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MP में आयुष्मान योजना पर बड़ा फैसला, सरकारी अस्पताल होंगे और मजबूत

04 दिस, 20250 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
MP में आयुष्मान योजना पर बड़ा फैसला, सरकारी अस्पताल होंगे और मजबूत

MP में आयुष्मान योजना पर बड़ा फैसला, सरकारी अस्पताल होंगे और मजबूत

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। अब आयुष्मान योजना सिर्फ मुफ्त इलाज नहीं, बल्कि सरकारी अस्पतालों की ताकत बनने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साफ कह दिया है कि निजी अस्पतालों की तरह सिर्फ कमाई नहीं, अब सरकारी अस्पतालों में भी इलाज की क्षमता बढ़ाई जाएगी। उन्होंने उदाहरण देकर बताया कि जो रकम निजी अस्पताल एक ही ऑपरेशन में लेते हैं, उससे सरकारी अस्पतालों में एक डॉक्टर पूरे महीने 8–10 ऑपरेशन कर सकता है। 


समीक्षा बैठक में सीएम का बड़ा बयान

स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने आयुष्मान योजना के कामकाज पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा, “निजी अस्पतालों में अमूमन एक ऑपरेशन एक लाख रुपए में होता है। अगर यही एक लाख रुपए सरकारी अस्पताल में एक डॉक्टर पर खर्च करें तो वह महीने में कम से कम 8–10 ऑपरेशन कर सकता है।” इस बैठक में उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला, मुख्य सचिव अनुराग जैन, प्रमुख सचिव संदीप यादव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।


‘पांच ऑपरेशन में पांच लाख’… सरकारी अस्पताल क्यों नहीं?

सीएम ने आयुष्मान योजना पर सवाल उठाते हुए कहा, “आयुष्मान योजना में 5 लाख तक का इलाज मुफ्त है। निजी अस्पताल 5 ऑपरेशन कर 5 लाख कमा रहे हैं। अगर यही इलाज सरकारी अस्पताल करने लगें तो पांच लाख रुपए सरकार को ही मिलेंगे। इससे सरकारी अस्पतालों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।”


आयुष्मान में गड़बड़ी: दो चौंकाने वाले केस

केस-1: मौत के बाद भी वेंटिलेटर पर

भोपाल के एक बड़े निजी अस्पताल में सिवनी मालवा निवासी एक वृद्धा भर्ती हुई। एक हफ्ते बाद उनकी मौत हो गई, लेकिन घोषणा नहीं की गई और उन्हें दिखावटी तौर पर वेंटिलेटर पर रखा गया। वजह— आयुष्मान के पैसे जारी नहीं हुए थे। परिजन ने 40 हजार रुपए दिए, तब जाकर शव सौंपा गया। जांच में सामने आया कि इलाज की मंजूरी पहले ही मिल चुकी थी। सवाल पूछे जाने पर अस्पताल ने पैसे लौटा दिए। महिला के परिजनों में एक मध्यप्रदेश पुलिस का कर्मचारी है।


केस-2: मरीज से भी वसूली, सरकार से भी

बैतूल के एक निजी अस्पताल में मरीज को भर्ती कर बताया गया कि आयुष्मान से इलाज होगा। बाद में कहा गया— इस बीमारी में पैसा नहीं मिलता। परिजनों से 15 हजार रुपए ले लिए गए। कुछ महीने बाद दूसरे अस्पताल में जाने पर पता चला कि उसी इलाज के लिए अस्पताल को सरकार से 30 हजार रुपए मिल चुके थे।


सरकारी अस्पताल मजबूत होंगे तो जनता को ये फायदे

सीएम के निर्देशों पर अमल हुआ तो आम जनता को बड़ा लाभ मिलेगा—

निजी अस्पतालों में जाने की मजबूरी कम होगी।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हाईटेक बनेंगे।

सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी दूर होगी।

इलाज सस्ता, सुलभ और पारदर्शी होगा।


डॉक्टरों को लेकर नया प्लान

सीएम ने कहा कि मेडिकल की पढ़ाई में जिन छात्रों की फीस सरकार भर रही है, उनके लिए बॉण्ड सिस्टम को ज्यादा प्रभावी बनाया जाएगा। “बॉण्ड वाले डॉक्टरों को प्रदेश में ही सेवा देने के लिए प्रोत्साहित करें।” उन्होंने निर्देश दिए कि जो डॉक्टर जनजातीय और दूरस्थ इलाकों में काम करने को तैयार हों, उन्हें अधिक मानदेय देने की व्यवस्था की जाए।


सरकारी सिस्टम को आत्मनिर्भर बनाने की कवायद

मुख्यमंत्री मोहन यादव साफ कर चुके हैं कि अब आयुष्मान योजना सिर्फ निजी अस्पतालों का बिजनेस मॉडल नहीं बनेगी, बल्कि इससे सरकारी अस्पताल भी सक्षम और आत्मनिर्भर बनाए जाएंगे।

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