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स्वच्छ सर्वेक्षण टीम आने वाली है! भोपाल में बैक लेन से बाजार तक सफाई का फुल एक्शन

19 मई, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
स्वच्छ सर्वेक्षण टीम आने वाली है! भोपाल में बैक लेन से बाजार तक सफाई का फुल एक्शन
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। राजधानी भोपाल में स्वच्छ सर्वेक्षण 2025 की टीम अगले दो दिनों में पहुंच सकती है। इससे पहले नगर निगम शहर को चमकाने में पूरी ताकत लगा रहा है। कहीं दीवारों पर रंगीन पेंटिंग बनाई जा रही हैं तो कहीं बाजारों और गलियों की सफाई तेज कर दी गई है। सोमवार को जोन-9 के पंजाबी बाग में एक गली में समुद्र की आकृति उकेरी गई, जिसे देखने बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। निगम शहरभर में ऐसी करीब 40 आर्ट पेंटिंग्स तैयार कर चुका है।


शहर चमकाने के लिए निगम का फुल एक्शन मोड

स्वच्छ सर्वेक्षण में बेहतर रैंक हासिल करने के लिए नगर निगम अब सिर्फ कागजी तैयारी पर नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाली सफाई पर फोकस कर रहा है। इसी वजह से सड़कों, नालों और सार्वजनिक शौचालयों की सफाई तेज कर दी गई है। बैक लेन में पेंटिंग, बाजारों में टाइल्स और सौंदर्यीकरण के काम भी तेजी से किए जा रहे हैं। न्यू मार्केट, 10 नंबर मार्केट, करोंद, कोलार, पुराना शहर और बैरागढ़ जैसे बड़े बाजार निगम की प्राथमिकता में शामिल हैं।


‘विजिबल क्लीनलीनेस’ बना सबसे बड़ा टेस्ट

इस बार स्वच्छ सर्वेक्षण में सबसे ज्यादा फोकस “विजिबल क्लीनलीनेस” यानी जमीन पर दिखने वाली सफाई पर रहेगा। इसी पैरामीटर के लिए अकेले 1500 अंक तय किए गए हैं। हालांकि शहर के कई हिस्सों में अब भी गंदगी, टूटे डस्टबिन, उखड़ी सड़कें और खुले नाले निगम की मुश्किल बढ़ा रहे हैं। यही वजह है कि भोपाल के लिए यह सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है।


10 इंडिकेटर्स पर तय होगी शहर की रैंकिंग

जानकारी के अनुसार, आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने इस बार नई गाइडलाइन जारी की है। शहरों की रैंकिंग अब 10 मुख्य इंडिकेटर्स के आधार पर तय होगी। इनमें ऑन-ग्राउंड असेसमेंट के लिए 10,500 अंक, विजिबल क्लीनलीनेस के लिए 1,500 अंक, ODF और वाटर प्लस के लिए 1,000 अंक तथा गार्बेज फ्री सिटी स्टार रेटिंग के लिए भी 1,000 अंक तय किए गए हैं। यानी इस बार सिर्फ दावा नहीं, बल्कि हर सड़क और गली की असली तस्वीर नंबर तय करेगी।


बाजारों की गंदगी अब भी बड़ी परेशानी

सर्वेक्षण नियमों के मुताबिक आवासीय इलाकों और पार्कों में रोज कम से कम एक बार सफाई जरूरी है। वहीं बाजारों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और स्ट्रीट फूड जोन में दिन में दो बार सफाई करनी होगी। इस पैरामीटर के लिए सबसे ज्यादा 300 अंक रखे गए हैं। लेकिन कई बाजारों में अब भी कचरे के ढेर और गंदगी निगम की चिंता बढ़ा रहे हैं।


बैक लेन और दीवारों पर खास फोकस

घरों और दुकानों के पीछे की गलियों यानी बैक लेन की सफाई और रखरखाव के लिए 200 अंक तय हैं। इसी वजह से निगम शहर के कई इलाकों में रंगीन पेंटिंग और सफाई अभियान चला रहा है। मंगलवार को भी कई जगहों पर पेंटिंग को अंतिम रूप दिया जाएगा ताकि टीम के दौरे से पहले शहर की तस्वीर बेहतर दिखाई दे सके।


पान की पीक और बैरिकेड्स बिगाड़ रहे खेल

सार्वजनिक स्थानों को पान-गुटखे के दाग और खुले में पेशाब के निशानों से मुक्त रखने पर 150 अंक मिलेंगे। लेकिन निर्माण स्थलों पर लगे बैरिकेड्स अब पीकदान बन चुके हैं। निगम ने संबंधित एजेंसियों को सफाई के निर्देश दिए हैं, बावजूद इसके हालात में खास सुधार नहीं दिख रहा।


करोड़ों की पेंटिंग, लेकिन सड़कें अब भी टूटी

नगर निगम शहर में म्यूरल्स, वेस्ट-टू-आर्ट और हरियाली बढ़ाने जैसे कामों पर जोर दे रहा है। इसके लिए करीब 3 करोड़ रुपए की वॉल पेंटिंग कराई जा रही है। इसके बावजूद कई इलाकों में सड़कें उखड़ी हुई हैं। पिछली बार GIS के जरिए सड़कों पर करीब 100 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे, लेकिन कई जगह हालात अब भी खराब हैं।


स्लम और स्कूलों के आसपास गंदगी चिंता का कारण

स्लम इलाकों में साफ-सफाई और ढके नालों के लिए 150 अंक जबकि स्कूल परिसरों को कचरा मुक्त रखने के लिए 100 अंक तय किए गए हैं। इसके बावजूद कई नालों के आसपास अब भी कचरा जमा है। रवींद्र भवन के पास बड़े नाले के आसपास गंदगी और टूटी जालियां साफ दिखाई दे रही हैं।


ऐसे में सवाल यही है कि क्या सिर्फ रंग-रोगन और पेंटिंग से भोपाल को बेहतर रैंक मिल पाएगी, या इस बार जमीन की हकीकत नंबर तय करेगी?

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