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भोपाल में 1 लाख मकानों का सर्वे शुरू, घर से कारोबार करने वालों पर नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई का खतरा बढ़ा

08 अग, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
भोपाल में 1 लाख मकानों का सर्वे शुरू, घर से कारोबार करने वालों पर नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई का खतरा बढ़ा
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। राजधानी भोपाल में रिहाइशी मकानों से चल रही व्यावसायिक गतिविधियों की जांच अब पूरे शहर में होगी। नगर निगम ने 21 जोन में सर्वे के लिए विशेष टीमें गठित की हैं।


निगम का प्रारंभिक अनुमान करीब 1 लाख ऐसी प्रॉपर्टी का है, जहां आवासीय भवनों में कमर्शियल गतिविधियां चल रही हैं। नियम टूटने पर मौके पर नोटिस और आगे चलकर संपत्ति सील करने की कार्रवाई हो सकती है।


15 सितंबर तक सुप्रीम कोर्ट को देनी है रिपोर्ट

नगर निगम के सामने सबसे बड़ी समयसीमा 15 सितंबर की है। इस तारीख तक सुप्रीम कोर्ट में कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत की जानी है। इसी वजह से नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने शहर के सभी 21 जोन के लिए सर्वे दल बनाए हैं। टीमों को गली-मोहल्लों से लेकर बड़ी कॉलोनियों तक रिहाइशी भवनों में चल रहे कारोबार की पहचान करनी होगी। डिप्टी कमिश्नर और कॉलोनी सेल प्रभारी भुवन गुप्ता के अनुसार, प्रारंभिक सर्वे की रिपोर्ट पहले ही कोर्ट में पेश की जा चुकी है। अब व्यापक स्तर पर शहर का सत्यापन किया जाएगा।


प्रॉपर्टी टैक्स से लेकर सड़क की चौड़ाई तक होगी जांच

सर्वे में केवल भवन में चल रही गतिविधि देखना ही पर्याप्त नहीं होगा। नगर निगम अलग-अलग रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का मिलान करेगा।


जांच के दौरान मुख्य रूप से ये बिंदु देखे जाएंगे:

- प्रॉपर्टी टैक्स रिकॉर्ड में दर्ज उपयोग

- भवन का वास्तविक इस्तेमाल

- सड़क की चौड़ाई

- व्यावसायिक गतिविधि की स्थिति

- वाटर बॉडी और ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में निर्माण व उपयोग


नगर निगम की टीमें वाटर बॉडी और ग्रीन बेल्ट एरिया में भी सर्वे करेंगी। इससे आवासीय भवनों के कमर्शियल इस्तेमाल की वास्तविक स्थिति सामने लाने की कोशिश होगी।


10 से 15 दिन में सर्वे, मौके पर ही नोटिस

नगर निगम ने पूरे अभियान को 10 से 15 दिन में पूरा करने का लक्ष्य रखा है। जिस संपत्ति पर नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा, उसके मालिक को मौके पर ही नोटिस दिया जाएगा। निगम के अनुमान के मुताबिक इस अभियान में करीब 1 लाख नोटिस जारी किए जा सकते हैं। कार्रवाई नहीं करने पर आगे संपत्ति सील करने की प्रक्रिया हो सकती है।


रिकॉर्ड में 65 हजार कमर्शियल प्रॉपर्टी

नगर निगम के मौजूदा रिकॉर्ड में लगभग 65 हजार व्यावसायिक संपत्तियां पंजीकृत हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में ऐसे मकान भी हैं, जहां कारोबार चल रहा है लेकिन व्यावसायिक कर जमा नहीं किया जा रहा। कई मामलों में भवन के उपयोग को बदलने की अनुमति भी नहीं ली गई है। सर्वे के दौरान ऐसे मामलों की पहचान कर रिकॉर्ड से वास्तविक स्थिति का मिलान किया जाएगा।


5 अगस्त के सुप्रीम कोर्ट आदेश के बाद तेज हुई कार्रवाई

इस मामले में 5 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी। कोर्ट ने कार्रवाई जारी रखने को कहा और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से दुकान संचालकों को मिले सभी अंतरिम राहत यानी स्टे आदेश निरस्त कर दिए। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके निर्देशों के साथ-साथ चल रही कार्रवाई को किसी दूसरी जांच प्रक्रिया या समिति के जरिए रोका नहीं जा सकता। सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से रखे गए पक्ष पर भी कोर्ट ने नाराजगी जताई। कोर्ट ने अवैध निर्माण और रिहाइशी भवनों के व्यावसायिक इस्तेमाल के मामलों में कानून का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा।


