
भोपाल। दशहरे के लिए भोपाल में रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतलों की खरीदारी तेज हो गई है। शहर में 2 से 20 फीट तक के पुतले उपलब्ध हैं, जबकि विशेष ऑर्डर पर 40 फीट या उससे अधिक ऊंचाई के पुतले भी तैयार किए जा रहे हैं।
राजधानी में 18 से अधिक बड़े आयोजन स्थलों और 7 हजार से ज्यादा गली-मोहल्लों व कॉलोनियों में रावण दहन की तैयारी है। मंगलवार को बारिश की संभावना के चलते कारीगरों ने वॉटरप्रूफ पुतले भी बनाए हैं, लेकिन खरीदारों को इनकी उपलब्धता में परेशानी हो रही है।
300 से ज्यादा कारीगरों ने डेढ़ महीने में तैयार किए पुतले
भोपाल में लिंक रोड नंबर-2 के आसपास तुलसीनगर, सेकंड स्टॉफ, बांसखेड़ी, ईंटखेड़ी और पंचशील नगर सहित कई इलाकों में पुतले बनाने का काम बड़े पैमाने पर हुआ है। यहां 300 से अधिक कारीगर पिछले डेढ़ से दो महीने से जुटे हैं।
तैयार पुतलों को अब सड़क किनारे बिक्री के लिए सजाया गया है। सोमवार को बड़ी संख्या में लोग खरीदारी करने पहुंचे। मंगलवार शाम तक ग्राहकों के आने का सिलसिला जारी रहने की उम्मीद है।
800 से 40 हजार रुपये तक कीमत
पुतलों की कीमत उनके आकार और निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के आधार पर तय हो रही है। सामान्य तौर पर 2 से 20 फीट तक के पुतले बाजार में रखे गए हैं, जबकि बड़े आकार के पुतले ऑर्डर पर बनाए जाते हैं।
- छोटे और मध्यम आकार के पुतले भी उपलब्ध हैं।
- विशेष ऑर्डर पर 40 फीट या इससे ऊंचे पुतले तैयार किए जाते हैं।
- बाजार में कीमतें 800 रुपये से लेकर 40 हजार रुपये तक हैं।
- रावण के साथ कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले भी खरीदे जा सकते हैं।
बांस, सूत और कागज की कीमत बढ़ने से महंगा हुआ निर्माण
लिंक रोड नंबर-2 पर परिवार के साथ पुतले बनाने वाली कारीगर राखी पटेल के मुताबिक, निर्माण सामग्री महंगी होने से इस बार लागत बढ़ गई है। उनके अनुसार, बांस की कीमत 150 रुपये से बढ़कर 200 रुपये हो गई है।
सूत अब 120 रुपये के बजाय 180 रुपये में मिल रहा है, जबकि कागज की कीमत 60 रुपये से बढ़कर 80 रुपये हो गई है। इन बढ़ी हुई दरों का असर पुतलों की कीमतों पर भी पड़ रहा है।
करोंद से आए ग्राहक को नहीं मिला वॉटरप्रूफ पुतला
करोंद से खरीदारी करने पहुंचे अजय सोनी ने बताया कि इस बार पुतलों की कीमतों में करीब 500 से 1,000 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है। उनके मुताबिक, बाजार में छोटे आकार के पुतले ज्यादा दिखाई दे रहे हैं।
अजय सोनी वॉटरप्रूफ पुतला खरीदना चाहते थे, लेकिन उन्हें यह नहीं मिल सका। आखिरकार उन्हें कागज से बना पुतला ही खरीदना पड़ा।
पटाखे लगवाने पर बढ़ जाएगी कीमत
कारीगर खेमचंद ने बताया कि सामान्य तौर पर तैयार किए जाने वाले पुतलों में पटाखे शामिल नहीं होते। ग्राहक अपनी मांग के अनुसार पटाखे लगवाते हैं तो इसके लिए अतिरिक्त कीमत चुकानी पड़ती है।
बड़े पुतलों की लागत अधिक होने की वजह उनका आकार और निर्माण सामग्री है। इन्हें बनाने में बांस, धागा, कपड़ा और कागज ज्यादा मात्रा में लगता है। साथ ही, एक बड़े पुतले को तैयार करने में तीन से चार कारीगरों की जरूरत पड़ती है।
2022 की बारिश से हुआ था नुकसान, अब फिर बढ़ी चिंता
साल 2022 में दशहरे के दौरान तेज बारिश के कारण भोपाल में रावण के पुतले भीग गए थे। उस समय बांसखेड़ी क्षेत्र के कारीगरों को अपने तैयार पुतले बस स्टॉप में रखने पड़े थे, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था।
उस घटना के बाद तीन साल तक इस तरह की परेशानी सामने नहीं आई। अब मंगलवार को बारिश का अनुमान जताए जाने से कारीगरों को एक बार फिर नुकसान की आशंका सता रही है। इसी कारण कुछ पुतले वॉटरप्रूफ भी तैयार किए गए हैं।
रावण के साथ कुंभकरण और मेघनाथ के पुतलों की भी मांग
कारीगरों के अनुसार, बाजार में रावण के पुतलों को आकर्षक वेशभूषा और हथियारों के साथ तैयार किया जाता है। इनके साथ कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले भी उपलब्ध कराए जाते हैं।
शहर में बड़े आयोजनों से लेकर गली-मोहल्लों और कॉलोनियों तक रावण दहन की तैयारियों के चलते पुतलों की बिक्री के लिए मंगलवार शाम तक का समय अहम बना हुआ है। बारिश की संभावना के बीच कारीगरों की कोशिश है कि तैयार पुतलों को सुरक्षित रखा जा सके और ग्राहकों की मांग पूरी हो सके।
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