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भोपाल का ईरानी डेरा: छह राज्यों की पुलिस को चाहिए कुख्यात राजू ईरानी, अमन कॉलोनी पर जल्द चल सकता है बुलडोजर

02 जन, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
भोपाल का ईरानी डेरा: छह राज्यों की पुलिस को चाहिए कुख्यात राजू ईरानी, अमन कॉलोनी पर जल्द चल सकता है बुलडोजर

भोपाल का ईरानी डेरा: छह राज्यों की पुलिस को चाहिए कुख्यात राजू ईरानी, अमन कॉलोनी पर जल्द चल सकता है बुलडोजर

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल की अमन कॉलोनी एक बार फिर सुर्खियों में है। वजह है यहां बसे ईरानी डेरे का कुख्यात सरगना राजू ईरानी और उसका गैंग, जिसकी तलाश में देश के छह राज्यों की पुलिस ने भोपाल में डेरा डाल रखा है। आम बोलचाल में कहें तो अब यह सिर्फ एक स्थानीय कार्रवाई नहीं रही, बल्कि इंटर-स्टेट क्राइम नेटवर्क को तोड़ने की बड़ी कवायद बन गई है।


छह राज्यों की पुलिस भोपाल में, ईरानी गैंग पर शिकंजा

भोपाल पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, राजू ईरानी और उसके गिरोह के पांच प्रमुख सदस्य लंबे समय से फरार हैं। इनकी धरपकड़ के लिए मध्यप्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, कर्नाटक, दिल्ली, छत्तीसगढ़ और आसपास के अन्य राज्यों की पुलिस टीमें भोपाल में जुटी हुई हैं। गिरफ्तार हो चुके गैंग के कुछ सदस्यों से पुलिस को कई अहम जानकारियां मिली हैं। पूछताछ में खुलासा हुआ है कि यह गैंग वारदात के बाद अलग-अलग राज्यों में जाकर छिपता है और फिर वहां से नेटवर्क के जरिए वापस भोपाल या अन्य ठिकानों पर लौट आता है। इसी के आधार पर अब भोपाल पुलिस अन्य राज्यों में रहने वाले उनके रिश्तेदारों और सहयोगियों का पूरा डेटा तैयार कर रही है।


नर्मदापुरम से मुंबई तक… ऐसे कटती है गैंग की फरारी

पुलिस जांच में सामने आया है कि ईरानी गैंग के सदस्य चोरी, लूट और ठगी की वारदातों के बाद सीधे भोपाल में नहीं रुकते। वे प्रमुख तौर पर नर्मदापुरम, देवास, मुंबई, बैंगलुरू, दिल्ली और छत्तीसगढ़ जैसे शहरों में जाकर फरारी काटते हैं। दिलचस्प बात यह है कि यह सिलसिला दोनों तरफ से चलता है। यानी भोपाल के अपराधी दूसरे राज्यों में छिपते हैं और वहां रहने वाले उनके रिश्तेदार वारदातों के बाद अमन कॉलोनी के ईरानी डेरे में आकर शरण लेते हैं। इसी नेटवर्क ने सालों से इस गिरोह को कानून की पकड़ से दूर रखा हुआ था।


‘सफर में होना’ – महीनों तक चलता है अपराध का मिशन

ईरानी डेरे में अपराध को अंजाम देने का तरीका भी बेहद शातिराना है। इसे वे लोग ‘सफर में होना’ कहते हैं। इस दौरान कबीले के युवक महीनों तक अपने घर से दूर रहकर अलग-अलग शहरों में वारदात करते हैं। इस पूरे मिशन में हर गिरोह के साथ दो ऐसे युवक रहते हैं, जो सीधे तौर पर चोरी या लूट में शामिल नहीं होते, लेकिन वारदात के बाद माल को सुरक्षित कबीले तक पहुंचाने की जिम्मेदारी इन्हीं की होती है। कई बार यह माल लग्जरी कार और बाइकों से सैकड़ों किलोमीटर दूर तक पहुंचाया जाता है, ताकि पुलिस को भनक तक न लगे।


अमन कॉलोनी के कागजात खंगाल रहा प्रशासन, अतिक्रमण पर बुलडोजर की तैयारी

अब पुलिस की कार्रवाई के साथ-साथ प्रशासन भी पूरी तरह एक्टिव मोड में आ गया है। अमन कॉलोनी में बने ईरानी डेरे की जमीन के कागजात की सर्चिंग की जा रही है। नगर निगम की बिल्डिंग परमिशन और अतिक्रमण शाखा मकानों की वैधता की जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में कई मकान नियमों के खिलाफ बने पाए गए हैं। ऐसे में जल्द ही प्रशासन की टीम बुलडोजर कार्रवाई कर सकती है। फिलहाल पुलिस को राजू ईरानी, सालिक ईरानी, गुलाब ईरानी और सबदर की तलाश है, जो छापेमारी के बाद से फरार बताए जा रहे हैं।


2014 का खूनी संघर्ष, 39 घरों में लगी थी आग

अमन कॉलोनी का ईरानी डेरा पहली बार साल 2014 में बड़े विवाद के चलते चर्चा में आया था। तब शिया (ईरानी) समुदाय के करीब 30 से ज्यादा परिवारों ने आफताब मस्जिद के पास खाली जमीन पर कब्जा कर अपने मकान बनाए और इमामबाड़ा बनाने की कोशिश की। इसका सुन्नी समुदाय ने विरोध किया, जिसके बाद दोनों पक्षों में तनाव बढ़ता गया। 12 दिसंबर 2014 को मामला इस कदर बिगड़ा कि दोनों ओर से पत्थरबाजी, मारपीट और फायरिंग तक हुई। करीब एक घंटे चले इस खूनी संघर्ष में 39 मकानों में आग लगा दी गई और दर्जनों लोग घायल हो गए थे। पुलिस को इलाके में फोर्स तैनात कर हालात काबू में लाने पड़े थे।

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