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बीयू-दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान के बीच अनुबंध, भारतीय ज्ञान परंपरा व बहुविषयक शोध को दिया जाएगा बढ़ावा

23 जन, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
BU-Dattopant Thengadi Research Institute signs MoU

BU-Dattopant Thengadi Research Institute signs MoU

News World Desk
डेस्क रिपोर्टर
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भोपाल। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (बीयू) और दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान के बीच अकादमिक और शोध सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। अनुबंध के तहत दोनों संस्थान भारतीय ज्ञान परंपरा और बहुविषयक शोध को बढ़ावा देने में एक-दूसरे का सहयोग करेंगे।

यह समझौता समाज विज्ञान, मानविकी, विधि, प्रबंधन तथा भारतीय ज्ञान परंपरा सहित विभिन्न विषयों में संयुक्त शोध एवं शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अनुबंध का उद्देश्य दोनों संस्थानों के बीच उपलब्ध शैक्षणिक संसाधनों, शोध सुविधाओं और विशेषज्ञता का पारस्परिक उपयोग कर उच्च गुणवत्ता वाले समाजोपयोगी और नीति-आधारित अनुसंधान को प्रोत्साहित करना है। 

यह समझौता दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान के निदेशक डॉ. मुकेश कुमार मिश्र और बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. समर बहादुर सिंह की ओर से गुरुवार को किया गया। इस अवसर पर दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान की सह-सचिव प्रो. अल्पना त्रिवेदी, समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. रूचि घोष दस्तीदार, क्षेत्रीय नियोजन व आर्थिक विकास की विभागाध्यक्ष डॉ. रूपाली शेवलकर डॉ. प्रभाकर पांडेय, डॉ. अर्चना सेन की उपस्थिति रही।

भारतीय ज्ञान परंपरा को समकालीन अकादमिक विमर्श से जोड़ने की एक दूरदर्शी पहल: प्रो. एसके जैन

बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. एसके जैन ने कहा कि यह समझौता विश्वविद्यालय और शोध संस्थान के बीच केवल औपचारिक सहयोग नहीं है, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा को समकालीन अकादमिक विमर्श से जोड़ने की एक दूरदर्शी पहल है। इस सहयोग से शोधार्थियों एवं शिक्षकों को नवाचारपूर्ण, मूल्यपरक और समाज-केंद्रित अनुसंधान के नए अवसर प्राप्त होंगे तथा विश्वविद्यालय की शोध-संस्कृति और अधिक सुदृढ़ होगी।

 

‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य की दिशा में सार्थक योगदान देगा: डॉ. मुकेश कुमार मिश्र

दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान के निदेशक डॉ. मुकेश कुमार मिश्र ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य शोध को केवल अकादमिक सीमाओं तक सीमित न रखकर उसे राष्ट्र निर्माण, सामाजिक सरोकारों और नीति-निर्माण से जोड़ना है। दोनों संस्थानों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह समझौता भारतीय ज्ञान परंपरा को समकालीन शोध और सामाजिक आवश्यकताओं से जोड़ते हुए राष्ट्र निर्माण, नीति-निर्माण और ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य की दिशा में सार्थक योगदान देगा। यह अकादमिक साझेदारी प्रदेश और देश के उच्च शिक्षा और शोध परिदृश्य में एक स्थायी, प्रभावी और उदाहरणीय मॉडल के रूप में स्थापित होगी।

 

अनुबंध के तहत संयुक्त शोध परियोजनाएं की जाएंगी संचालित 

एमओयू के अंतर्गत समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, भूगोल, मनोविज्ञान, राजनीति विज्ञान, विधि, प्रबंधन, साहित्य, हिंदी एवं संस्कृत अध्ययन तथा भारतीय ज्ञान प्रणालियों सहित समाज विज्ञान एवं मानविकी के समस्त विषयों में संयुक्त शोध परियोजनाएं संचालित की जाएंगी। इसके साथ ही फैकल्टी एवं शोधार्थी आदान-प्रदान, संयुक्त सेमिनार, कार्यशालाएँ, संगोष्ठियां, शोध-पद्धति एवं क्षमता-विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

 

राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त शोध प्रस्ताव प्रस्तुत करेंगे दोनों संस्थान

अनुबंध के अंतर्गत दोनों संस्थानों के पुस्तकालय, अभिलेखागार एवं शोध संसाधनों का पारस्परिक उपयोग शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। आवश्यकता अनुसार पीएच.डी. शोधार्थियों को संयुक्त मार्गदर्शन की सुविधा भी प्रदान की जाएगी। दोनों संस्थान मिलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के संयुक्त शोध प्रस्ताव प्रस्तुत करेंगे। इस सहयोग के माध्यम से दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान को बरकतउल्ला विश्वविद्यालय की ओर से शोध केंद्र के रूप में मान्यता दिए जाने की दिशा में भी पहल की जाएगी। जिससे शोधार्थियों को अकादमिक रूप से और अधिक अवसर प्राप्त होंगे।



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