
भोपाल। राजधानी भोपाल में वायु प्रदूषण का स्तर हर दिन नए रिकॉर्ड तोड़ रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की लाइव मॉनिटरिंग रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के 98% शहर पीएम 2.5 कणों के बढ़े हुए स्तर से जूझ रहे हैं। इस सूची में सिंगरौली सबसे ऊपर है, जबकि भोपाल अब प्रदेश का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर बन चुका है। हालत इतनी खराब है कि विशेषज्ञों ने इसे “स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा” करार दिया है।
शहर की हवा में जहर — बोझिल सांसें, बढ़ता खतरा
भोपाल के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) लगातार Very Poor श्रेणी में दर्ज किया जा रहा है।
➡️ टीटी नगर — 347 AQI
➡️ कलेक्ट्रेट — 321 AQI
➡️ पर्यावरण परिसर — 303 AQI
न सिर्फ भोपाल, बल्कि ग्वालियर, इंदौर, पीथमपुर, मंडीदीप और सागर जैसे शहरों में भी AQI 300 के पार पहुंच चुका है, जिससे प्रदेश के कई हिस्सों में दिल्ली जैसे हालात बन गए हैं।
रात में हवा सबसे जहरीली — बढ़ी बीमारी की आशंका
विशेषज्ञों के मुताबिक ठंड बढ़ने के साथ प्रदूषण का असर और घातक हो जाता है। रात 8 बजे से तड़के 4 बजे तक PM 2.5 कणों का स्तर सबसे अधिक दर्ज किया जाता है। ठंडी हवा नीचे बैठ जाती है और धुआं ऊपर नहीं उठ पाता, जिससे जहरीले कण जमीन के करीब ही जमा हो जाते हैं — और शहर का हर इंसान इसे अनजाने में सांसों के साथ अंदर लेता है।
निर्माण कार्य, पराली और मलबे ने बिगाड़े हालात
प्रदूषण बढ़ने के प्रमुख कारणों में शामिल हैं —
➡️ निर्माण कार्यों में उड़ने वाली धूल
➡️ आसपास पराली जलाने की घटनाएं
➡️ टूटी सड़कों पर जमाव और कच्चा मलबा
➡️ वाहनों का स्मोक डिस्चार्ज
केवल नवंबर महीने में भोपाल के आसपास पराली जलाने के 50 से अधिक मामले दर्ज किए गए।
नगर निगम की सख्ती — तंदूर रेस्टोरेंट पर एक्शन
बढ़ते खतरे को देखते हुए नगर निगम भी सक्रिय मोड में आ गया है। बुधवार को सहायक आयुक्त कीर्ति चौहान और जोन-8 की टीम ने बिट्टन मार्केट स्थित बापू की कुटिया रेस्टोरेंट पर तंदूर के उपयोग से निकलने वाले धुएं के कारण 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया।
इसके साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने पर 193 मामलों में ₹58,350 वसूले गए और निर्माण व विध्वंस कचरा फैलाने पर 4 मामलों में ₹3,250 की वसूली की गई। निगम ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए एक्शन आगे भी जारी रहेगा, और नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कब जागेगा प्रदेश?
सिंगरौली 356 AQI के साथ प्रदेश का सबसे प्रदूषित शहर है और अब भोपाल, ग्वालियर, इंडौर, सागर जैसे शहर पीछे नहीं हैं। यदि हालात जल्द नियंत्रित नहीं हुए तो विशेषज्ञों का कहना है अस्पतालों में सबसे पहले बच्चों, बुजुर्गों और सांस व हृदय रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ेगी।
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