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भोपाल में आज नो UPI डे, व्यापारी 2 हजार से ज्यादा का ऑनलाइन पेमेंट नहीं लेंगे, 15 अक्टूबर के चार्ज का विरोध

08 अक्टू, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
भोपाल में आज नो UPI डे, व्यापारी 2 हजार से ज्यादा का ऑनलाइन पेमेंट नहीं लेंगे, 15 अक्टूबर के चार्ज का विरोध
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। राजधानी भोपाल के थोक दाल-चावल कारोबारी 8 अक्टूबर को UPI भुगतान को लेकर सांकेतिक विरोध करेंगे। व्यापारी 2 हजार रुपए से अधिक का भुगतान UPI के जरिए स्वीकार नहीं करेंगे।


इस विरोध की वजह 15 अक्टूबर से प्रस्तावित 0.4% MDR चार्ज है। व्यापारियों का कहना है कि नए शुल्क से खासतौर पर थोक कारोबार करने वालों पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ सकता है।


15 अक्टूबर से प्रस्तावित है UPI चार्ज

व्यापारियों के मुताबिक, 2 हजार रुपए से अधिक के व्यक्ति-से-व्यापारी UPI भुगतान पर 0.4% MDR प्रस्तावित किया गया है। 75 हजार रुपए या उससे अधिक के लेनदेन पर यह शुल्क अधिकतम 300 रुपए तक निर्धारित होने की बात कही गई है।


एक दिन में 3 हजार रुपए तक शुल्क का दावा

भोपाल के व्यापारियों का तर्क है कि लगातार कई बड़े डिजिटल भुगतान होने पर शुल्क की राशि बढ़ सकती है। उनका कहना है कि 2 हजार रुपए से अधिक के 10 लेन-देन होने पर एक दिन में 3 हजार रुपए तक का चार्ज बन सकता है। व्यापारियों के अनुसार, इसका सीधा असर विशेष रूप से थोक कारोबार की लागत पर पड़ सकता है।


महासंघ ने बताया विरोध का तरीका

भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री विवेक साहू ने कहा कि UPI व्यापारियों और आम लोगों के लिए तेज, सरल और सुविधाजनक भुगतान माध्यम बन गया है। उनके मुताबिक, इस व्यवस्था पर MDR लागू होने से छोटे और मध्यम व्यापारियों के खर्च में बढ़ोतरी हो सकती है। इसी मुद्दे को सरकार तक पहुंचाने के लिए 8 अक्टूबर को ‘नो UPI डे’ रखा गया है।


उन्होंने बताया कि बाजार के व्यापारियों से इस दिन UPI भुगतान स्वीकार नहीं करने और शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक तरीके से विरोध में शामिल होने की अपील की गई है।


डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने में सहयोग का दावा

चावल-दाल व्यापारी संघ के अध्यक्ष महेश रामरख्यानी और सचिव सचिन संगतानी ने कहा कि व्यापारियों ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने में लगातार सहयोग किया है। उनका कहना है कि डिजिटल इंडिया की दिशा में कारोबारियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। व्यापारी चाहते हैं कि उनकी व्यावहारिक दिक्कतों को देखते हुए सरकार MDR से जुड़े प्रस्ताव पर दोबारा विचार करे।

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