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भोपाल की सड़क किनारे बैठा दिखा टाइगर, डायल-112 टीम ने बनाया वीडियो, 25 किलोमीटर के दायरे में 13 बाघों की मौजूदगी

06 नव, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
भोपाल की सड़क किनारे बैठा दिखा टाइगर, डायल-112 टीम ने बनाया वीडियो, 25 किलोमीटर के दायरे में 13 बाघों की मौजूदगी
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल में शहरी आबादी से लगे जंगलों में बाघों की सक्रियता एक बार फिर सामने आई है। गुरुवार रात अमरनाथ रोड से जागरण लेक सिटी जाने वाले मार्ग पर टाइगर दिखाई दिया, जिसका 16 सेकंड का वीडियो भी सामने आया है। कोलार थाना पुलिस की डायल-112 टीम ने सड़क किनारे जाली के दूसरी तरफ बैठे बाघ को देखा। वन विभाग ने इस मार्ग से आने-जाने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।


25 किलोमीटर के दायरे में बाघों की आवाजाही, कई इलाकों में मौजूदगी

भोपाल का करीब 25 किलोमीटर का दायरा बाघों की गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। कलियासोत और केरवा के जंगलों के अलावा कोलार और बैरसिया क्षेत्र में भी टाइगर की मौजूदगी सामने आ चुकी है। शहर से लगे जंगलों में कलियासोत डैम, चंदनपुरा और केरवा ऐसे इलाके हैं, जहां कई बाघों का ठिकाना है। इन क्षेत्रों में लगातार उनकी गतिविधियां देखी जा रही हैं। बाघ मित्र राशिद नूर के मुताबिक, आसपास के जंगलों में बाघों की अच्छी संख्या है और उनकी आवाजाही अब फिर दिखाई देने लगी है।


कलियासोत से केरवा तक 13 रेसिडेंशियल टाइगर

भोपाल के आसपास के जंगलों में कुल 13 रेसिडेंशियल बाघ मौजूद हैं। कलियासोत, केरवा, समरधा, अमोनी और भानपुर के वन क्षेत्रों में इनका स्थायी ठिकाना है। इनमें शामिल बाघों का जन्म भी इसी क्षेत्र में हुआ है। अब इनका अपना इलाका है और यहां इनकी लगातार मौजूदगी बनी हुई है। बाघिन टी-123 का भी पूरा कुनबा इसी क्षेत्र में सक्रिय है। शहर से सटे रातापानी के जंगल में भी बाघों की मौजूदगी दर्ज की गई है।


भोज यूनिवर्सिटी से कोलार तक पहले भी दिख चुके हैं बाघ

भोपाल के रिहायशी इलाकों के नजदीक बाघों की मौजूदगी कोई नई बात नहीं है। फरवरी 2022 में चूना भट्‌टी चौराहे के पास स्थित भोज यूनिवर्सिटी कैंपस में भी टाइगर की गतिविधियां सामने आई थीं। कोलार क्षेत्र में भी पहले बाघ देखा जा चुका है। भोज यूनिवर्सिटी परिसर में कई बार बाघ की चहलकदमी दर्ज की गई है। ताजा मामला अमरनाथ रोड और जागरण लेक सिटी के बीच का है, जहां गुरुवार रात पुलिस की डायल-112 टीम को टाइगर नजर आया। इसका वीडियो 16 सेकंड का है, जिसमें वह सड़क किनारे लगी जाली के पार बैठा दिखाई देता है।


शहरी विस्तार के बीच जंगलों में बाघों की मौजूदगी पर उठे सवाल

बाघ मित्र राशिद नूर ने भोपाल में बाघों की गतिविधियों को शहर के विकास और प्राकृतिक क्षेत्रों के बीच संतुलन से जोड़कर देखा है। उनका कहना है कि जब भी मास्टर प्लान, भूमि उपयोग और शहरी विस्तार जैसे मुद्दों पर चर्चा होती है, तब बाघों की मौजूदगी शहर को उसके आसपास फैले जंगलों की याद दिलाती है। भोपाल की भौगोलिक पहचान में जंगल और शहरी आबादी दोनों की अहम भूमिका है। इसलिए विकास की योजनाओं में प्राकृतिक क्षेत्र और वन्यजीवों के आवास का संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

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