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भोपाल में नारी आक्रोश रैली: महिला आरक्षण बिल पर BJP का विरोध, सीएम मोहन यादव बोले—बहनें हक के लिए सड़कों पर

20 अप्रैल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
भोपाल में नारी आक्रोश रैली: महिला आरक्षण बिल पर BJP का विरोध, सीएम मोहन यादव बोले—बहनें हक के लिए सड़कों पर
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। महिला आरक्षण बिल पर सियासत अब खुलकर सड़कों पर आ गई है। भोपाल में आज भाजपा की नारी आक्रोश रैली में बड़ी संख्या में महिलाएं जुटीं और विपक्ष के खिलाफ आवाज बुलंद की।


एमवीएम ग्राउंड में जुटी हजारों महिलाएं

राजधानी के एमवीएम कॉलेज ग्राउंड में सुबह 11 बजे से रैली शुरू हुई। इसमें मुख्यमंत्री Mohan Yadav, प्रदेश अध्यक्ष Hemant Khandelwal और कई महिला मंत्री व कार्यकर्ता शामिल रहीं। रैली में महिलाओं की भारी मौजूदगी ने इसे बड़ा शक्ति प्रदर्शन बना दिया।


“बहनें हक के लिए लड़ने आई हैं”—सीएम

रैली को संबोधित करते हुए Mohan Yadav ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भोपाल की सड़कों पर आज बहनें अपने अधिकार के लिए उतरी हैं और यह लड़ाई कांग्रेस समेत विपक्ष के खिलाफ है। सीएम ने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए कहा कि महिलाओं के सम्मान के लिए हमेशा संघर्ष होता आया है।


विपक्ष पर सीधे सवाल, प्रियंका गांधी का जिक्र

सीएम ने विपक्ष को घेरते हुए कहा कि “नारी हूं, लड़ सकती हूं” का नारा देने वाले अब महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ खड़े क्यों हैं? उन्होंने कांग्रेस पर महिलाओं के अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाया और इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया। इस बयान से साफ है कि यह मुद्दा आने वाले समय में और गरमाएगा।


विधानसभा में विशेष सत्र बुलाने की घोषणा

सीएम ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि महिलाओं के अधिकार के मुद्दे पर विधानसभा में विशेष सत्र बुलाया जाएगा। इसमें महिला आरक्षण बिल को लेकर निंदा प्रस्ताव पारित किया जाएगा। यानी यह विरोध सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विधानसभा तक पहुंचेगा।


“अब याचना नहीं, रण होगा”—महिला मोर्चा

भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष Ashwini Paranjpe ने भी कड़ा रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि संसद में बिल गिरने के बाद जश्न मनाना महिलाओं का अपमान है और मातृशक्ति इसका जवाब देगी। 


क्यों भड़का यह पूरा विवाद?

दरअसल, हाल ही में लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन बिल पास नहीं हो सका था। इसमें महिलाओं को 33% आरक्षण देने का प्रस्ताव था, लेकिन जरूरी बहुमत नहीं मिल पाया। यही वजह है कि अब यह मुद्दा राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गया है।

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