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भोपाल में अवैध कमर्शियल गतिविधियों के खिलाफ आज टॉर्च रैली, रहवासी बोले- नोटिस नहीं, अब सीलिंग चाहिए

22 अग, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
भोपाल में अवैध कमर्शियल गतिविधियों के खिलाफ आज टॉर्च रैली, रहवासी बोले- नोटिस नहीं, अब सीलिंग चाहिए
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। रिहायशी इलाकों में लगातार बढ़ रही व्यावसायिक गतिविधियों और नगर निगम की कार्रवाई को लेकर रहवासियों का आक्रोश अब सड़क पर दिखाई देगा। शनिवार शाम गुलमोहर में संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति के बैनर तले टॉर्च लाइट मार्च निकाला जाएगा। इसमें अरेरा कॉलोनी, बावड़ियाकलां, रोहित नगर, शाहपुरा समेत आसपास के इलाकों के रहवासी शामिल होंगे।


रहवासियों का कहना है कि आवासीय क्षेत्रों में अवैध व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम ने नोटिस और कार्रवाई की बात तो की, लेकिन जमीन पर प्रभावी सीलिंग और ध्वस्तीकरण जैसी कार्रवाई अभी भी अपेक्षा के मुताबिक नहीं हुई है। उनका आरोप है कि कुछ प्रतिष्ठान कार्रवाई के दौरान बंद हुए, लेकिन बाद में उन्हीं जगहों पर दोबारा गतिविधियां शुरू होने लगीं या नए किरायेदारों की तलाश शुरू हो गई।


‘सील किया था तो फिर TO-LET का बोर्ड कैसे?’

अरेरा कॉलोनी निवासी और मामले में याचिकाकर्ताओं में शामिल विवेक त्रिपाठी का कहना है कि नगर निगम ने 1 अगस्त से कार्रवाई शुरू करने का दावा किया था। कई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों ने भी अपने यहां निगम के निर्देश पर गतिविधियां बंद होने की सूचना लगाई थी।


लेकिन अब कुछ स्थानों पर ‘TO-LET’ के बोर्ड दिखाई दे रहे हैं। रहवासियों का सवाल है कि अगर किसी भवन में व्यावसायिक गतिविधि वास्तव में बंद करा दी गई है, तो उसी जगह पर नए व्यावसायिक किरायेदार की तलाश कैसे शुरू हो गई?


त्रिपाठी का आरोप है कि ऐसी स्थिति में कार्रवाई का उद्देश्य ही कमजोर हो जाता है। उनके मुताबिक, केवल दुकान या प्रतिष्ठान कुछ समय के लिए बंद करवा देना पर्याप्त नहीं है। यदि भवन का इस्तेमाल ही नियमों के विपरीत व्यावसायिक गतिविधि के लिए हो रहा है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार स्थायी कार्रवाई जरूरी है।


सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद भी विवाद क्यों?

यह मामला अब केवल भोपाल नगर निगम और स्थानीय रहवासियों के बीच का विवाद नहीं रह गया है। आवासीय परिसरों के व्यावसायिक इस्तेमाल और अवैध निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में देशभर में कार्रवाई का मुद्दा चल रहा है।


सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि स्वीकृत उपयोग के विपरीत किए गए अनधिकृत निर्माण और भूमि उपयोग को केवल लंबे समय तक बने रहने या अधिकारियों की निष्क्रियता के आधार पर वैध नहीं माना जा सकता। राजेंद्र कुमार बरजात्या मामले में कोर्ट ने आवासीय भूखंड पर बिना अनुमति बने व्यावसायिक निर्माण के खिलाफ कार्रवाई के सिद्धांत को स्पष्ट किया था।


इसी व्यापक मामले की निगरानी के दौरान भोपाल सहित देश की राजधानियों में आवासीय क्षेत्रों के व्यावसायिक इस्तेमाल की पहचान और कार्रवाई का मुद्दा सामने आया।


5 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने MP सरकार पर जताई नाराजगी

