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भोपाल सराफा बाज़ार में नकली हॉलमार्क का जाल — 23 कैरेट के नाम पर 18 कैरेट सोना, ग्राहकों को 30% तक चूना

30 मार्च, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
भोपाल सराफा बाज़ार में नकली हॉलमार्क का जाल — 23 कैरेट के नाम पर 18 कैरेट सोना, ग्राहकों को 30% तक चूना
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

आप सोना खरीदते हैं — भरोसे के साथ, मेहनत की कमाई लगाकर। लेकिन भोपाल के कई सराफा बाज़ारों में यही भरोसा टूट रहा है। 23 कैरेट का लेबल, असल में 18 कैरेट का सोना — और यह सब हो रहा है नकली हॉलमार्क की मुहर की आड़ में। जब तक ठगी का पता चलता है, तब तक लाखों रुपए का नुकसान हो चुका होता है।


रोज़ ₹7.23 करोड़ का कारोबार, और उसमें छुपा बड़ा फर्जीवाड़ा

भोपाल के सराफा चौक, बैरागढ़, कोलार, करोंद, अवधपुरी और आनंदनगर जैसे प्रमुख बाज़ारों में रोज़ाना करीब 5 किलो सोने के आभूषण बिकते हैं। इनकी कीमत औसतन ₹7.23 करोड़ रोज़ होती है। शादी-त्योहार के सीजन में यह आंकड़ा ₹10-12 करोड़ तक पहुंच जाता है। इतने बड़े कारोबार में जब मिलावट होती है, तो नुकसान भी उतना ही बड़ा होता है। सूत्रों के मुताबिक कई दुकानों पर 23 कैरेट के नाम पर सिर्फ 18 कैरेट का सोना बेचा जा रहा है। 18 कैरेट बताकर 14 कैरेट थमाया जा रहा है।


कैसे होती है असल ठगी — समझें पूरा खेल

सोने के आभूषणों को मज़बूत बनाने के लिए उसमें तांबा, चांदी और जस्ता जैसी धातुएं मिलाना एक सामान्य प्रक्रिया है। लेकिन बेईमान कारोबारी इसी प्रक्रिया का फायदा उठाकर सोने की मात्रा चुपचाप घटा देते हैं और नकली हॉलमार्क की डाई से मुहर लगाकर आभूषण बेच देते हैं। इसके अलावा जेवर में लगे नग और मीनाकारी का वज़न भी सोने के साथ जोड़कर कीमत वसूली जाती है — जबकि इन चीज़ों की अलग और बहुत कम कीमत होती है। सूत्र यह भी बताते हैं कि नेपाल, आगरा, जयपुर, मुंबई और दिल्ली से बिना GST चुकाए "नंबर दो" में सोना मंगाया जाता है, जिससे लागत कम रहती है और मुनाफा मोटा।


दो असली पीड़ितों की कहानी — जो आपको सोचने पर मजबूर कर दे

आनंदनगर की सुनीता वर्मा ने लॉकडाउन से पहले 10 ग्राम सोने की जंजीर खरीदी थी — दुकानदार ने 22 कैरेट बताया था। मई 2025 में जरूरत पड़ने पर जब वे बेचने गईं, तो 16 कैरेट का भाव मिला। दुकानदार ने कहा — "टांके की वजह से ऐसा होता है।"


अरेरा कॉलोनी के दीपचंद जैन ने 2024 में बच्चे की शादी के लिए ₹73,000 प्रति 10 ग्राम के हिसाब से 35 ग्राम सोने के आभूषण खरीदे — 23 कैरेट बताकर। जनवरी 2026 में मकान खरीदने के लिए सोना बेचा तो मिला 18 कैरेट का भाव — ₹1 लाख प्रति 10 ग्राम। जबकि उस वक्त 23 कैरेट का बाज़ार भाव था ₹1 लाख 53 हज़ार। यानी सीधे ₹1.85 लाख से ज़्यादा का नुकसान।


क्या होता है हॉलमार्क — और नकली को कैसे पहचानें?

हॉलमार्क भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा जारी सोने की शुद्धता का सरकारी प्रमाण है। इसमें आभूषण की कैरेट वैल्यू और एक यूनिक HUID नंबर होता है, जिससे उसकी असलियत किसी भी वक्त जांची जा सकती है। देश में 14, 18, 22 और 23 कैरेट की ज्वेलरी पर हॉलमार्किंग अनिवार्य है। 3 ग्राम से कम वज़न के जेवरों को इससे छूट है। भोपाल में फिलहाल लखेरापुरा, मारवाड़ी रोड, प्रोफेसर कॉलोनी, बैरागढ़ और कोलार समेत कुल 8 हॉलमार्किंग लैब हैं जहां सोने की शुद्धता जांची जा सकती है।


23 कैरेट : 95.8% 

22 कैरेट : 91.6% 

18 कैरेट : 75.0%

14 कैरेट : 58.3% 


खुद को कैसे बचाएं — 4 ज़रूरी कदम

भोपाल सराफा महासंघ के संगठन मंत्री नवनीत अग्रवाल ने साफ कहा है कि ग्राहक को चाहिए कि सोना खरीदते वक्त:


- BIS हॉलमार्क वाले आभूषण ही लें

- HUID नंबर ज़रूर जांचें

- पक्का GST बिल मांगें

- BIS Care मोबाइल ऐप से तुरंत जांच करें


सराफा एसोसिएशन, सराफा चौक के अध्यक्ष नरेश अग्रवाल ने चेतावनी दी है कि नकली हॉलमार्क वाले जेवर बेचने वाले कारोबारियों के खिलाफ एसोसिएशन सख्त कार्रवाई करेगी।

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