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भोपाल में कब्रिस्तान के नीचे मेट्रो पर विवाद, वक्फ बोर्ड में आज होगी अहम सुनवाई

14 मई, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
भोपाल में कब्रिस्तान के नीचे मेट्रो पर विवाद, वक्फ बोर्ड में आज होगी अहम सुनवाई
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट अब कानूनी विवाद में घिरता नजर आ रहा है। कब्रिस्तान और वक्फ जमीन के नीचे मेट्रो निर्माण को लेकर दायर याचिकाओं पर गुरुवार को वक्फ बोर्ड में सुनवाई होगी। इस मामले में मेट्रो प्रबंधन को अपना पक्ष रखना है, जबकि वक्फ कमेटी ने निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।


कब्रिस्तान के नीचे मेट्रो लाइन पर विवाद

विवाद भोपाल टॉकीज इलाके के पुराने कब्रिस्तान से जुड़ा है। कमेटी इंतेजामियां औकाफ-ए-अम्मा ने दावा किया है कि प्रस्तावित अंडरग्राउंड मेट्रो लाइन हमीदिया रोड स्थित पंजीकृत वक्फ कब्रिस्तान क्षेत्र के नीचे से निकाली जा रही है। याचिका में कहा गया है कि यह कब्रिस्तान धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है और यहां हजारों कब्रें मौजूद हैं।


“एक एकड़ क्षेत्र प्रभावित हो सकता है”

वादी पक्ष का दावा है कि मेट्रो लाइन के निर्माण से करीब एक एकड़ क्षेत्र सीधे प्रभावित हो सकता है। कमेटी का कहना है कि सुरंग निर्माण, खुदाई और कंपन से कब्रों और धार्मिक ढांचों को नुकसान पहुंचने की आशंका है।


नक्शा और तकनीकी रिपोर्ट पर सवाल

याचिका में आरोप लगाया गया है कि मेट्रो प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों ने अब तक विस्तृत नक्शा, सुरक्षा आकलन और तकनीकी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की है। कमेटी के मुताबिक इससे स्थानीय लोगों और धार्मिक संस्थाओं की चिंता और बढ़ गई है।


सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला

कमेटी की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्ट के फैसलों का हवाला दिया है। उनका कहना है कि अदालतें पहले भी कब्रिस्तान की मूल प्रकृति को सुरक्षित रखने की बात कह चुकी हैं और किसी भी परिस्थिति में उसके स्वरूप को बदला नहीं जा सकता।


नारियलखेड़ा की वक्फ जमीन पर भी विवाद

दूसरा मामला नारियलखेड़ा स्थित वक्फ निशात अफजा की जमीन से जुड़ा है। याचिका में दावा किया गया है कि करीब 11.93 हेक्टेयर भूमि वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज है, लेकिन इसके बावजूद बिना अनुमति मेट्रो निर्माण शुरू कर दिया गया।


1.40 एकड़ जमीन पर शुरू हुआ निर्माण

वादी पक्ष का आरोप है कि करीब 1.40 एकड़ वक्फ भूमि पर गड्ढे खोदकर पिलर निर्माण का काम शुरू किया गया है। मौके पर भारी मशीनरी, सरिया और निर्माण सामग्री रखे जाने को भी याचिका में अतिक्रमण बताया गया है।


नोटिस के बावजूद जवाब नहीं मिलने का आरोप

कमेटी का कहना है कि मेट्रो कंपनी को कई बार नोटिस भेजकर नक्शा, स्वीकृति और अधिग्रहण से जुड़े दस्तावेज मांगे गए, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। अब इस पूरे मामले पर गुरुवार की सुनवाई अहम मानी जा रही है, क्योंकि इससे भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट की आगे की दिशा तय हो सकती है।

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