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सीलिंग के खिलाफ भोपाल के व्यापारी आज गांधी की राह पर, मिंटो हॉल में रामधुन से उठाएंगे स्थायी समाधान की आवाज

26 अग, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
सीलिंग के खिलाफ भोपाल के व्यापारी आज गांधी की राह पर, मिंटो हॉल में रामधुन से उठाएंगे स्थायी समाधान की आवाज
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। आवासीय इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर भोपाल में चल रहा विवाद अब विरोध के एक और चरण में पहुंच गया है। नगर निगम के नोटिस और सीलिंग कार्रवाई से परेशान व्यापारी बुधवार को सड़क पर नारेबाजी के बजाय गांधीवादी तरीके से अपनी बात रखेंगे। भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के नेतृत्व में व्यापारी सुबह 11 बजे कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर (मिंटो हॉल) परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने जुटेंगे। यहां रामधुन और प्रार्थना सभा के जरिए सरकार और प्रशासन से इस पूरे मामले का स्थायी समाधान निकालने की मांग की जाएगी।


चैंबर अध्यक्ष गोविंद गोयल के नेतृत्व में होने वाले इस कार्यक्रम में अलग-अलग व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारी और व्यापारी शामिल होंगे। चैंबर का कहना है कि उनका उद्देश्य टकराव खड़ा करना नहीं, बल्कि वर्षों से कारोबार कर रहे लोगों की समस्या का ऐसा रास्ता निकालना है, जिसमें शहर की नियोजित विकास व्यवस्था और रोजगार—दोनों का संतुलन बना रहे।


सीलिंग विवाद ने पकड़ा जोर, कई इलाकों में हो चुके प्रदर्शन

भोपाल में आवासीय भूखंडों और भवनों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई के बाद से व्यापारी लगातार विरोध कर रहे हैं। रोशनपुरा चौराहे पर चक्काजाम के बाद अवधपुरी, बाग सेवनिया, 10 नंबर और आनंद नगर जैसे इलाकों में भी व्यापारी प्रदर्शन कर चुके हैं। अवधपुरी में व्यापारियों ने दुकानें बंद रखकर मार्च निकाला, जबकि आनंद नगर में भी बड़ी संख्या में कारोबारियों ने एकजुट होकर कार्रवाई का विरोध किया।


अब चैंबर ने विरोध को एक अलग स्वरूप देने का फैसला किया है। गांधी की प्रतिमा के सामने रामधुन और प्रार्थना सभा का संदेश साफ है—व्यापारी कार्रवाई के खिलाफ अपनी आवाज तो उठाएंगे, लेकिन आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाना चाहते हैं।


दूसरी तरफ रहवासी भी सख्त कार्रवाई के पक्ष में

इस विवाद का दूसरा पहलू भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। कई रहवासी संगठन आवासीय कॉलोनियों में व्यावसायिक गतिविधियों को पूरी तरह रोकने की मांग कर रहे हैं। गुलमोहर-त्रिलंगा क्षेत्र में रहवासियों ने टॉर्च मार्च निकालकर अपनी नाराजगी जताई थी। उनका तर्क है कि आवासीय क्षेत्रों में बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों से यातायात, पार्किंग, शोर और कॉलोनियों के मूल स्वरूप पर असर पड़ता है।


यानी मामला अब सिर्फ नगर निगम बनाम व्यापारी नहीं रह गया है। एक तरफ कारोबारियों की रोजी-रोटी और वर्षों से किए गए निवेश का सवाल है, तो दूसरी तरफ रहवासी अपने इलाकों को व्यावसायिक दबाव से बचाने की मांग कर रहे हैं।


अब समाधान क्या होगा?

व्यापारियों का सबसे बड़ा तर्क यह है कि शहर का विस्तार जिस गति से हुआ, उसके मुकाबले भूमि उपयोग और व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर स्पष्ट व्यवस्था नहीं बन सकी। वे प्रमुख मार्गों पर मिश्रित भूमि उपयोग यानी Mixed Land Use की व्यवस्था की मांग पहले भी उठा चुके हैं।


मध्यप्रदेश के नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के रिकॉर्ड में भोपाल विकास योजना-2031 का ड्राफ्ट उपलब्ध है। इसमें आवासीय क्षेत्रों के साथ Commercial Mixed Use Center जैसी श्रेणियां भी निर्धारित की गई हैं।


यही वजह है कि व्यापारियों की मांग केवल नोटिस वापस लेने तक सीमित नहीं है। वे ऐसी स्पष्ट नीति चाहते हैं जिससे यह तय हो सके कि किन सड़कों और किन परिस्थितियों में व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति दी जा सकती है और किन इलाकों में आवासीय उपयोग पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा।


हजारों प्रतिष्ठानों तक पहुंचा है विवाद

अगस्त में सामने आए नगर निगम के आंकड़ों और रिपोर्टों के मुताबिक, बड़ी संख्या में संपत्तियां जांच के दायरे में आई हैं। 17 अगस्त की रिपोर्टों में 5,778 नोटिस जारी होने और 62 हजार से अधिक संपत्तियों की जांच की बात सामने आई थी।


यही संख्या बताती है कि मामला कुछ दुकानों तक सीमित नहीं है। कार्रवाई का दायरा बढ़ने के साथ इसका असर दुकानदारों, कर्मचारियों, किरायेदारों और उन परिवारों तक पहुंच सकता है जिनकी आय इन कारोबारों से जुड़ी है।


सर्वे में सिर्फ दुकान नहीं, भवन के दूसरे उल्लंघन भी जांचे जा रहे

नगर निगम के सर्वे का फोकस केवल व्यावसायिक गतिविधियों तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। मुख्य मार्गों और उनसे जुड़ी गलियों में भवनों के उपयोग और अन्य निर्माण संबंधी उल्लंघनों की भी जांच की जा रही है। नदी-तालाब के किनारे, ग्रीन बेल्ट, बफर जोन और कैचमेंट क्षेत्र जैसे संवेदनशील हिस्से भी जांच के दायरे में हैं।


इससे विवाद का दायरा और बड़ा हो जाता है। क्योंकि यहां सवाल केवल दुकान बचाने या सील करने का नहीं, बल्कि शहर के भूमि उपयोग, पर्यावरणीय संवेदनशील क्षेत्रों और भविष्य की शहरी योजना का भी है।


आज मिंटो हॉल में क्या होगा?

बुधवार सुबह 11 बजे व्यापारी मिंटो हॉल परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने एकत्र होंगे। चैंबर के अनुसार कार्यक्रम में रामधुन का सामूहिक गायन और प्रार्थना सभा होगी। संगठन ने इसे आंदोलन के पहले चरण के रूप में रखा है और बड़ी संख्या में व्यापारियों के शामिल होने का दावा किया है।


व्यापारियों की नजर अब इस बात पर है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बाद सरकार और प्रशासन की ओर से क्या रास्ता निकलता है। क्योंकि इस विवाद में तत्काल राहत से ज्यादा बड़ा सवाल यह है कि भोपाल के उन इलाकों का भविष्य क्या होगा, जहां आवासीय और व्यावसायिक उपयोग वर्षों से एक-दूसरे के साथ चलते आ रहे हैं।

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