
भोपाल मेट्रो को लेकर शहरवासियों का इंतजार अब खत्म होने जा रहा है। 21 दिसंबर से मेट्रो आम यात्रियों के लिए पटरी पर उतरने को तैयार है, लेकिन टिकटिंग सिस्टम में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। मेट्रो की यात्रा के लिए फिलहाल केवल फिजिकल टोकन ही उपलब्ध होंगे।
स्मार्ट कार्ड (Bhopal Metro Smart Card) या पास को लेकर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है। तुर्की के टिकट फेयर सिस्टम को रद्द किए जाने के बाद अब मेट्रो प्रबंधन हाइब्रिड टिकटिंग सिस्टम की ओर बढ़ रहा है, जिसमें कुछ हिस्सा मैन्युअल और कुछ डिजिटल होगा।
अगले सप्ताह होगा टिकटिंग सिस्टम का ट्रायल
कमर्शियल रन शुरू करने से पहले मेट्रो टिकटिंग का ट्रायल अगले 5–7 दिनों में किया जाएगा। ट्रायल के आधार पर शुरुआती हाइब्रिड सिस्टम को फाइनल किया जाएगा। कमर्शियल ऑपरेशन शुरू होने से 2–3 दिन पहले स्टेशन आम लोगों के लिए खोले जा सकते हैं, ताकि वे अंदर जाकर टोकन विंडो तक पहुंचने और गेट सिस्टम को समझ सकें।
टोकन से ही खुलेंगे अंडर-Platform गेट
स्टेशन में प्रवेश के बाद यात्री टोकन विंडो से टोकन प्राप्त करेंगे। इन्हीं टोकनों से अंडर प्लेटफॉर्म गेट खुलेंगे, जिससे एंट्री और एग्जिट दोनों नियंत्रित होंगे। प्रायोरिटी कॉरिडोर 6.22 किमी लंबा है और इसमें 8 स्टेशन शामिल हैं। यह रूट AIIMS से सुभाष स्टेशन के बीच चलेगा, जो 16 किमी लंबी ओरेंज लाइन का हिस्सा है।
एजेंसी तय हुई तो आएगा कॉमन मोबिलिटी कार्ड
मेट्रो रेल कारपोरेशन भविष्य में ऑटोमेटिक टिकट फेयर सिस्टम (AFC) लागू करेगा। इस सिस्टम के तहत कॉमन मोबिलिटी कार्ड लॉन्च होगा, जिससे मेट्रो के साथ शहर के अन्य ट्रांसपोर्ट मोड में भी कैशलेस ट्रैवल संभव होगा। मेट्रो रेल एमडी चैतन्य कृष्णा ने कहा, “अभी तो इंदौर की तरह मैन्युअली शुरू करेंगे। कुछ भाग में डिजिटल सुविधा को लेकर विचार कर रहे हैं। आगामी समय में कॉमन मोबिलिटी कार्ड बेहतर विकल्प होगा।”
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