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भोपाल का नया नियम: 40 हजार लीटर पानी खर्च किया तो खुद उठानी होगी कचरे की जिम्मेदारी

11 जून, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
भोपाल का नया नियम: 40 हजार लीटर पानी खर्च किया तो खुद उठानी होगी कचरे की जिम्मेदारी
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। 1 अप्रैल 2026 से लागू केंद्र सरकार के नए नियमों के तहत शहर की 900 से अधिक बड़ी कॉलोनियां, हाउसिंग सोसायटियां और व्यावसायिक संस्थान 'बल्क वेस्ट जनरेटर' की श्रेणी में आएंगे। ऐसे परिसरों को अपने कचरे का प्रबंधन खुद करना होगा या निर्धारित व्यवस्था के तहत उसका निपटान कराना होगा। नगर निगम को इस पूरी व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है।


किन परिसरों पर लागू होंगे नए नियम?

नए नियमों के अनुसार यदि कोई परिसर नीचे दिए गए चार मानकों में से किसी एक को भी पूरा करता है, तो उसे 'बल्क वेस्ट जनरेटर' माना जाएगा। 5 एकड़ या 20,000 वर्गमीटर से अधिक फ्लोर एरिया वाली हाउसिंग सोसायटी।


5,000 वर्गमीटर से बड़े होटल, मॉल, अस्पताल, मैरिज गार्डन और बाजार।


प्रतिदिन 100 किलोग्राम या उससे अधिक ठोस कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थान।


रोजाना 40,000 लीटर या उससे अधिक पानी की खपत करने वाले परिसर।



नगर निगम के अनुसार सिर्फ पानी की खपत के आधार पर ही भोपाल की 900 से ज्यादा सोसायटियां इस दायरे में आ जाएंगी।


सोसायटियों के पास होंगे तीन विकल्प

नए कानून के तहत बड़ी सोसायटियों और संस्थानों को कचरा प्रबंधन के लिए तीन विकल्प दिए जाएंगे।


पहला, परिसर के भीतर ही प्रोसेसिंग प्लांट लगाकर खाद या बायोगैस तैयार करें।


दूसरा, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में पंजीकृत एजेंसी को कचरा प्रबंधन का जिम्मा दें।


तीसरा, नगर निगम के ग्लोबल ट्रांसफर स्टेशन पर कचरा भेजें। इसके लिए शुल्क तय किया गया है—


आवासीय सोसायटी: ₹2,100 प्रति टन


सरकारी विभाग, स्कूल, कॉलेज: ₹2,400 प्रति टन


मॉल, होटल, अस्पताल, मैरिज गार्डन: ₹2,700 प्रति टन



यदि कचरा पूरी तरह अलग-अलग श्रेणियों में छांटकर दिया जाएगा, तो केवल ₹922 प्रति टन शुल्क देना होगा।


अब हर घर और सोसायटी में होंगे चार डस्टबिन

नए नियमों के तहत अगले डेढ़ साल में चार डस्टबिन व्यवस्था लागू की जाएगी। अब केवल गीला और सूखा नहीं, बल्कि चार अलग-अलग श्रेणियों में कचरा अलग करना होगा—


गीला कचरा


सूखा कचरा


सैनिटरी वेस्ट


घरेलू ई-वेस्ट



नगर निगम का कहना है कि इससे कचरे की प्रोसेसिंग अधिक प्रभावी होगी और रीसाइक्लिंग को बढ़ावा मिलेगा।


मिक्स कचरा दिया तो लगेगा 150% जुर्माना

नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि बिना छंटाई के मिश्रित कचरा देने पर निर्धारित शुल्क का 150% अतिरिक्त जुर्माना देना होगा। इसके अलावा, यदि किसी घर, संस्था या परिसर में 100 से अधिक मेहमानों वाला सामाजिक, धार्मिक या पारिवारिक आयोजन होता है, तो कार्यक्रम से तीन दिन पहले नगर निगम से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।


वसूली सबसे बड़ी चुनौती, टैक्स में मिलेगी राहत

नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्ष कचरा कलेक्शन शुल्क का लक्ष्य ₹104 करोड़ था, लेकिन केवल ₹38.43 करोड़ यानी करीब 36% राशि ही वसूल हो सकी। नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन के अनुसार जो बड़ी कॉलोनियां अपने परिसर में 100% कचरे का निपटान करेंगी, उन्हें कचरा संग्रहण शुल्क में राहत दी जाएगी। साथ ही कचरा परिवहन करने वाले वाहनों की डिजिटल ट्रैकिंग होगी और प्रत्येक सोसायटी को कचरे के निपटान का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा।

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