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भोपाल में सिग्नल पर रोज जल रहा 2 लाख लीटर ईंधन, चौंकाने वाला खुलासा

18 मई, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
भोपाल में सिग्नल पर रोज जल रहा 2 लाख लीटर ईंधन, चौंकाने वाला खुलासा
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। अमेरिका-ईरान तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ईंधन बचाने की अपील की है। लेकिन मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में ट्रैफिक सिस्टम की वजह से हर दिन लाखों लीटर पेट्रोल-डीजल सिर्फ सिग्नल पर खड़े-खड़े जल रहा है। चौंकाने वाली बात ये है कि शहर के लोग ग्रीन सिग्नल का इंतजार करते हुए रोज करीब 2 लाख लीटर ईंधन बर्बाद कर रहे हैं। इसकी कीमत करीब 2.10 करोड़ रुपए प्रतिदिन बताई जा रही है।


32 सिग्नलों पर लंबा इंतजार बना बड़ी समस्या

भोपाल के प्रमुख 32 ट्रैफिक सिग्नलों पर लोगों को 60 से 90 सेकंड तक इंतजार करना पड़ता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, सिर्फ 10 बड़े सिग्नलों पर खड़ी रहने वाली गाड़ियों से ही हर दिन करीब 1 लाख लीटर पेट्रोल और 1 लाख लीटर डीजल जल रहा है।


भोपाल में 20 लाख वाहन, रोज 17 लाख लीटर ईंधन की खपत

आरटीओ के आंकड़ों के अनुसार, भोपाल में करीब 20 लाख दोपहिया और चारपहिया वाहन रजिस्टर्ड हैं। शहर में रोजाना लगभग 9 लाख लीटर पेट्रोल और 8 लाख लीटर डीजल की बिक्री होती है। भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के कुल 151 पेट्रोल पंप राजधानी में संचालित हैं।


सिर्फ 60 सेकंड में इतना जलता है पेट्रोल

विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर एक बाइक 60 सेकंड तक सिग्नल पर चालू हालत में खड़ी रहती है तो करीब 10 से 17 मिलीलीटर पेट्रोल जल जाता है। अगर वही बाइक दिनभर में 10 सिग्नलों पर रुके तो करीब 100 मिलीलीटर पेट्रोल सिर्फ इंतजार में खर्च हो सकता है। भोपाल की 10 लाख बाइकें यही करें तो रोजाना करीब 1 लाख लीटर पेट्रोल बर्बाद होगा।


कारें और SUV भी पीछे नहीं

डीजल कारें और SUV इंजन चालू रहने पर प्रति घंटे 0.8 से 1.5 लीटर डीजल तक खपत करती हैं। एक कार अगर 60 सेकंड तक सिग्नल पर रुकी रहे तो करीब 13 से 20 मिली डीजल जलता है। शहर की 5 लाख कारें रोज ऐसा करें तो करीब 1 लाख लीटर डीजल सिर्फ सिग्नल पर ही खत्म हो जाता है। 


90 सेकंड के सिग्नल पर और बढ़ती है बर्बादी

विशेषज्ञों का कहना है कि कई जगह सिग्नल टाइमिंग 90 सेकंड तक पहुंच जाती है। ऐसे में बाइक और कार दोनों की ईंधन खपत तेजी से बढ़ती है। अनुमान के मुताबिक, 90 सेकंड के सिग्नलों पर पेट्रोल की बर्बादी 1.5 लाख लीटर और डीजल की बर्बादी करीब 1.9 लाख लीटर तक पहुंच सकती है।


“गाड़ी बंद करना ज्यादा फायदेमंद”

ईंधन विशेषज्ञ राजेंद्र कोठारी का कहना है कि लोगों में यह गलतफहमी है कि गाड़ी दोबारा स्टार्ट करने पर ज्यादा पेट्रोल-डीजल खर्च होता है। उन्होंने बताया कि बाइक स्टार्ट करने में सिर्फ 0.5 से 2 मिलीलीटर पेट्रोल और कार स्टार्ट करने में 2 से 5 मिलीलीटर डीजल लगता है। इसलिए 60 से 90 सेकंड के रेड सिग्नल पर इंजन बंद करना ज्यादा समझदारी है।


क्या हो सकता है समाधान?

विशेषज्ञों के मुताबिक, ट्रैफिक सिग्नलों का वेटिंग टाइम कम किया जाए और लोग सिग्नल पर इंजन बंद करने की आदत डालें तो ईंधन की बड़ी बचत हो सकती है। इसके अलावा कार पूलिंग, बेहतर ट्रैफिक मैनेजमेंट और स्मार्ट सिग्नल सिस्टम भी इस बर्बादी को कम करने में मदद कर सकते हैं।

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