
भोपाल में प्रभात चौराहे से मिसरोद तक करीब 12 किलोमीटर के मार्ग पर ब्रिजों और एलिवेटेड सड़क की श्रृंखला तैयार हो रही है। बीयू से मिसरोद तक प्रस्तावित 5 किलोमीटर की नई एलिवेटेड लेन को केंद्र से मंजूरी मिल चुकी है और नए साल में इसका निर्माण शुरू करने की योजना है।
इस पूरे मार्ग पर वाहन चालकों को कहीं ऊंचे ब्रिज पर तो कहीं नीचे सामान्य सड़क पर सफर करना पड़ता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि अलग-अलग हिस्सों को आपस में जोड़कर एकीकृत कॉरिडोर बनाया जाए, ताकि वाहनों की आवाजाही अधिक सुचारु हो सके।
12 किमी के मार्ग पर 9.70 किमी तक ब्रिजों की श्रृंखला
प्रभात चौराहे से मिसरोद की तरफ बढ़ने पर सड़क का स्वरूप लगातार बदलता है। इस मार्ग पर तीन प्रमुख ब्रिज मौजूद हैं, जबकि बीयू से मिसरोद तक एक और एलिवेटेड लेन प्रस्तावित है।
दिए गए विवरण के मुताबिक, करीब 12 किलोमीटर के दायरे में ब्रिजों की कुल लंबाई लगभग 9.70 किलोमीटर है। प्रस्तावित परियोजना पूरी होने पर इस मार्ग पर चार प्रमुख ब्रिज या एलिवेटेड हिस्सों की श्रृंखला होगी।
जानिए, कहां से शुरू होता है कौन-सा ब्रिज
इस कॉरिडोर को समझने के लिए इसके प्रमुख हिस्सों पर नजर डालना जरूरी है।
सुभाष ब्रिज: प्रभात चौराहे से आगे स्थित यह ब्रिज करीब 700 मीटर लंबा है।
डॉ. अंबेडकर ब्रिज: गायत्री मंदिर के पास से शुरू होकर लगभग 3 किलोमीटर तक जाता है और गणेश मंदिर के पास नीचे उतरता है।
वीर सावरकर ब्रिज: अंबेडकर ब्रिज के बाद शुरू होने वाला यह हिस्सा करीब 1 किलोमीटर लंबा है। यह नर्मदापुरम रोड पर RRL के पास समाप्त होता है।
प्रस्तावित एलिवेटेड लेन: बीयू से मिसरोद तक करीब 5 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई जानी है।
इस तरह मौजूदा ब्रिजों के साथ नई परियोजना जुड़ने पर इस मार्ग पर ऊंचाई पर बने रास्तों का बड़ा नेटवर्क तैयार हो सकता है।
नए साल में शुरू हो सकता है निर्माण, 18 महीने की समयसीमा
बीयू से मिसरोद तक प्रस्तावित एलिवेटेड लेन को केंद्र से मंजूरी मिलने की जानकारी दी गई है। योजना के मुताबिक, नए साल में इसका काम शुरू किया जाएगा। निर्माण पूरा करने के लिए 18 महीने की समयसीमा का दावा किया गया है। इस परियोजना के तैयार होने के बाद मौजूदा ब्रिजों और नए एलिवेटेड हिस्से के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करना यातायात प्रबंधन की अहम चुनौती होगी।
ब्रिजों के बीच सड़क पर उतरने से क्यों बढ़ती है परेशानी?
स्ट्रक्चरल इंजीनियर अब्दुल मजीद के मुताबिक, सुभाष ब्रिज से मिसरोद तक का हिस्सा भोपाल की सबसे व्यस्त ट्रैफिक लाइफलाइन बन रहा है। अलग-अलग निर्माण एजेंसियों ने इसके विभिन्न हिस्सों को तैयार किया है।
उनका सुझाव है कि सभी ढांचों को एक साझा योजना के तहत जोड़ा जाए। इससे ऐसा सिग्नल-फ्री कॉरिडोर तैयार हो सकता है, जहां वाहनों को बार-बार सड़क पर उतरने और फिर चढ़ने की जरूरत कम पड़े।
अभी एक ब्रिज समाप्त होने और अगले के शुरू होने के बीच वाहनों को सामान्य सड़क से गुजरना पड़ता है। गणेश मंदिर और गायत्री मंदिर के आसपास स्थानीय यातायात तथा हाईवे से आने वाले वाहनों के आमने-सामने आने की स्थिति बन सकती है।
विशेषज्ञ ने बताए कॉरिडोर को बेहतर बनाने के तीन उपाय
स्ट्रक्चरल इंजीनियर शैलेंद्र बागरे ने प्रस्तावित एलिवेटेड लेन और मौजूदा ब्रिजों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी के लिए कुछ सुझाव दिए हैं।
सीमलेस रैंप: बीयू-मिसरोद की प्रस्तावित एलिवेटेड लेन को वीर सावरकर ब्रिज के अंतिम हिस्से से सीधे जोड़ा जाए, ताकि वाहनों को बीच में नीचे न उतरना पड़े।
बफर लेन: जहां एक ब्रिज खत्म होता है और दूसरा शुरू होता है, वहां 100 से 150 मीटर लंबी अलग लेन बनाई जाए। इससे वाहनों की क्रॉसिंग व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।
एकीकृत प्रबंधन: पूरे मार्ग के रखरखाव और सिग्नल व्यवस्था की जिम्मेदारी किसी एक एजेंसी को दी जाए, ताकि अलग-अलग विभागों के बीच तालमेल की कमी दूर हो सके।
सीमलेस हाईवे से क्या होगा फायदा?
विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रिजों को केवल अलग-अलग संरचनाओं के रूप में बनाने के बजाय एकीकृत कॉरिडोर के तौर पर विकसित करना जरूरी है। इसके लिए रैंप, बफर लेन और यातायात प्रबंधन को एक साथ योजना में शामिल करना होगा।
यदि इन सुझावों को लागू किया जाता है, तो वाहनों की गति में बार-बार होने वाले बदलाव और ब्रिजों के बीच यातायात के टकराव को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, कॉरिडोर को वास्तव में सिग्नल-फ्री और सुचारु बनाने का परिणाम कनेक्टिविटी, डिजाइन तथा संचालन व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
भोपाल के इस मार्ग पर अगला अहम चरण बीयू से मिसरोद तक नई एलिवेटेड लेन का निर्माण और उसे मौजूदा ब्रिजों से जोड़ने की योजना होगी। यही तय करेगा कि करीब 12 किलोमीटर का यह रास्ता कितना निर्बाध सफर उपलब्ध करा पाता है।
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