसी असामान्य स्थिति के संकेत मिलने पर जरूरी सुधारात्मक कार्रवाई की जा सकती है।


सुरंग के अंदर श्रमिकों की सुरक्षा के इंतजाम

निर्माण स्थल पर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए फ्रेश एयर वेंटिलेशन सिस्टम लगाया गया है। गैस मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए सुरंग के भीतर गैस की नियमित जांच की जाती है। सुरक्षा व्यवस्था के तहत 24 घंटे निगरानी भी रखी जा रही है।


प्रदेश में पहली बार दो TBM का इस्तेमाल

भोपाल के इस प्रोजेक्ट में एक साथ दो टनल बोरिंग मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, प्रदेश में इस तरह की दो TBM का उपयोग पहली बार हो रहा है। अंडरग्राउंड हिस्सा ऐशबाग से सिंधी कॉलोनी के बीच तैयार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य भोपाल रेलवे स्टेशन और नादरा बस स्टैंड जैसे महत्वपूर्ण इलाकों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ना है। घनी आबादी और संवेदनशील शहरी क्षेत्र के नीचे निर्माण को ध्यान में रखते हुए TBM तकनीक को उच्च सटीकता और सुरक्षा के साथ काम करने के लिए डिजाइन किया गया है।


सुभाषनगर-करोंद सेक्शन में भी जारी है काम

भोपाल में एम्स से करोंद चौराहे तक ऑरेंज लाइन का काम चल रहा है। इस परियोजना में सुभाषनगर से एम्स के बीच 6 किलोमीटर का प्रायोरिटी कॉरिडोर है, जहां मेट्रो का संचालन हो रहा है। इसके अगले हिस्से यानी सुभाषनगर से करोंद के बीच निर्माण कार्य जारी है। इसी सेक्शन में मेट्रो का कुछ हिस्सा भूमिगत रहेगा।


भोपाल और नादरा में बनेंगे दो अंडरग्राउंड स्टेशन

भूमिगत कॉरिडोर में भोपाल और नादरा नाम से दो अंडरग्राउंड स्टेशन प्रस्तावित हैं। प्रत्येक स्टेशन की लंबाई करीब 180 मीटर होगी। TBM से तैयार होने वाली सुरंग की लंबाई 3.39 किलोमीटर रहेगी। नादरा स्टेशन के आगे बड़ा बाग के पास 143 मीटर लंबे स्लोप के जरिए मेट्रो फिर जमीन के ऊपर आएगी।


तीन स्तरों पर अलग-अलग सुविधाएं

अंडरग्राउंड स्टेशनों को तीन स्तरों में बांटा जाएगा। प्रत्येक स्तर पर यात्रियों और संचालन से जुड़ी अलग सुविधाएं होंगी।

ग्राउंड लेवल

- मुख्य एंट्री और एग्जिट

- बस एवं वाहन ड्रॉप-ऑफ जोन

- टिकट काउंटर

- कमर्शियल शॉप्स


कॉनकोर्स लेवल

- टिकटिंग व्यवस्था

- ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन गेट

- ग्राहक सहायता केंद्र

- एस्केलेटर और लिफ्ट

- प्रतीक्षालय


प्लेटफॉर्म लेवल

- मेट्रो ट्रेन प्लेटफॉर्म

- डिजिटल डिस्प्ले

- बैठने की व्यवस्था

- सुरक्षा सुविधाएं

- इमरजेंसी सुविधाएं


कई विभागों और नागरिकों का सहयोग

भोपाल मेट्रो के निर्माण में भोपाल नगर निगम, लोक निर्माण विभाग (PWD), रेलवे, पुलिस विभाग, स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और नागरिकों का सहयोग मिल रहा है। इस सहयोग के बीच भूमिगत हिस्से का निर्माण आगे बढ़ाया जा रहा है।

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