
भोपाल। शहर की जमीन के नीचे सोमवार से इतिहास लिखा जाने लगा। भोपाल रेलवे स्टेशन के पास 24 मीटर की गहराई में उतारी गई टनल बोरिंग मशीन 'दुर्गावती' ने मेट्रो की अंडरग्राउंड लाइन के लिए विधिवत खुदाई शुरू कर दी। यह भोपाल के मेट्रो सफर का एक नया और बड़ा अध्याय है।
दस दिन की तैयारी, पांच मीटर की टेस्टिंग — अब असली काम शुरू
मशीन को जमीन में उतारने की प्रक्रिया करीब दस दिन पहले शुरू हुई थी। पहले 5 मीटर तक ट्रायल खुदाई की गई, जो पूरी तरह सफल रही। इसके बाद मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के एमडी एस. कृष्ण चैतन्य ने औपचारिक रूप से इसे हरी झंडी दिखाई। उन्होंने साफ कहा — प्रोजेक्ट की रफ्तार बनाए रखी जाएगी और सभी काम तय समय-सीमा में पूरे होंगे।
₹750 करोड़ में बनेगी 3.39 किमी लंबी भूमिगत लाइन
भोपाल मेट्रो की करोंद से एम्स तक 16 किमी लंबी लाइन में से 3.39 किमी हिस्सा अंडरग्राउंड होगा। इस पूरे भूमिगत खंड के लिए अलग से ₹750 करोड़ का ठेका दिया गया है। यह लाइन ऐशबाग से शुरू होकर सिंधी कॉलोनी तक जाएगी। पूरे रूट में दो अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन बनेंगे — दोनों 180-180 मीटर लंबे। इसके लिए जमीन से 24 मीटर नीचे तक खुदाई की जाएगी।
ट्विन टनल तकनीक — आने-जाने की अलग-अलग सुरंग
यह पूरी अंडरग्राउंड लाइन ट्विन टनल आधारित होगी। यानी मेट्रो के आने और जाने के लिए दो अलग-अलग सुरंगें बनाई जाएंगी। इससे यात्रियों की सुरक्षा और संचालन दोनों बेहतर रहेंगे। पूरे प्रोजेक्ट में कुल तीन TBM मशीनें काम करेंगी। एक अहम तथ्य यह है कि एक बार टनल में उतारने के बाद इन मशीनों को वापस नहीं निकाला जा सकता — केवल कुछ पार्ट्स ही बाहर आते हैं।
इमारतें सुरक्षित रहें — इसलिए होगी PPV मॉनीटरिंग
खुदाई के दौरान आसपास की इमारतों को कोई नुकसान न हो, इसके लिए पिक पार्टिकल वेलोसिटी (PPV) की लगातार निगरानी की जाएगी। यह तकनीक जमीन के कंपन को मापती है और खतरे का पहले से संकेत देती है। इसके अलावा जमीन से 20 मीटर नीचे वेंटिलेशन के लिए बड़े औद्योगिक पंखे लगाए जाएंगे। TBM दुर्गावती पहले 265 मीटर लंबा स्लोप तैयार करेगी, उसके बाद दूसरी मशीन लॉन्च होगी।
अप्रैल में दो और मोर्चों पर खुलेगा काम
भोपाल रेलवे स्टेशन के अलावा अप्रैल में ऐशबाग और सिंधी कॉलोनी की दिशा से भी खुदाई शुरू होगी। साथ ही नादरा बस स्टैंड के पास दूसरे अंडरग्राउंड स्टेशन की खुदाई भी शुरू होगी। यानी एक साथ कई मोर्चों पर काम तेज होगा — और भोपाल की जमीन के नीचे एक नई दुनिया आकार लेने लगेगी।
'दुर्गावती' और 'अहिल्याबाई' — विरासत से जुड़ा भविष्य
इन मशीनों को ऐतिहासिक नाम देने के पीछे एक खास सोच है। अफसरों का कहना है कि इससे स्थानीय लोग इस परियोजना को प्रदेश की विरासत से जोड़ सकें और उन्हें अपनापन महसूस हो।जल्द ही दूसरी मशीन 'अहिल्याबाई' को भी जमीन के नीचे उतारा जाएगा। दो महान नायिकाओं के नाम — और एक शहर का भविष्य बदलने का मिशन। भोपाल का मेट्रो सपना अब जमीन के नीचे से भी आकार ले रहा है।
पाठकों की राय (0)
इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

