
भोपाल। राजधानी में लगातार बारिश और जगह-जगह जलभराव के बीच मौसमी बीमारियों का असर बढ़ता दिखाई दे रहा है। सर्दी-जुकाम, खांसी, बुखार और शरीर में दर्द की शिकायत लेकर मरीज सरकारी अस्पतालों की मेडिसिन ओपीडी में पहुंच रहे हैं। इसके साथ ही त्वचा संक्रमण और बारिश के बाद होने वाली पेट की बीमारियों के मरीजों की संख्या में भी इजाफा हुआ है।
जेपी अस्पताल, हमीदिया अस्पताल और एम्स भोपाल में जुलाई की तुलना में अगस्त में मेडिसिन ओपीडी का दबाव बढ़ा है। इसी बीच भोपाल में H1N1 यानी स्वाइन फ्लू के 6 मामलों की पुष्टि हुई है। उपलब्ध स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक सभी मरीज रिकवर कर चुके हैं।
बारिश और उमस के बीच डेंगू को लेकर भी स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ाई है। दूसरी ओर, जमा पानी और लगातार नमी के कारण मच्छरों के साथ फंगल और अन्य त्वचा संक्रमण का खतरा भी बढ़ रहा है।
तीन बड़े अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की संख्या
अस्पतालों से मिले आंकड़ों के मुताबिक जुलाई की तुलना में अगस्त में तीनों प्रमुख अस्पतालों की मेडिसिन ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ी है। जेपी अस्पताल में जुलाई में रोजाना औसतन 120 से 150 मरीज आते थे, जो अगस्त में बढ़कर 200 से अधिक हो गए हैं। हमीदिया अस्पताल में जुलाई का दैनिक औसत 150 से 160 मरीज था, जबकि अगस्त में यह संख्या बढ़कर 230 से 280 तक पहुंच गई। वहीं, एम्स भोपाल की मेडिसिन ओपीडी में जुलाई में रोजाना औसतन 200 से 230 मरीज पहुंच रहे थे, जबकि अगस्त में यह संख्या बढ़कर करीब 300 मरीज प्रतिदिन हो गई है।
H1N1 के 6 केस, सभी मरीज ठीक हुए
भोपाल में अगस्त के दौरान H1N1 के 6 मरीज मिलने की पुष्टि हुई है। जिला स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक ये मामले निजी अस्पतालों में दर्ज हुए और सभी मरीज अब स्वस्थ हो चुके हैं। इसके बावजूद फ्लू जैसे लक्षण वाले मरीजों पर निगरानी बढ़ाई गई है।
H1N1 को लेकर लोगों में अक्सर इसे अलग या नया वायरस समझने की गलतफहमी होती है। स्वास्थ्य मंत्रालय की क्लिनिकल गाइडलाइन के अनुसार 2009 में महामारी का कारण बना Influenza A(H1N1)pdm09 वायरस अब भी मौसमी इन्फ्लुएंजा के रूप में सर्कुलेट करता है। H3N2 समेत इन्फ्लुएंजा के अन्य स्ट्रेन भी संक्रमण का कारण बन सकते हैं।
भारत के कई हिस्सों में मानसून मौसमी इन्फ्लुएंजा की गतिविधि बढ़ने का समय माना जाता है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है।
बुखार उतरने के बाद भी ठंड और बॉडी पेन
हमीदिया अस्पताल के वरिष्ठ श्वांस रोग विशेषज्ञ डॉ. निशांत श्रीवास्तव के अनुसार ओपीडी में फ्लू जैसे लक्षण वाले मरीज बढ़े हैं। इनमें बुखार, खांसी, जुकाम और शरीर में दर्द की शिकायत प्रमुख है।
डॉक्टरों के मुताबिक कुछ मरीजों में बुखार कम होने के बाद भी ठंड लगना और शरीर में दर्द बना रहने की शिकायत मिल रही है। हालांकि, ऐसे लक्षण केवल H1N1 में ही हों, यह जरूरी नहीं है। मौसम के दौरान दूसरे वायरल संक्रमण भी इसी तरह के लक्षण दे सकते हैं।
इसलिए केवल लक्षण देखकर स्वाइन फ्लू या डेंगू मान लेना सही नहीं है। यदि बुखार लगातार बना रहे, सांस लेने में परेशानी हो, कमजोरी बढ़े या हालत बिगड़ती महसूस हो तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
हमीदिया में H1N1 जांच की तैयारी
H1N1 के संभावित मामलों की जांच के लिए हमीदिया अस्पताल में टेस्टिंग किट की व्यवस्था की गई है, जबकि एम्स भोपाल में जांच की सुविधा उपलब्ध है। इसका उद्देश्य फ्लू जैसे लक्षण वाले मरीजों में जरूरत पड़ने पर संक्रमण की पुष्टि करना है।
हालांकि, हर सर्दी-जुकाम और बुखार वाले मरीज को H1N1 की जांच की जरूरत नहीं होती। डॉक्टर लक्षण, बीमारी की गंभीरता और मरीज की जोखिम स्थिति को देखते हुए जांच की सलाह देते हैं।
बारिश के पानी से पेट की बीमारियों का खतरा
बारिश के मौसम में केवल वायरल और सांस संबंधी संक्रमण ही चिंता का कारण नहीं हैं। पानी दूषित होने पर डायरिया, टाइफाइड और हेपेटाइटिस-A/E जैसे संक्रमण भी बढ़ सकते हैं।
मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. योगेंद्र श्रीवास्तव के मुताबिक इस मौसम में बुखार को सामान्य वायरल मानकर लंबे समय तक नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। खासकर जब बुखार के साथ उल्टी-दस्त, पेट दर्द, अत्यधिक कमजोरी या शरीर में दर्द जैसी शिकायत हो तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
