
भोपाल। मध्य प्रदेश में मौसम बदलने के साथ सांस से जुड़ी परेशानियां बढ़ रही हैं। भोपाल के अस्पतालों में निमोनिया के मरीज पहुंच रहे हैं, जिनमें कुछ मामलों में वायरल संक्रमण के बाद बैक्टीरियल इंफेक्शन भी सामने आ रहा है।
RIRD की ओपीडी में रोज 4-5 निमोनिया मरीज आ रहे हैं, जबकि जेपी अस्पताल में प्रतिदिन 2-3 मरीज पहुंच रहे हैं। दोनों फेफड़ों को प्रभावित करने वाला संक्रमण बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए अधिक गंभीर हो सकता है।
वायरल के बाद बैक्टीरियल संक्रमण की चुनौती
रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ रेस्पिरेटरी डिजीज (RIRD) की ओपीडी में आने वाले मरीजों में वायरल निमोनिया के मामले अधिक हैं। संस्थान के अधीक्षक डॉ. लोकेन्द्र दवे के मुताबिक रोज आने वाले मरीजों में 3-4 मामले वायरल निमोनिया के होते हैं।
कुछ मरीजों में वायरल संक्रमण के साथ बैक्टीरियल इंफेक्शन भी मिल रहा है। जेपी अस्पताल में भी हर दिन 2-3 निमोनिया मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।
दोनों फेफड़ों में संक्रमण से बढ़ती है परेशानी
बाइलेट्रल निमोनिया में दोनों फेफड़ों में सूजन के साथ तरल पदार्थ जमा हो सकता है। इससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलने में परेशानी होती है। इसके सामान्य लक्षणों में तेज बुखार, खांसी, बलगम, सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द और कमजोरी शामिल हो सकते हैं। लगातार गिरता ऑक्सीजन स्तर गंभीर स्थिति का संकेत माना जाता है।
किन लोगों को ज्यादा सावधानी की जरूरत
बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों में इस संक्रमण के गंभीर होने का खतरा अधिक बताया गया है। खासकर इन मरीजों को सावधानी रखने की जरूरत है:
अस्थमा से पीड़ित लोग
सीओपीडी मरीज
हृदय रोग से जूझ रहे लोग
डायबिटीज वाले मरीज
कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग
भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क लगाने, हाथों की स्वच्छता बनाए रखने और धूम्रपान से बचने की सलाह दी गई है। डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक नहीं लेना चाहिए।
58 वर्षीय राजेंद्र के दोनों फेफड़ों में मिला संक्रमण
58 वर्षीय राजेंद्र चार दिन से बुखार और खांसी से परेशान थे। परेशानी बढ़ने पर उन्हें सांस फूलने लगी, जिसके बाद वे अस्पताल पहुंचे। जांच के दौरान सीटी स्कैन कराया गया। इसमें दोनों फेफड़ों में संक्रमण पाया गया।
संगीता का ऑक्सीजन स्तर 92 फीसदी पहुंचा
जवाहर नगर निवासी संगीता को बुखार आने के बाद खांसी और सांस फूलने की समस्या शुरू हुई। उनकी स्थिति में ऑक्सीजन का स्तर घटकर 92 फीसदी रह गया। सीटी स्कैन में दोनों फेफड़ों में संक्रमण के पैच दिखाई दिए।
वायरल संक्रमण के बाद हो सकता है सेकंडरी निमोनिया
गांधी मेडिकल कॉलेज के सांस रोग विशेषज्ञ डॉ. निशांत श्रीवास्तव के अनुसार संक्रमण होने के बाद फेफड़ों की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ सकती है। ऐसी स्थिति में बाद में होने वाले बैक्टीरियल संक्रमण को सेकंडरी बैक्टीरियल निमोनिया कहा जाता है। उनका कहना है कि बुजुर्गों और पहले से फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे मरीजों में यह संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है।
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