
भोपाल। मध्य प्रदेश में आने वाले बजट 2026-27 को लेकर सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। अब सभी विभागों को 15 जनवरी तक अपनी-अपनी योजनाओं की पूरी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी। इसमें यह बताना होगा कि बीते एक साल में कौन-सी योजना पर कितना खर्च हुआ, उससे क्या नतीजे निकले और कितने लोगों को रोजगार मिला। सरकार चाहती है कि बजट भाषण में योजनाओं की सिर्फ घोषणा ही नहीं, बल्कि उनके असर की भी साफ तस्वीर जनता के सामने रखी जाए।
योजनाओं के खर्च से लेकर रोजगार तक का पूरा ब्योरा
इस बार सरकार ने बजट को ज्यादा तथ्यपरक और परिणाम आधारित बनाने का फैसला किया है। सभी विभागों से कहा गया है कि वे पिछले एक साल में चलाई गई योजनाओं पर हुए खर्च का ब्योरा दें और यह भी बताएं कि इन योजनाओं से आम लोगों को कितना फायदा मिला। खास तौर पर रोजगार सृजन से जुड़े आंकड़ों को बेहद अहम माना जा रहा है। विभागों को यह स्पष्ट करना होगा कि उनकी योजनाओं से कितने नए रोजगार बने, कितने लोगों को प्रशिक्षण मिला और श्रमिक कल्याण के लिए क्या कदम उठाए गए। इन जानकारियों के आधार पर सरकार अपने बजट भाषण में यह दिखा सकेगी कि उसकी नीतियां जमीन पर कितना असर डाल रही हैं।
झुग्गीमुक्त शहर, पर्यावरण और ऊर्जा पर फोकस
सरकार ने इस बार कुछ खास मुद्दों पर भी अलग से रिपोर्ट मांगी है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
झुग्गीमुक्त शहर अभियान: कितने शहरों में झुग्गियां हटाई गईं, कितने परिवारों को पक्के मकान मिले और उनकी पुनर्वास स्थिति क्या है।
पर्यावरण संरक्षण: वृक्षारोपण, जल संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और अन्य हरित पहलों की प्रगति।
ऊर्जा क्षेत्र: नवीकरणीय ऊर्जा, बिजली आपूर्ति में सुधार और नई परियोजनाओं की स्थिति।
इन सभी क्षेत्रों में विभागों को अद्यतन और तथ्यात्मक डेटा देने के निर्देश हैं, ताकि बजट दस्तावेज में विकास की वास्तविक तस्वीर पेश की जा सके।
सरकारी जमीन और गो-चर भूमि पर अतिक्रमण की रिपोर्ट भी जरूरी
सरकार ने भूमि प्रबंधन को लेकर भी सख्ती दिखाई है। सभी संबंधित विभागों से कहा गया है कि वे गो-चर भूमि और शासकीय जमीन पर हुए अतिक्रमण के मामलों की विस्तृत रिपोर्ट दें।
इसमें यह भी बताना होगा कि कितने मामलों में कार्रवाई की गई, कितनी जमीन अतिक्रमण से मुक्त कराई गई, और आगे के लिए क्या रणनीति बनाई गई है। इस कदम से सरकार यह दिखाना चाहती है कि वह न सिर्फ विकास, बल्कि संसाधनों के संरक्षण को भी उतनी ही गंभीरता से ले रही है।
‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य और दीर्घकालीन रणनीति
सरकार ने सभी विभागों से केवल वर्तमान योजनाओं पर नहीं, बल्कि भविष्य को लेकर भी फीडबैक मांगा है। ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए विभागों से यह पूछा गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में अगले 20-25 सालों की विकास रणनीति क्या देखते हैं।
इन सुझावों और फीडबैक के आधार पर बजट में दीर्घकालीन योजनाएं और रोडमैप शामिल किया जाएगा। माना जा रहा है कि इससे मध्य प्रदेश के लिए एक स्पष्ट विजन डॉक्यूमेंट तैयार होगा, जो राज्य को 2047 तक विकसित राज्यों की कतार में लाने की दिशा तय करेगा।
19 से 29 जनवरी तक होंगी विभागीय बैठकें
बजट प्रस्तावों को अंतिम रूप देने के लिए सरकार ने 19 से 29 जनवरी के बीच विभागीय बैठकें तय की हैं। इन बैठकों में—
विभागों से मिली रिपोर्ट, खर्च और परिणामों का विश्लेषण,
नई योजनाओं के प्रस्ताव, और विकसित भारत 2047 से जुड़े सुझावों पर विस्तार से चर्चा होगी। इन बैठकों के बाद ही बजट का अंतिम ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा, जिसे विधानसभा में पेश किया जाएगा।
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