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Bhopal Metropolitan Region: 10 लाख आबादी पर बनेगा नया निकाय, भोपाल केंद्र बनाकर 5 जिलों में बनेंगे उपनगर
17 मार्च, 2026 0 व्यूज 4 मिनट पढ़ाई
Bhopal Metropolitan Region: 10 लाख आबादी पर बनेगा नया निकाय, भोपाल केंद्र बनाकर 5 जिलों में बनेंगे उपनगर
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्य प्रदेश में शहरी विकास को नई दिशा देने के लिए सरकार भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन (BMR) की योजना पर तेजी से काम कर रही है। इस योजना के तहत लगभग 10 लाख की आबादी पर एक नया शहरी निकाय विकसित करने की तैयारी है। इन क्षेत्रों को आधुनिक सुविधाओं से लैस उपनगर के रूप में तैयार किया जाएगा, ताकि लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े। योजना के तहत भोपाल को केंद्र में रखते हुए आसपास के जिलों के क्षेत्रों को जोड़कर एक बड़ा मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र विकसित किया जाएगा।


5 जिलों में बनेंगे नए निकाय और उपनगर

प्रस्तावित योजना के मुताबिक भोपाल जिले की करीब 25 लाख आबादी के साथ आसपास के चार जिलों की लगभग 20 लाख आबादी को मिलाकर नया शहरी ढांचा तैयार किया जाएगा। इस तरह कुल मिलाकर 5 से ज्यादा नए निकाय, कई उपनगर और विशेष विकास क्षेत्र तैयार किए जाएंगे। इन क्षेत्रों में पूरी प्रशासनिक व्यवस्था होगी और उन्हें आधुनिक शहरी सुविधाओं से जोड़ा जाएगा।


बीडीए बना नोडल एजेंसी, कंसल्टेंट तैयार कर रहा प्रस्ताव

इस परियोजना की जिम्मेदारी भोपाल विकास प्राधिकरण (BDA) को नोडल एजेंसी के रूप में दी गई है। फिलहाल बीडीए की कंसल्टेंसी एजेंसी इस पूरी योजना का विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर रही है। अधिकारियों के अनुसार अप्रैल 2027 तक इसकी डीपीआर और प्रस्ताव तैयार हो जाएंगे, जिसके बाद इसे लागू करने की दिशा में काम शुरू होगा। संभागायुक्त और बीडीए प्रशासक संजीव सिंह ने बताया कि भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन की प्लानिंग तेजी से आगे बढ़ रही है और प्रशासनिक सुविधा के लिए इसे अलग-अलग हिस्सों में विभाजित किया जा रहा है।


भोपाल को बनाया गया मेट्रोपॉलिटन का केंद्र

प्रारंभिक नक्शे में भोपाल को इस पूरे मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र का मुख्य केंद्र बनाया गया है। आसपास के जिलों के कुछ हिस्सों को गोलाकार रूप में इसमें शामिल करने की योजना बनाई गई है। हालांकि इस ड्राफ्ट को लेकर कुछ विवाद भी सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि बैरसिया क्षेत्र का बड़ा हिस्सा मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र से बाहर रखा गया है, जिसे लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध भी हो रहा है।


इंदौर की तुलना में पीछे है भोपाल

राज्य सरकार ने इंदौर और भोपाल दोनों को मेट्रोपॉलिटन रीजन के रूप में विकसित करने का फैसला लिया था। लेकिन फिलहाल इस मामले में इंदौर भोपाल से काफी आगे चल रहा है। इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन की डीपीआर का लगभग 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है, जबकि भोपाल में अभी कंसल्टेंसी स्तर पर तैयारी चल रही है।


मेट्रोपॉलिटन योजना के कारण रुका मास्टर प्लान

भोपाल के लंबे समय से लंबित मास्टर प्लान को भी फिलहाल रोक दिया गया है। सरकार का कहना है कि मेट्रोपॉलिटन रीजन की अंतिम योजना सामने आने के बाद ही मास्टर प्लान को अंतिम रूप दिया जाएगा।


बताया जा रहा है कि भोपाल के लिए मास्टर प्लान 2047 तैयार किया जा रहा है, लेकिन यह योजना पहले ही लगभग 21 साल की देरी से चल रही है। यदि मेट्रोपॉलिटन रीजन की प्रक्रिया धीमी रही, तो मास्टर प्लान को लागू होने में और समय लग सकता है।

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