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मध्य प्रदेश के नगर निकायों में साइबर सुरक्षा पर सवाल, 2500 ईमेल और पासवर्ड लीक होने का खुलासा; खरीद पर भी सख्ती

23 अक्टू, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
मध्य प्रदेश के नगर निकायों में साइबर सुरक्षा पर सवाल, 2500 ईमेल और पासवर्ड लीक होने का खुलासा; खरीद पर भी सख्ती
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्य प्रदेश के शहरी निकायों की साइबर सुरक्षा और खरीद प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए हैं। भोपाल में हुई विभागीय बैठक में करीब 2,500 ईमेल आईडी, यूजर आईडी और पासवर्ड लीक होने का मामला सामने आया, जबकि नगर निकायों की खरीद में कथित अनियमितताओं पर अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी।


शहरी विकास एवं आवास विभाग की बैठक में मध्य प्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम (MPSEDC) के अतिरिक्त प्रबंध निदेशक अंशुमन राज ने लीक हुए डिजिटल क्रेडेंशियल्स की जानकारी दी। बैठक का वीडियो भी सामने आया है। विभाग ने स्पष्ट किया कि नया डेटा एनालिटिक्स सिस्टम नगर निकायों की खरीद और उनकी कीमतों पर नजर रखने में मदद कर रहा है।


डार्क वेब पर मिले नगर निकायों के लॉगिन क्रेडेंशियल्स

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, भोपाल के भौरी में आयोजित बैठक के दौरान अंशुमन राज ने बताया कि नगर निकायों के डेटा का विश्लेषण करते समय लीक हुए डेटासेट में कई लॉगिन जानकारियां मिलीं। इनमें डार्क वेब पर उपलब्ध डेटा भी शामिल था।


सामने आई जानकारी ने सरकारी डिजिटल सिस्टम की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। मामला केवल पासवर्ड लीक होने तक सीमित नहीं है, क्योंकि संक्रमित कंप्यूटरों के जरिए संवेदनशील जानकारियां चोरी होने का खतरा भी मौजूद है।


क्या होते हैं स्टीलर लॉग्स, पासवर्ड बदलना क्यों पर्याप्त नहीं?

प्रेजेंटेशन में अंशुमन राज ने स्टीलर लॉग्स (Stealer Logs) के खतरे को समझाया। ये ऐसे रिकॉर्ड होते हैं, जिन्हें मैलवेयर संक्रमित डिवाइस से लॉगिन विवरण और दूसरी संवेदनशील जानकारी चुराकर तैयार कर सकता है।


प्रेजेंटेशन में चेताया गया कि यदि संबंधित कंप्यूटर या डिवाइस मैलवेयर से संक्रमित बने रहते हैं, तो सिर्फ पासवर्ड बदलने से सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी। संक्रमण दूर किए बिना नए पासवर्ड भी खतरे में पड़ सकते हैं।


साइबर सुरक्षा के लिए कुछ असुरक्षित तरीकों को भी जोखिमपूर्ण बताया गया। इनमें ऑपरेटरों के साथ पासवर्ड और वन-टाइम पासवर्ड (OTP) साझा करना शामिल है।


इंदौर की साइबर घटनाओं का भी बैठक में जिक्र

बैठक में इंदौर में सामने आई साइबर घटनाओं का उल्लेख किया गया। इससे सरकारी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और उसमें इस्तेमाल होने वाले सिस्टम की सुरक्षा पर चर्चा और महत्वपूर्ण हो गई।


नगर निकायों के डिजिटल डेटा की निगरानी के साथ-साथ लॉगिन विवरणों की सुरक्षा भी चुनौती के रूप में सामने आई। बैठक में रखी गई जानकारी का केंद्र लीक हुए क्रेडेंशियल्स और संक्रमित डिवाइस से पैदा होने वाले जोखिम थे।


नगर निकायों की खरीद पर संजय दुबे ने जताई नाराजगी

अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने शहरी स्थानीय निकायों में खरीद से जुड़ी कथित अनियमितताओं पर अधिकारियों को आगाह किया। उन्होंने कहा कि विभाग यह निगरानी कर रहा है कि कौन-सा निकाय क्या सामान खरीद रहा है और उसके लिए कितनी राशि खर्च की जा रही है।


खरीद प्रक्रिया में कीमतों के अंतर को समझाने के लिए उन्होंने कचरा उठाने वाले वाहनों का उदाहरण दिया। इन वाहनों को अलग-अलग नगर निकायों में काफी भिन्न कीमतों पर खरीदे जाने का मामला सामने रखा गया।


डेटा एनालिटिक्स सिस्टम से होगी खरीद की निगरानी

संजय दुबे ने अधिकारियों को संकेत दिया कि खरीद में बढ़ी हुई कीमतों या अनियमितताओं को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि इस साल कार्रवाई और तेज की जाएगी।


उन्होंने अधिकारियों को आगाह करते हुए कहा, “यह मत सोचिए कि आप जो कर रहे हैं, वह हमें दिखाई नहीं दे रहा है।”


विभाग का नया डेटा एनालिटिक्स सिस्टम सभी नगर निकायों की खरीद गतिविधियों और उनकी कीमतों पर नजर रखने की सुविधा देता है। इस व्यवस्था के जरिए खरीद से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण कर अनियमितताओं पर निगरानी रखी जा सकती है।

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