
भोपाल में नगर निगम का बजट पेश होने से पहले ही कई बड़े फैसलों की चर्चा तेज हो गई है। इस बार उम्मीद है कि शहर को नई सुविधाओं का तोहफा मिलेगा, लेकिन आम जनता के लिए राहत की बात ये है कि फिलहाल टैक्स बढ़ाने का कोई संकेत नहीं है।
बजट का आकार: 3500 करोड़ के आसपास
23 मार्च को पेश होने वाला नगर निगम का बजट इस बार करीब साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये का हो सकता है।
पिछले साल टैक्स बढ़ोतरी को लेकर जनप्रतिनिधियों में असहमति सामने आई थी, जिसके बाद इस बार प्रशासन सतर्क नजर आ रहा है। सूत्रों के अनुसार, निगम फिलहाल टैक्स बढ़ाने से बचते हुए विकास कार्यों पर फोकस करना चाहता है।
मेट्रो स्टेशनों के नीचे बनेगी 5 पार्किंग्स
शहर में ट्रैफिक और पार्किंग की समस्या को देखते हुए नगर निगम 14 नई पार्किंग बनाने की तैयारी में है। इनमें से 5 पार्किंग मेट्रो स्टेशनों के नीचे बनाई जाएंगी।
इन पार्किंग में अनुमानित क्षमता:
40 चारपहिया वाहन
250 दोपहिया वाहन
यह प्रस्ताव पहले ही मेयर इन काउंसिल से मंजूर हो चुका है और अब अंतिम स्वीकृति के लिए परिषद में रखा जाएगा।
क्यों जरूरी है ये पार्किंग?
भोपाल मेट्रो के प्रायोरिटी कॉरिडोर (6.22 किमी) पर बने स्टेशनों पर फिलहाल पार्किंग की सुविधा नहीं है।
यात्रियों को सिर्फ “पिक एंड ड्रॉप” की सुविधा मिलती है, जिससे रोजाना आने-जाने वालों को परेशानी होती है।
ये हैं प्रमुख मेट्रो स्टेशन:
सुभाष नगर
केंद्रीय विद्यालय
डीबी मॉल
एमपी नगर
रानी कमलापति
डीआरएम तिराहा
अलकापुरी
एम्स
इन जगहों पर बनेगी पार्किंग
नई योजना के तहत इन स्टेशनों के नीचे पार्किंग विकसित की जाएगी:
सुभाष नगर (दोनों गेट)
केंद्रीय विद्यालय
डीबी मॉल
डीआरएम ऑफिस क्षेत्र
अलकापुरी
जहां अभी नहीं बनेगी पार्किंग
एमपी नगर
रानी कमलापति
एम्स
हालांकि इन इलाकों में पहले से वैकल्पिक पार्किंग मौजूद है:
- रानी कमलापति स्टेशन पर बड़ी पार्किंग पहले से उपलब्ध
- एमपी नगर में निगम की पार्किंग
- एम्स के पास भविष्य में पार्किंग विकसित करने की योजना
सफाई और कचरा प्रबंधन पर भी फोकस
नगर निगम शहर की पुरानी कचरा समस्या को भी हल करने की दिशा में काम कर रहा है। आदमपुर खंती में जमा लीगेसी वेस्ट के निपटान के लिए करीब 55.54 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव है। इससे शहर की स्वच्छता और पर्यावरण दोनों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
कबाड़ हो चुके वाहनों पर भी फैसला
नगर निगम के 145 पुराने और अनुपयोगी वाहनों को कंडम घोषित करने का प्रस्ताव भी परिषद में रखा जाएगा।
इससे रखरखाव का खर्च कम होगा और संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा।
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