
भोपाल। तीन दिन से ठप पड़ी भोपाल की सफाई व्यवस्था अब धीरे-धीरे पटरी पर लौटने लगी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ बैठक के बाद सफाई कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया है। सरकार ने कर्मचारियों के वेतन और नियमितीकरण से जुड़ी मांगों पर प्रक्रिया शुरू करने का भरोसा दिया है। हड़ताल खत्म होने के बाद भोपाल के कुछ क्षेत्रों में सफाई शुरू हो गई है। नरेला विधानसभा क्षेत्र में भी कर्मचारी काम पर लौट आए हैं। दिवाली से पहले शहर की सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों ने भी मैदान संभाल लिया है।
25 दिवसीय कर्मचारियों का वेतन 18 से 20 हजार रुपए तक पहुंचेगा
मुख्यमंत्री के साथ हुई चर्चा में 25 दिवसीय वेतनभोगी सफाई कर्मचारियों के विनियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू करने पर सहमति बनी है। इससे उनका मासिक वेतन मौजूदा 10,500 रुपए से बढ़कर 18 से 20 हजार रुपए तक हो सकता है। सरकार ने 29 दिवसीय और दैनिक वेतन पर काम करने वाले कर्मचारियों को स्थायी करने की प्रक्रिया भी शुरू करने का आश्वासन दिया है। इसके लिए एक महीने की समयसीमा तय की गई है। यूनियन पदाधिकारियों को इस प्रक्रिया के लिए गठित कमेटी में शामिल किया जाएगा। इसकी शुरुआत अगले दिन से होनी है। कर्मचारियों की अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े लंबित मामलों पर भी काम किया जाएगा।
10 नंबर मार्केट में अधिकारियों ने भी लगाई झाड़ू
हड़ताल समाप्त होने के बाद प्रशासन और नगर निगम के अधिकारी सफाई अभियान में शामिल हुए। कलेक्टर प्रियंक मिश्रा, महापौर मालती राय और निगम कमिश्नर रामप्रकाश अहिरवार सफाईकर्मियों के साथ 10 नंबर मार्केट पहुंचे। यहां अधिकारियों ने कर्मचारियों के साथ मिलकर झाड़ू लगाई और सफाई अभियान में हिस्सा लिया। इससे पहले नरेला विधानसभा क्षेत्र सहित भोपाल के कुछ हिस्सों में सफाई का काम शुरू हो चुका था।
मंत्री कृष्णा गौर की पहल पर CM से हुई मुलाकात
सफाई कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर मंत्री कृष्णा गौर ने बताया कि तीन दिनों से आंदोलन जारी रहने के कारण शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही थी। यूनियन प्रतिनिधियों के साथ बैठक के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात का समय लिया गया। मुख्यमंत्री के साथ चर्चा में कर्मचारियों की मांगों पर सकारात्मक रुख सामने आया। मंत्री के मुताबिक, कर्मचारियों की काम पर वापसी के बाद दिवाली के दौरान शहर को साफ-सुथरा रखने की दिशा में काम शुरू हो सकेगा।
यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष मगनलाल झांझोट ने भी बैठक में मांगों पर सकारात्मक चर्चा होने की जानकारी दी। उनके अनुसार, पहले मंत्री कृष्णा गौर, महापौर मालती राय और निगम कमिश्नर रामप्रकाश अहिरवार के साथ बातचीत हुई थी। इसके बाद मुख्यमंत्री से मुलाकात की गई।
चार मांगों को लेकर प्रदेशभर में चल रहा था आंदोलन
सफाई कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांगें चार थीं। इनमें वेतन बढ़ोतरी के साथ नियमितीकरण, अनुकंपा नियुक्ति और ठेका प्रथा समाप्त करने का मुद्दा शामिल था। अखिल भारतीय सफाई मजदूर ट्रेड यूनियन (7262) के प्रदेश मंत्री वसी सुल्तान ने बताया कि भोपाल नगर निगम में करीब 7 हजार कर्मचारी 25 दिवसीय वेतन पर काम करते हैं। इन्हें हर महीने केवल 10,500 रुपए मिलते हैं। यूनियन का कहना था कि इतनी कम आय में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल है। इसलिए मासिक वेतन बढ़ाकर 25 हजार रुपए करने की मांग उठाई गई थी। संगठन के मुताबिक, प्रदेशभर में एक लाख से अधिक सफाई कर्मचारी इन मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे।
