
भोपाल के मास्टर प्लान में वर्ष 1995 में शामिल कई सड़क परियोजनाएं अब आगे नहीं बढ़ेंगी। वर्ष 2026 में नगर तथा ग्राम निवेश विभाग (टीएंडसीपी) ने इन सड़कों को निरस्त करने की सूची जारी की है। इन योजनाओं से जुड़ी 15 सड़कों पर डीपीआर, कंसल्टेंसी और निर्माण कार्यों के मद में करीब 500 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी सामने आई है।
जिन मार्गों से शहर की कनेक्टिविटी बेहतर करने की उम्मीद थी, उनके रास्ते में अब मकान, कॉलोनियां, संस्थान, धार्मिक स्थल और दूसरी बाधाएं हैं। लंबे समय तक जमीन सुरक्षित नहीं रखे जाने के कारण कई प्रस्तावों को अमल में लाना मुश्किल हो गया। योजनाएं समाप्त होने से संबंधित जमीन के उपयोगकर्ताओं को भी राहत मिली है।
1995 में तय हुए रास्ते, 2026 में योजनाओं पर विराम
भोपाल के मास्टर प्लान में इन सड़कों को शहर के विस्तार, बढ़ती आबादी और अलग-अलग क्षेत्रों के बीच संपर्क बेहतर बनाने के उद्देश्य से शामिल किया गया था। योजना के मुताबिक भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर मार्गों का निर्धारण किया गया था।
समस्या यह रही कि प्रस्तावित सड़कों के लिए जमीन का संरक्षण और अधिग्रहण समय रहते नहीं हो सका। वर्षों के दौरान कई जगह निजी निर्माण, बसाहट और अतिक्रमण जैसी स्थितियां बन गईं। परिणामस्वरूप, कुछ मार्गों पर काम आगे बढ़ाना संभव नहीं रहा और उन्हें निरस्त करने का निर्णय लिया गया।
कहां कौन-सी सड़क बनी बाधा?
टीएंडसीपी की सूची में शामिल मार्गों के विवरण से पता चलता है कि हर सड़क को रद्द करने की वजह अलग-अलग रही। कहीं पहले से उपलब्ध वैकल्पिक रास्ता था, तो कहीं प्रस्तावित जमीन पर निर्माण हो चुका था।
प्रमुख सड़कों और उनके सामने आई बाधाओं का विवरण इस प्रकार है:
- मुबारकपुर चौराहा से बैरसिया रोड: 60 मीटर चौड़ी और 8.35 किलोमीटर लंबी प्रस्तावित सड़क के लिए पहले से एक अन्य बायपास उपलब्ध होने का कारण दिया गया।
- एयरोसिटी से बीडीए तक, आरजीपीवी के रास्ते: प्रस्तावित मार्ग राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) के परिसर और भवनों के बीच से गुजर रहा था।
- संजीवनगर से नेवरी होते हुए बायपास: 24 मीटर चौड़ी सड़क के प्रस्तावित रास्ते पर नेवरी की बसाहट आ गई।
- लालघाटी से विदिशा बायपास: 6.30 किलोमीटर लंबी और 45 मीटर चौड़ी सड़क के सामने सिंगारचोली पहाड़ी के मकान और चर्च की बाधा थी।
- छोला से बेस्ट प्राइस: 45 मीटर चौड़ी सड़क के अलाइनमेंट पर अवैध कॉलोनियां विकसित हो गईं।
- गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र: 24 मीटर चौड़ी प्रस्तावित सड़क की निर्धारित लाइन में कई औद्योगिक इकाइयां आ रही थीं।
- अयोध्या बायपास से प्रभात चौराहा: 7.70 किलोमीटर लंबी और 30 मीटर चौड़ी सड़क के रास्ते में 446 मकान थे।
- एसटीपी से अयोध्या बायपास होते हुए सेवनिया ओंकारा: 30 मीटर चौड़ी सड़क के लिए संस्थान की जमीन बाधक बनी। इनपुट में इसकी लंबाई साढ़े चार मीटर दर्ज है, जिसकी आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
- नरेला शंकरी से जेके रोड होते हुए बायपास: 24 मीटर चौड़ी और 3.5 किलोमीटर लंबी सड़क के रास्ते में गांव के मकान और बसाहटें थीं।
- पिपलानी से रायसेन रोड: 24 मीटर चौड़ी सड़क का प्रस्ताव अलाइनमेंट बदलने के कारण आगे नहीं बढ़ सका।
- सिद्धार्थ लेक सिटी से रायसेन-अयोध्या बायपास: 60 मीटर चौड़ी और 1.95 किलोमीटर लंबी सड़क के रास्ते में हाईटेंशन लाइन थी।
