
भोपाल। राजधानी भोपाल में आवासीय भूखंडों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण से जुड़े विवाद पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होगी। याचिकाकर्ता इस दौरान अवैध निर्माण, उनके उपयोग और नगर निगम की कार्रवाई से जुड़े मुद्दों पर अपना पक्ष अदालत के सामने रखेंगे।
इस मामले पर सुनवाई मंगलवार को प्रस्तावित थी, लेकिन वह नहीं हो सकी। अब अदालत में होने वाली सुनवाई पर व्यापारियों, रहवासियों और प्रशासन सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
सुप्रीम कोर्ट में क्या होगा मुद्दा
याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी के अनुसार, पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने देश की सभी राजधानियों के नगर निगम अधिकारियों को तलब किया था। उन्होंने बताया कि अदालत ने अवैध निर्माण के मामलों में राज्यों की कमजोर कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई और राजस्थान (जयपुर), हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और मिजोरम को लेकर भी चेतावनी दी थी। बुधवार को भोपाल से संबंधित याचिका पर सुनवाई निर्धारित है।
कोर्ट की सख्ती के बाद निगम ने शुरू की कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद भोपाल नगर निगम ने आवासीय क्षेत्रों में संचालित कई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ अभियान चलाया। दो दिनों के भीतर कई प्रतिष्ठानों को सील किया गया। कई व्यापारियों ने कार्रवाई के बाद स्वयं ही अपनी दुकानें बंद कर दी थीं।
मुख्यमंत्री की बैठक के बाद व्यापारियों को मिली राहत
रविवार शाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित हुई। इसमें फिलहाल व्यापारियों को राहत देने का निर्णय लिया गया। बैठक में विश्वास सारंग, कृष्णा गौर, रामेश्वर शर्मा, भगवानदास सबनानी, मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे, नगर एवं ग्राम निवेश आयुक्त कौशलेंद्र विक्रम सिंह, भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा और नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
उच्चस्तरीय समिति करेगी पूरे मामले की समीक्षा
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाए। समिति सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का अध्ययन कर पूरे प्रकरण की जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट आने तक व्यापारियों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। इसके बाद सोमवार को अधिकांश दुकानें दोबारा खुल गईं।
याचिकाकर्ता ने कार्रवाई पर उठाए सवाल
याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी का कहना है कि नगर निगम ने जिन अवैध दुकानों को सील करने के लिए नोटिस जारी किए थे, उनके विरुद्ध अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। उनका यह भी कहना है कि प्रतिष्ठानों का दोबारा खुलना भी उचित नहीं है।
रहवासियों ने भी किया था विरोध प्रदर्शन
मुख्यमंत्री की बैठक से पहले रविवार को अरेरा कॉलोनी, रोहित नगर और बावड़ियाकलां सहित कई इलाकों के रहवासी सड़कों पर उतरे थे। संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति के नेतृत्व में निकाले गए पैदल मार्च में लोगों ने आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों और नगर निगम की कार्रवाई को लेकर विरोध दर्ज कराया।
चैंबर ऑफ कॉमर्स ने रखी यह मांग
भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने व्यापारियों के पक्ष में मिक्स लैंड यूज व्यवस्था लागू करने की मांग की है। चैंबर के अध्यक्ष गोविंद गोयल और सचिव अजय देवनानी ने कहा कि भोपाल विकास योजना (मास्टर प्लान) का अंतिम प्रकाशन वर्ष 2005 में हुआ था। इसके बाद नया मास्टर प्लान लागू नहीं किया गया।
देवनानी का कहना है कि नए मास्टर प्लान के अभाव में व्यापारियों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप व्यावसायिक भूखंड उपलब्ध नहीं हो सके, इसलिए अनेक लोग आवासीय परिसरों से ही व्यवसाय संचालित करने को मजबूर हैं। उन्होंने सरकार द्वारा व्यापारियों को दी गई राहत का भी उल्लेख किया।
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