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भोपाल में तलाक का अनोखा समझौता: 1.5 करोड़ में खत्म हुआ रिश्ता, कुटुंब न्यायालय का मामला बना चर्चा का विषय

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भोपाल में तलाक का अनोखा समझौता: 1.5 करोड़ में खत्म हुआ रिश्ता, कुटुंब न्यायालय का मामला बना चर्चा का विषय

भोपाल में तलाक का अनोखा समझौता: 1.5 करोड़ में खत्म हुआ रिश्ता, कुटुंब न्यायालय का मामला बना चर्चा का विषय

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। राजधानी भोपाल के कुटुंब न्यायालय में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने लोगों का ध्यान खींच लिया है। लंबे समय से चल रहे वैवाहिक विवाद के बाद एक दंपति ने आपसी सहमति से करीब 1.5 करोड़ रुपये के समझौते पर तलाक लेने का फैसला किया। काउंसलिंग के कई दौर के बाद दोनों पक्ष अलग होने पर राजी हुए और बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए आर्थिक व्यवस्था तय की गई।


पति ने दूसरी महिला अफसर से संबंध स्वीकार किए

सूत्रों के अनुसार, सरकारी विभाग में कार्यरत 42 वर्षीय अधिकारी ने अपनी 54 वर्षीय महिला सहकर्मी के साथ संबंध होने की बात स्वीकार की। इसके बाद पति-पत्नी के रिश्तों में लगातार तनाव बढ़ता गया। कई वर्षों तक विवाद और काउंसलिंग चलती रही, लेकिन दोनों के बीच दूरी कम नहीं हो सकी और आखिरकार अलग होने का निर्णय लिया गया।


पत्नी को मिलेगा डुप्लेक्स मकान और नकद राशि

समझौते के तहत पत्नी को भोपाल स्थित एक डुप्लेक्स मकान दिया जाएगा, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 1.23 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इसके अलावा 27 लाख रुपये नकद भी दिए जाएंगे। कुल पैकेज लगभग 1.5 करोड़ रुपये का तय हुआ है, ताकि दोनों बेटियों की शिक्षा और भविष्य सुरक्षित रह सके।


प्रोजेक्ट के दौरान बढ़ीं नजदीकियां, घर में बढ़ा तनाव

जानकारी के मुताबिक, पति और महिला अफसर एक ही विभाग में काम करते थे। प्रोजेक्ट और मीटिंग्स के दौरान बढ़ी नजदीकियां निजी रिश्ते में बदल गईं। पत्नी का आरोप है कि पति धीरे-धीरे परिवार से दूरी बनाने लगे, जिससे घर का माहौल खराब हो गया और रोजाना विवाद होने लगे।


बेटी की शिकायत के बाद शुरू हुई कानूनी प्रक्रिया

परिवार में लगातार झगड़ों से परेशान 16 वर्षीय बेटी ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद हिंदू मैरिज एक्ट के तहत अनिवार्य काउंसलिंग शुरू हुई, जो करीब पांच साल तक चली। काउंसलरों ने सुलह कराने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली और अंत में आपसी सहमति से अलगाव का रास्ता चुना गया।


विशेषज्ञ बोले- बच्चों के हित में शांतिपूर्ण समझौता बेहतर

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि आपसी सहमति से तैयार समझौता दोनों पक्षों पर बाध्यकारी होता है और लंबी कानूनी लड़ाई से बेहतर माना जाता है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, ऐसे मामलों में शांतिपूर्ण समाधान बच्चों पर पड़ने वाले मानसिक दबाव को कम कर सकता है।

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