भोपाल मामले में सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम 5 अगस्त का रहा। मध्यप्रदेश सरकार ने 2 अगस्त को एक 10 सदस्यीय समिति बनाकर आवासीय भवनों के व्यावसायिक इस्तेमाल से जुड़े मामलों की समीक्षा का फैसला लिया था। इस बीच नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई रोक दी गई।


सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार समिति बनाकर मामले का अध्ययन कर सकती है, लेकिन इससे कोर्ट के निर्देशों के तहत चल रही कार्रवाई को रोका नहीं जा सकता। कोर्ट ने राज्य सरकार के उस प्रशासनिक आदेश को फिलहाल प्रभावहीन रखने का निर्देश दिया और संबंधित रिकॉर्ड भी तलब किए।


सुनवाई के दौरान कोर्ट को यह भी बताया गया कि भोपाल में 1,000 से अधिक व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं और कुछ प्रतिष्ठानों पर सीलिंग की कार्रवाई हुई है।


रहवासियों का सवाल- नोटिस के बाद अगला कदम क्या?

रहवासियों की सबसे बड़ी आपत्ति यही है कि कार्रवाई की प्रक्रिया नोटिस, सर्वे और कागजी रिपोर्ट तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उनका कहना है कि जिन भवनों में नियमों का उल्लंघन स्पष्ट रूप से सामने आ चुका है, वहां नियमानुसार आगे की कार्रवाई दिखाई देनी चाहिए।


उनका तर्क है कि आवासीय कॉलोनियों की सड़कें, पार्किंग, ड्रेनेज, बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं मुख्य रूप से रिहायशी आबादी को ध्यान में रखकर विकसित की गई थीं। बड़े क्लिनिक, कार्यालय, कोचिंग सेंटर, दुकानें और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ने से इन इलाकों में ट्रैफिक, पार्किंग, शोर और अन्य नागरिक समस्याएं भी बढ़ती हैं।


अरेरा कॉलोनी और अन्य इलाकों के रहवासी पहले भी इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन कर चुके हैं। उनका कहना है कि उनका विरोध किसी कारोबारी या व्यापारिक समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि आवासीय क्षेत्र में नियमों के उल्लंघन और असमान कार्रवाई के खिलाफ है।


‘नोटिस का खेल बंद करो, अवैध निर्माण सील करो’

टॉर्च मार्च के जरिए रहवासी नगर निगम और प्रशासन तक अपनी मांग पहुंचाने की तैयारी में हैं। उनकी प्रमुख मांग है कि जिन संपत्तियों में नियमों के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं, वहां सिर्फ नोटिस देकर मामला लंबित न रखा जाए।


रहवासियों की मांग है कि सर्वे और जांच पूरी होने के बाद सीलिंग, ध्वस्तीकरण या अन्य वैधानिक कार्रवाई स्पष्ट रूप से दिखाई देनी चाहिए। उनका कहना है कि कार्रवाई में देरी से उन लोगों को फायदा मिल रहा है, जो नियमों का उल्लंघन कर आवासीय भूखंडों का व्यावसायिक इस्तेमाल कर रहे हैं।


कहां से शुरू होगा टॉर्च लाइट मार्च?

शनिवार शाम गुलमोहर स्थित सेवाएं मार्केट से टॉर्च लाइट मार्च शुरू होगा। संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति के बैनर तले होने वाले इस मार्च में अरेरा कॉलोनी, बावड़ियाकलां और आसपास के अन्य रिहायशी इलाकों के लोग शामिल होंगे।


रहवासियों का कहना है कि यह आंदोलन केवल एक कॉलोनी का मुद्दा नहीं है। उनका सवाल है कि अगर आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर नियम हैं और अदालत ने भी उनके पालन पर जोर दिया है, तो फिर उनका मैदानी स्तर पर समान और प्रभावी पालन क्यों नहीं हो रहा?


अब शनिवार की रैली के बाद नगर निगम की अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी। खास तौर पर यह देखना अहम होगा कि जिन संपत्तियों पर पहले कार्रवाई या नोटिस हो चुका है, वहां दोबारा व्यावसायिक गतिविधि रोकने के लिए निगम क्या कदम उठाता है।

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