भोपाल में 2,550 टन कचरा जमा, VIP इलाकों तक पहुंचा असर
तीन दिन की हड़ताल ने राजधानी की सफाई व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया। शहर में करीब 2,550 टन कचरा जमा हो गया था। इसका असर आम रिहायशी इलाकों के साथ प्रशासनिक और वीआईपी क्षेत्रों में भी दिखाई दिया।मंत्रालय और वल्लभ भवन के आसपास कचरे के ढेर लग गए थे। चार इमली में मंत्रियों और वरिष्ठ IAS-IPS अधिकारियों के बंगलों के आसपास भी सफाई नहीं हुई।
प्रमुख प्रभावित स्थानों में ये इलाके शामिल रहे:
* चार इमली स्थित हनुमान मंदिर और साईं मंदिर के आसपास।
* अटल पथ, जहां दो दिन पहले भाजपा की रैली हुई थी।
* कोलार रोड पर गेस्ट हाउस के सामने सिक्सलेन का सेंटर वर्ज।
* बुधवारा बाजार, जहां सड़कों पर जानवरों के शव पड़े होने की जानकारी सामने आई।
400 से ज्यादा कचरा गाड़ियां खड़ी रहीं, डस्टबिन भरने से सड़कों पर फैला कचरा
घरों से कचरा उठाने वाली 400 से अधिक गाड़ियां हड़ताल के दौरान खड़ी रहीं। सामान्य दिनों में प्रत्येक गाड़ी रोजाना दो से तीन चक्कर लगाती है। भोपाल के 17 गार्बेज स्टेशनों पर एकत्रित कचरे को कैप्सूल टैंकरों के माध्यम से आदमपुर छावनी भेजा जाता है। कर्मचारियों के काम बंद करने से यह पूरी व्यवस्था प्रभावित हुई। कई इलाकों में डस्टबिन भरने के बाद कचरा सड़कों पर फैल गया। कुछ लोगों ने कचरा उठाने के बजाय उसे जलाना शुरू कर दिया, जिससे प्रदूषण की समस्या भी बढ़ी।
पानी की सप्लाई बंद होने से बस्तियों में बढ़ी परेशानी
सफाई कर्मचारियों के आंदोलन का असर पेयजल व्यवस्था पर भी पड़ा। शुक्रवार को कर्मचारियों ने टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाने का काम बंद कर दिया था। कई इलाकों में नलों के वॉल्व भी नहीं खोले गए। भोपाल में 2.30 लाख से अधिक नल कनेक्शन हैं। कर्मचारियों ने गुरुवार को ही शुक्रवार से पानी की सप्लाई रोकने की चेतावनी दी थी। कुछ स्थानों पर वॉल्व खोल दिए जाने के कारण पानी का बड़ा संकट पैदा नहीं हुआ, लेकिन गरीब बस्तियों में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
नगर निगम मुख्यालय में लगा था ताला, 85 वार्ड और 21 जोन प्रभावित
सफाईकर्मियों के आंदोलन को 25 दिवसीय वेतन पर काम करने वाले अन्य कर्मचारियों का भी समर्थन मिला था। इसके चलते नगर निगम के करीब 6 हजार अन्य कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल हुए। गुरुवार को कर्मचारी नेता अशोक वर्मा ने नगर निगम के मुख्यालय अटल भवन की बिजली सप्लाई बंद कर वहां ताला लगा दिया था। इससे मुख्यालय के कामकाज के साथ भोपाल के सभी 85 वार्ड और 21 जोन की प्रशासनिक गतिविधियां प्रभावित हुई थीं।
वेतन बढ़ाने पर नगर निगम की आर्थिक स्थिति के आधार पर होगा फैसला
सफाई कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी को लेकर भोपाल नगर निगम आगे की प्रक्रिया पूरी करेगा। इसके लिए एक कमेटी को एक महीने तक विचार-विमर्श करना है। विशेषज्ञों के मुताबिक, नगर निगम एक स्वायत्त संस्था है। भोपाल नगर निगम की आर्थिक स्थिति बेहतर होने के कारण वह अपने संसाधनों के आधार पर कर्मचारियों का वेतन बढ़ाने का निर्णय ले सकता है।
अन्य नगरीय निकाय भी अपनी आर्थिक क्षमता और खर्च वहन करने की स्थिति के अनुसार इस व्यवस्था को लागू कर सकते हैं।
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