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भोपाल की VIP रोड पर आखिर क्यों नहीं थम रही वाहनों की रफ्तार? हादसे के बाद भी 7 खतरनाक मोड़ों पर सवाल

29 अक्टू, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
भोपाल की VIP रोड पर आखिर क्यों नहीं थम रही वाहनों की रफ्तार? हादसे के बाद भी 7 खतरनाक मोड़ों पर सवाल
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल की VIP रोड पर करबला के पास RGPV बस पलटने की घटना के बाद भी सड़क पर तेज रफ्तार वाहनों को रोकने के लिए प्रभावी इंतजाम नजर नहीं आए। करीब 5 किलोमीटर लंबी सड़क पर 7 खतरनाक मोड़ हैं, जहां सुरक्षा संकेतकों और गति नियंत्रण की जरूरत महसूस की जा रही है।


हादसे में घायल विद्यार्थियों की हालत में सुधार हो रहा है, लेकिन दुर्घटना का डर उनके मन में बना हुआ है। गंभीर रूप से घायल अजय परमार को बुधवार तड़के होश आया, जबकि बसंत कुमार और खुशी गौड़ की स्थिति में भी सुधार बताया गया है।


हादसे के अगले दिन भी VIP रोड पर नहीं दिखे सुरक्षा इंतजाम

RGPV की बस मंगलवार को करबला के पास पलट गई थी। इस दुर्घटना में 11 छात्र-छात्राएं और कर्मचारी घायल हुए थे। इसके अगले दिन बुधवार को भी सड़क के खतरनाक मोड़ों पर वाहन चालकों को सतर्क करने के लिए विशेष व्यवस्था नजर नहीं आई।


ट्रैफिक पुलिस रेतघाट पर नियमित रूप से तैनात रही और चालान काटने की कार्रवाई भी चलती रही। लेकिन VIP रोड के अंधे मोड़ों पर चेतावनी देने और वाहनों की रफ्तार नियंत्रित करने के लिए प्रभावी इंतजाम नहीं दिखे।


सड़क पर कई वाहन 90 किमी प्रति घंटे या उससे अधिक की गति से चलते दिखाई दिए। कुछ ही दिन पहले इसी स्थान पर एक ऑयल टैंकर और निजी संस्थान की बस पलट चुकी थी।


सात खतरनाक मोड़ों पर स्पीड कंट्रोल की जरूरत

VIP रोड पर सड़क की बनावट और मोड़ों के कारण वाहन चालकों के लिए जोखिम बढ़ जाता है। ऐसे स्थानों पर केवल सामान्य यातायात निगरानी पर्याप्त नहीं मानी जा रही है।


दुर्घटना की आशंका वाले हिस्सों में ये व्यवस्थाएं जरूरी बताई जा रही हैं:

* खतरनाक मोड़ों से पहले चेतावनी संकेतक लगाए जाएं।

* निर्धारित गति सीमा के बोर्ड लगाए जाएं।

* तेज रफ्तार वाहनों पर नजर रखने के लिए कैमरे लगाए जाएं।

* जरूरत के मुताबिक स्पीड ब्रेकर बनाए जाएं।

* स्कूल और कॉलेज बसों में स्पीड गवर्नर की नियमित जांच हो।


स्कूल बसों के स्पीड गवर्नर की निगरानी पर सवाल

बसों में स्पीड गवर्नर जैसे सुरक्षा उपकरण लगाना ही पर्याप्त नहीं है, उनकी कार्यशीलता की जांच भी जरूरी है। उपकरण सही तरीके से काम कर रहे हैं या नहीं, इसकी नियमित निगरानी होनी चाहिए।


तेज गति से चलने वाली बसें सड़क पर मौजूद दूसरे लोगों के साथ विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा कर सकती हैं। इसी वजह से यातायात नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई और बसों की गति की निगरानी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


पूर्व यातायात डीएसपी ने दिया तकनीकी निरीक्षण का सुझाव

पूर्व यातायात डीएसपी सतविंदर सिंह लल्ली ने भोपाल की सड़कों की बनावट और वाहनों की रफ्तार को दुर्घटनाओं की आशंका से जुड़ा महत्वपूर्ण पहलू बताया। उनके मुताबिक, शहर में पहाड़ी और समतल दोनों तरह के सड़क मार्ग हैं, जहां कुछ स्थानों पर सड़क की संरचना जोखिम बढ़ा सकती है।


उन्होंने VIP रोड के संवेदनशील हिस्सों में गति सीमा के संकेतक और कैमरे लगाने की जरूरत बताई। नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों पर जुर्माना लगाने के साथ स्कूल-कॉलेज बसों के स्पीड गवर्नर की नियमित जांच पर भी जोर दिया।


लल्ली के सुझाव के मुताबिक, कलेक्टर के निर्देश पर नगर निगम और लोक निर्माण विभाग को मिलकर खतरनाक सड़कों का तकनीकी निरीक्षण करना चाहिए। निरीक्षण के बाद जरूरत के अनुसार गति सीमा तय करने, स्पीड ब्रेकर बनाने और दूसरे सुरक्षा उपाय लागू करने से दुर्घटनाओं को कम करने में मदद मिल सकती है।


अजय परमार को होश आया, कंधे की चोट के कारण बिगड़ी थी हालत

RGPV बस दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल छात्र अजय परमार को बुधवार तड़के होश आ गया। डॉक्टरों के मुताबिक, उसके दाहिने कंधे में गंभीर चोट लगी थी, जिससे काफी खून बह गया। हादसे के सदमे और ब्लड प्रेशर लगातार गिरने के कारण उसकी स्थिति बिगड़ गई थी।


होश आने के बाद अजय को ICU से इमरजेंसी में शिफ्ट किया गया। डॉक्टर कंधे से रक्तस्राव रोकने के लिए ऑपरेशन करेंगे। घायल बसंत कुमार के टूटे पैर का भी ऑपरेशन किया जाएगा।


खुशी गौड़ के सिर में चोट, दूसरे विद्यार्थी अब भी डरे हुए

दुर्घटना में घायल खुशी गौड़ के सिर के बाईं ओर चोट लगी थी। डॉक्टरों के अनुसार, CT स्कैन में बाहरी चोट का पता चला है। बसंत कुमार और खुशी गौड़ की हालत में भी सुधार हुआ है।


हादसे के मानसिक असर से उबरने के लिए सुमित पवार अपने गांव बैतूल चले गए हैं। अनुष्का यादव और शिवम ने बताया कि अब तेज रफ्तार से गुजरने वाले वाहनों को देखकर उन्हें डर लगने लगता है।


घटना की याद विद्यार्थियों को अब भी परेशान कर रही है। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी दुर्घटना का खौफ उनके मन से पूरी तरह दूर नहीं हुआ है।

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