
भोपाल के मिसरोद से मंडीदीप के बीच 100 हेक्टेयर क्षेत्र में इंटीग्रेटेड टाउनशिप विकसित करने की तैयारी अंतिम चरण में है। इस परियोजना के लिए टीएंडसीपी और जिला प्रशासन संयुक्त रूप से प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं और अगले महीने होने वाली बैठक में इसकी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
परियोजना पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर विकसित होगी। योजना के अनुसार 80 फीसदी जमीन निजी डेवलपर उपलब्ध कराएगा, जबकि 20 फीसदी तक सरकारी भूमि जिला प्रशासन की ओर से दी जाएगी। परियोजना की निगरानी की जिम्मेदारी भी जिला प्रशासन के पास रहेगी।
टाउनशिप से किसे मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा
मंडीदीप औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले हजारों इंजीनियरों, अधिकारियों और कर्मचारियों को कार्यस्थल के आसपास ही आवास उपलब्ध हो सकेगा। इससे रोजाना की यात्रा का समय कम होगा और ईंधन खर्च में भी राहत मिलेगी।
योजना के तहत विकसित होने वाले इस नए उप-शहर में स्कूल, अस्पताल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और पार्क जैसी जरूरी सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध कराने की तैयारी है।
इस इलाके को क्यों चुना गया
मिसरोद और मंडीदीप के बीच का क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है। भोपाल की आवासीय कॉलोनियां मिसरोद से आगे मंडीदीप की दिशा में फैल चुकी हैं और दोनों क्षेत्रों के बीच रोज बड़ी संख्या में लोग आवागमन करते हैं।
योजना का उद्देश्य भोपाल और रायसेन जिले के बीच एक ऐसा क्षेत्र विकसित करना है, जो भविष्य में आवासीय और औद्योगिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन सके।
टाउनशिप की प्रमुख शर्तें
इंटीग्रेटेड टाउनशिप नीति के तहत प्रस्तावित परियोजना में कुछ अनिवार्य प्रावधान रखे गए हैं—
40 हेक्टेयर या उससे अधिक क्षेत्र में टाउनशिप विकसित होगी।
मुख्य सड़क की चौड़ाई 30 मीटर होगी।
अधिकतम 65% भूमि आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित रहेगी।
कुल क्षेत्रफल का 10% हिस्सा पार्क और हरित क्षेत्र के लिए आरक्षित होगा।
15% क्षेत्र आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए रखा जाएगा।
परियोजना के सामने प्रमुख चुनौतियां
इस योजना को लागू करने के दौरान कई प्रशासनिक और तकनीकी चुनौतियों का समाधान करना होगा।
भोपाल और रायसेन जिले के प्रशासन के बीच समन्वय।
मंडीदीप औद्योगिक क्षेत्र के कारण प्रदूषण नियंत्रण के लिए उपयुक्त बफर जोन तैयार करना।
एनएच-46 के पास भारी यातायात को देखते हुए प्रभावी ट्रैफिक प्रबंधन।
नई बसाहट के लिए पाइपलाइन आधारित जलापूर्ति और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की व्यवस्था।
टीएंडसीपी अधिकारी ने क्या कहा
टीएंडसीपी के आयुक्त सह संचालक कौशलेंद्र विक्रमसिंह ने बताया कि इंटीग्रेटेड टाउनशिप नीति के तहत डेवलपर्स को लाइसेंस दिए जा रहे हैं और कई डेवलपर्स लाइसेंस प्राप्त कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि भोपाल में इस नीति के माध्यम से नए आवासीय क्षेत्र विकसित किए जाएंगे तथा जिला प्रशासन के साथ मिलकर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
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