
भोपाल। राजधानी भोपाल में अब खेतों में पराली जलाना भारी पड़ सकता है। प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है—अगर किसी ने नियम तोड़ा, तो सीधे FIR दर्ज होगी। यह फैसला अगले 3 महीने के लिए लागू किया गया है, जिसका असर हजारों किसानों पर पड़ेगा…
जून तक पूरी तरह प्रतिबंध, सख्त कार्रवाई के निर्देश
भोपाल जिले में पराली (नरवाई) जलाने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। एडीएम सुमित कुमार पांडेय के आदेश के मुताबिक यह प्रतिबंध अगले जून तक लागू रहेगा। सभी एसडीएम को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जहां भी पराली जलाने की घटना सामने आए, वहां तुरंत कार्रवाई की जाए। यानी अब लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं बची है…
नियम तोड़ा तो सीधे FIR, कानूनी शिकंजा कड़ा
इस आदेश का उल्लंघन करने वालों पर सिर्फ जुर्माना ही नहीं, बल्कि थाने में एफआईआर दर्ज की जाएगी। प्रशासन ने इसे कानूनी रूप से सख्त बनाते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत कार्रवाई की बात कही है। इसका मतलब है कि पराली जलाना अब सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि कानूनी अपराध भी माना जाएगा…
गेहूं कटाई के बीच बढ़ीं घटनाएं, इसलिए लिया फैसला
अभी जिले में बड़े पैमाने पर गेहूं की कटाई चल रही है। इसके बाद कई किसान खेत साफ करने के लिए पराली में आग लगा देते हैं, जिससे घटनाएं बढ़ गई थीं। इसी को देखते हुए प्रशासन ने समय रहते यह सख्त कदम उठाया, ताकि बड़े नुकसान को रोका जा सके…
पराली जलाने से मिट्टी और पर्यावरण को नुकसान
प्रशासन ने अपने आदेश में साफ किया है कि पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति खत्म होती है और उत्पादन पर असर पड़ता है। साथ ही आग से निकलने वाली जहरीली गैसें पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती हैं। कई बार आग अनियंत्रित होकर आसपास की संपत्ति, वनस्पति और जीव-जंतुओं को भी नुकसान पहुंचाती है…
विकल्प मौजूद, फिर क्यों जलाते हैं किसान?
जिले में अब रोटावेटर और अन्य मशीनों की सुविधा उपलब्ध है, जिससे फसल के अवशेष को खेत में ही मिलाया जा सकता है। ये अवशेष सड़कर जमीन को प्राकृतिक रूप से उपजाऊ बनाते हैं। यानी पराली जलाना न सिर्फ नुकसानदायक है, बल्कि उपलब्ध बेहतर विकल्पों को नजरअंदाज करना भी है…
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