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भोपाल मेट्रो: 24 मीटर नीचे आज से सुरंग खुदाई शुरू, TBM से बनेगा 3.39 किमी अंडरग्राउंड कॉरिडोर

30 मार्च, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
भोपाल मेट्रो: 24 मीटर नीचे आज से सुरंग खुदाई शुरू, TBM से बनेगा 3.39 किमी अंडरग्राउंड कॉरिडोर
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट में आज बड़ा माइलस्टोन जुड़ने जा रहा है। पहली बार शहर के नीचे सुरंग बनाने का काम शुरू होगा। टनल बोरिंग मशीन के जरिए जमीन के 24 मीटर नीचे खुदाई शुरू होते ही प्रोजेक्ट नई रफ्तार पकड़ लेगा।


24 मीटर नीचे शुरू होगी खुदाई, रेड सी प्लाजा से होगी शुरुआत

सोमवार दोपहर करीब 2 बजे अधिकारियों की मौजूदगी में टनल बोरिंग मशीन (TBM) का ब्रेक-इन किया जाएगा। यह मशीन रेड सी प्लाजा के पास से सुरंग बनाते हुए पुल पातरा की दिशा में आगे बढ़ेगी। यह पूरा अंडरग्राउंड कॉरिडोर शहर के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को नई दिशा देने वाला है—जिसका असर आने वाले वर्षों में साफ दिखेगा।


3.39 किमी लंबी सुरंग, 2 बड़े अंडरग्राउंड स्टेशन

इस परियोजना के तहत कुल 3.39 किमी लंबी सुरंग तैयार की जाएगी। कॉरिडोर में भोपाल और नादरा नाम के दो अंडरग्राउंड स्टेशन बनेंगे, जिनकी लंबाई करीब 180-180 मीटर होगी। इसके बाद नादरा के आगे करीब 143 मीटर स्लोप के जरिए मेट्रो फिर जमीन के ऊपर आ जाएगी—यानी डिजाइन पूरी तरह आधुनिक और तकनीकी है।


265 मीटर स्लोप के बाद तेज होगी खुदाई

टीबीएम को पहले ही जमीन के अंदर उतारा जा चुका है। अब यह करीब 265 मीटर लंबा ढलान (स्लोप) बनाते हुए आगे बढ़ेगी। इसके बाद असली सुरंग खुदाई शुरू होगी। खास बात यह है कि करीब 50 मीटर खुदाई के बाद दूसरी TBM भी लॉन्च की जाएगी, जिससे काम की गति दोगुनी हो जाएगी।


सुरक्षा पर खास फोकस, PPV से होगी निगरानी

खुदाई के दौरान आसपास की इमारतों को नुकसान न पहुंचे, इसके लिए खास तकनीक अपनाई जा रही है। पीक पार्टिकल वेलॉसिटी (PPV) के जरिए जमीन में होने वाले कंपन को लगातार मॉनिटर किया जाएगा। यह माप मिलीमीटर प्रति सेकंड में होता है और तय सीमा से अधिक कंपन होने पर तुरंत अलर्ट मिलेगा—जिससे सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।


अंडरग्राउंड मेट्रो प्रोजेक्ट शहर के ट्रैफिक और भीड़ को कम करने में अहम भूमिका निभाते हैं। भोपाल जैसे तेजी से बढ़ते शहर में यह प्रोजेक्ट भविष्य के ट्रांसपोर्ट सिस्टम की रीढ़ बन सकता है। खासकर पुराने शहर के इलाकों में, जहां जगह कम है, वहां अंडरग्राउंड मेट्रो सबसे कारगर समाधान माना जाता है।




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