छोटे कारोबारियों को राहत देने की मांग

विशेषज्ञों का मानना है कि सर्वे और कोर्ट में रिपोर्ट जमा होने के बाद सीलिंग की कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकता है। कारोबारियों को राहत देने के लिए सरकार के सामने तीन विकल्प सुझाए गए हैं। पहला विकल्प छोटे कारोबारों को अलग श्रेणी में रखकर राहत देने का है। इसमें ब्यूटी पार्लर, सैलून, कोचिंग सेंटर और किराना दुकानों जैसे छोटे व्यवसायों को छूट के दायरे में रखने की बात कही गई है।


प्रमुख सड़कों पर मिक्स लैंड यूज का सुझाव

दूसरे विकल्प के तौर पर प्रमुख सड़कों पर मिक्स लैंड यूज लागू करने का सुझाव है। इसमें एक ही क्षेत्र में आवासीय और व्यावसायिक उपयोग की अनुमति दी जा सकती है। जिन इलाकों का नाम इस प्रस्ताव में लिया गया है, उनमें लिंक रोड नंबर-1, 2-3, कोलार रोड, होशंगाबाद रोड, हमीदिया रोड, बैरागढ़ रोड, रायसेन रोड, 10 नंबर मार्केट और बिट्ठन मार्केट शामिल हैं।


भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स के सचिव अजय देवनानी का कहना है कि गुजरात में प्रमुख सड़कों पर मिक्स लैंड यूज की व्यवस्था लागू है। उनका सुझाव है कि भोपाल में भी इसी तरह की व्यवस्था बनाई जाए।


मास्टर प्लान को जल्द लागू करने की मांग

तीसरा रास्ता भोपाल के मास्टर प्लान को जल्द लागू करना बताया जा रहा है। इसमें प्रमुख सड़कों और विकसित बाजारों के लिए अलग प्रावधान होने की उम्मीद है। कांग्रेस विधायक भी सरकार से मास्टर प्लान को शीघ्र लागू करने की मांग कर रहे हैं। इससे आवासीय और व्यावसायिक उपयोग से जुड़े विवादों के लिए नियोजित समाधान का रास्ता बन सकता है।


5 लाख से ज्यादा रोजगार पर असर की आशंका

रिहाइशी इलाकों में चल रही कमर्शियल गतिविधियों को बड़े पैमाने पर बंद करने का असर रोजगार पर भी पड़ सकता है। अनुमान है कि इससे करीब 5 लाख से अधिक लोगों का रोजगार प्रभावित हो सकता है। रिकॉर्ड के मुताबिक नर्मदापुरम रोड पर करीब 2,500 और कोलार रोड पर लगभग 2,000 कमर्शियल प्रॉपर्टी दर्ज हैं। ये दोनों इलाके शहर के प्रमुख विकसित कारोबारी क्षेत्रों में शामिल हैं।


18 मीटर से चौड़ी सड़कों पर मिल सकता है नियंत्रित कारोबार

नए मास्टर प्लान में प्रमुख सड़कों के लिए अलग नियम रखने की बात सामने आई है। 18 मीटर से अधिक चौड़ी सड़कों पर कुछ शर्तों के साथ नियंत्रित व्यावसायिक गतिविधियों को अनुमति देने का प्रावधान हो सकता है। इसके लिए पर्याप्त पार्किंग, ट्रैफिक मैनेजमेंट और नागरिक सुविधाओं जैसी शर्तें रखी जा सकती हैं। ऐसी व्यवस्था से नर्मदापुरम रोड और कोलार रोड जैसे विकसित बाजारों के लिए व्यावहारिक रास्ता निकल सकता है।


किन लोगों पर सबसे ज्यादा असर?

घर से कारोबार चलाने वाले लोगों के लिए सर्वे महत्वपूर्ण है। खास तौर पर वे संपत्तियां जांच के दायरे में आएंगी जहां भवन आवासीय रिकॉर्ड में है, लेकिन उसका इस्तेमाल व्यापार के लिए किया जा रहा है। ब्यूटी पार्लर, किराना दुकान, कोचिंग सेंटर, बुटीक, क्लिनिक और अन्य कमर्शियल गतिविधियों वाले मकानों में नियमों के पालन की जांच की जाएगी। उल्लंघन मिलने पर मौके पर नोटिस और आगे की कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।


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