- आशिमा मॉल से रायसेन रोड बायपास: 60 मीटर चौड़ी सड़क करीब 3 किलोमीटर तक मौजूद है, लेकिन आगे के 4 किलोमीटर हिस्से के लिए जमीन उपलब्ध नहीं है।
- पानी पिपलानी थाने से एसओएस बालग्राम: 24 मीटर चौड़ी सड़क को वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होने के कारण रद्द किया गया।
- एम्स से आरआरएल होते हुए खोरी कला बायपास: 30 मीटर चौड़ी सड़क करीब 3 किलोमीटर लंबाई में प्रस्तावित थी, जिसे निरस्त कर दिया गया।
- नर्मदापुरम मार्ग से आकृति इको सिटी: 30 मीटर चौड़ी और 3 किलोमीटर लंबी सड़क सूची में शामिल है।
- बर्रई से गेहूंखेड़ा, सलैया के रास्ते: 45 मीटर चौड़ी सड़क के कुछ हिस्सों में बाधाएं दर्ज की गईं।
- नयापुरा कोलार मार्ग से सनखेड़ी-चीचली: 36 मीटर चौड़ी और 4.30 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्धारित रास्ते पर मकान बन गए।
- दामखेड़ा कोलार से चंदनपुरा: 45 मीटर चौड़ी और 3.30 किलोमीटर लंबी सड़क प्रस्तावित थी।
- चूनाभट्टी बसाहट से खुशीलाल शर्मा अस्पताल: 24 मीटर चौड़ी सड़क को पहाड़ी की खड़ी ढलान के कारण रद्द किया गया।
जमीन पर निर्माण बढ़ा, लेकिन सड़क की योजना अटकी रही
इन प्रस्तावों के पीछे शहर की भविष्य की जरूरतों का आकलन था। बढ़ती आबादी के साथ नए क्षेत्रों को जोड़ने और आवाजाही के लिए अतिरिक्त मार्ग उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई थी।
लेकिन जमीन पर योजनाओं के अनुरूप काम नहीं हो सका। प्रस्तावित अलाइनमेंट पर मकान, कॉलोनियां और दूसरी संरचनाएं बनती रहीं। जिन स्थानों पर सरकारी या निजी संस्थानों की जमीन रास्ते में आई, वहां भी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में दिक्कत हुई।
इन परिस्थितियों में पुराने प्रस्तावों को जारी रखने की जगह उन्हें निरस्त करने का फैसला लिया गया। उपलब्ध विवरण के अनुसार, 15 सड़कों से जुड़ी प्रक्रिया में डीपीआर और कंसल्टेंसी से लेकर निर्माण तक करीब 500 करोड़ रुपये खर्च होने का उल्लेख है।
सड़कें रद्द होने से मकान-दुकान मालिकों को राहत
प्रस्तावित सड़कों के दायरे में आने वाली जमीन पर घर, दुकान या अन्य उपयोग करने वाले लोगों के लिए लंबे समय से अनिश्चितता बनी हुई थी। सड़क निर्माण की संभावना के कारण उन्हें भविष्य में संपत्ति प्रभावित होने की आशंका रहती थी।
अब संबंधित योजनाएं रद्द होने से ऐसे लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। उन्हें इन पुराने सड़क प्रस्तावों के कारण अपने घर या दुकान के भविष्य को लेकर बनी चिंता से मुक्ति मिल सकती है।
प्रशासनिक स्तर पर जमीन सुरक्षित रखने में चूक
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू वर्ष 1995 में योजना बनाए जाने और वर्ष 2026 में उसे निरस्त किए जाने के बीच का लंबा अंतराल है। इतने वर्षों में प्रस्तावित मार्गों के लिए जमीन सुरक्षित रखने और जरूरत के मुताबिक अधिग्रहण करने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।
समय बीतने के साथ कई जगहों पर बसाहट विकसित हो गई और निजी जमीन पर निर्माण हो गए। इससे प्रस्तावित सड़कों के लिए उपलब्ध जगह घटती गई। आखिरकार, कई मार्गों को व्यवहारिक रूप से लागू करना कठिन हो गया और उन्हें योजना से बाहर करना पड़ा।
भोपाल के इन सड़क प्रस्तावों का निरस्त होना शहरी नियोजन में जमीन के समय पर संरक्षण की अहमियत भी सामने लाता है। मास्टर प्लान में सड़क निर्धारित करना ही पर्याप्त नहीं होता; उसे भविष्य में लागू करने के लिए जमीन और निर्माण संबंधी व्यवस्थाएं भी समय पर पूरी करना जरूरी होता है।
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