बारिश के दौरान पीने के पानी की स्वच्छता और खुले में बिकने वाले भोजन से बचाव संक्रमण का खतरा कम करने में अहम है।
डेंगू का खतरा अभी कम, लेकिन सितंबर से बढ़ सकती है चुनौती
भोपाल में डेंगू के मामले पिछले कुछ वर्षों की तुलना में कम बताए जा रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने आने वाले महीनों को लेकर निगरानी बढ़ा दी है। उपलब्ध स्थानीय जानकारी में इस साल अब तक डेंगू के आंकड़े 60 से ज्यादा बताए गए हैं, जबकि अगस्त में नए मामलों की संख्या अलग-अलग रिपोर्टिंग अवधि में अलग रही है।
इसलिए डेंगू के कुल मरीजों का आंकड़ा बताते समय तारीख और रिपोर्टिंग अवधि स्पष्ट करना जरूरी है। फिलहाल इतना साफ है कि मामले सामने आ रहे हैं और विभाग मच्छरों की ब्रीडिंग रोकने के लिए सर्वे तथा लार्वा नियंत्रण गतिविधियां चला रहा है।
आमतौर पर बारिश के बाद जमा पानी मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल माहौल बनाता है। इसी वजह से सितंबर से नवंबर के दौरान डेंगू और चिकनगुनिया को लेकर अतिरिक्त सतर्कता जरूरी हो जाती है।
कूलर, गमले और टायर बन रहे मच्छरों की ‘नर्सरी’
बारिश रुकने के बाद घरों और आसपास जमा साफ पानी Aedes मच्छरों के लिए प्रजनन स्थल बन सकता है। कूलर, गमले, पुराने टायर, छतों पर रखे कंटेनर और पानी की खुली टंकियां इसकी प्रमुख जगहें हैं।
डेंगू का मच्छर आमतौर पर दिन में काटता है। इसलिए केवल रात में मच्छरदानी लगाना पर्याप्त नहीं है। घर के आसपास पानी जमा न होने देना और नियमित रूप से कंटेनरों की सफाई करना ज्यादा प्रभावी बचाव है।
त्वचा संक्रमण के मरीज भी बढ़े
लगातार बारिश और वातावरण में बढ़ी नमी का असर त्वचा पर भी दिखाई दे रहा है। एम्स और हमीदिया की स्किन ओपीडी में त्वचा संक्रमण के मरीजों में करीब 20 फीसदी तक बढ़ोतरी बताई जा रही है। हमीदिया में सप्ताह के शुरुआती दिनों में ऐसे मरीजों की संख्या करीब 150 तक पहुंचने की जानकारी दी गई है।
त्वचा विशेषज्ञों के मुताबिक लगातार गीले कपड़े पहनना, पैरों का लंबे समय तक पानी में रहना और त्वचा की ठीक से सफाई न होना फंगल संक्रमण का खतरा बढ़ाता है।
बारिश में ये त्वचा संक्रमण ज्यादा परेशान कर सकते हैं
फंगल इंफेक्शन: जांघों के बीच, बगल, गर्दन और उंगलियों के बीच खुजली, लालिमा और दाने हो सकते हैं।
एथलीट फुट: पैरों की उंगलियों के बीच होने वाला फंगल संक्रमण है। पैर लंबे समय तक गीले रहने पर इसका खतरा बढ़ता है।
बैक्टीरियल इंफेक्शन: नमी और त्वचा पर चोट या घाव होने की स्थिति में बैक्टीरिया संक्रमण पैदा कर सकते हैं।
पिटिरियासिस रोजिया: शरीर पर गुलाबी या लाल चकत्ते दिखाई दे सकते हैं और कई मामलों में ये धीरे-धीरे दूसरे हिस्सों तक फैल सकते हैं।
कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी?
बारिश के मौसम में हर बुखार डेंगू या स्वाइन फ्लू नहीं होता, लेकिन लगातार रहने वाले लक्षणों को नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए।
खास तौर पर लगातार कई दिनों तक बुखार, सांस लेने में परेशानी, बहुत ज्यादा कमजोरी, लगातार उल्टी-दस्त, शरीर में पानी की कमी, खून आना या हालत तेजी से बिगड़ना जैसे लक्षण हों तो डॉक्टर से तत्काल संपर्क करना चाहिए।
डेंगू की आशंका होने पर बिना चिकित्सकीय सलाह के दर्द की दवाएं लेना भी उचित नहीं है। WHO की गाइडलाइन में संदिग्ध डेंगू में aspirin और ibuprofen जैसी NSAID दवाओं से बचने की सलाह दी गई है, क्योंकि इनमें रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है।
बारिश में बीमारी से बचने के लिए क्या करें?
- घर और आसपास पानी जमा न होने दें।
- कूलर का पानी नियमित रूप से खाली कर साफ करें।
- गमले, टायर और खुले कंटेनर में पानी न जमा होने दें।
- पीने के लिए साफ पानी इस्तेमाल करें।
- खुले में रखा या अस्वच्छ भोजन खाने से बचें।
- बारिश में भीगने के बाद गीले कपड़े जल्द बदलें।
- पैरों और त्वचा को सूखा रखें।
- लगातार बुखार रहने पर खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह लें।
- डेंगू की आशंका में aspirin या ibuprofen जैसी दर्द निवारक दवाएं बिना चिकित्सकीय सलाह न लें।
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