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चंबल के बीहड़ों में अब ड्रोन की नजर, 100 SAF जवान और 200 वनरक्षकों की तैनाती से बदलेगी सुरक्षा व्यवस्था

10 अग, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
चंबल के बीहड़ों में अब ड्रोन की नजर, 100 SAF जवान और 200 वनरक्षकों की तैनाती से बदलेगी सुरक्षा व्यवस्था
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। राष्ट्रीय चंबल सेंचुरी में अवैध रेत खनन रोकने के लिए वन विभाग ने मुरैना में सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को बड़े स्तर पर मजबूत करने की तैयारी की है। 16 स्मार्ट चेकपोस्ट, थर्मल स्कैनिंग ड्रोन और हाईटेक कंट्रोल सेंटर इस नई व्यवस्था का हिस्सा होंगे।


मुरैना में 100 एसएएफ जवानों और 200 फॉरेस्ट गार्ड की तैनाती की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद उठाए जा रहे इन कदमों के साथ वनकर्मियों को कार्रवाई के दौरान कानूनी सुरक्षा भी मिली है।


बीहड़ों की निगरानी ड्रोन से होगी

राष्ट्रीय चंबल सेंचुरी के बीहड़ क्षेत्र में होने वाली गतिविधियों पर नजर रखने के लिए थर्मल स्कैनिंग क्षमता वाले ड्रोन इस्तेमाल किए जाएंगे। इन ड्रोन के साथ अलग-अलग जगहों पर लगाए जाने वाले कैमरों की निगरानी एक हाईटेक कंट्रोल सेंटर से रियल टाइम में की जाएगी।


16 स्मार्ट चेकपोस्ट से होगी निगरानी

मुरैना जिले में 16 स्मार्ट चेकपोस्ट तैयार किए जाएंगे। इनका उद्देश्य चंबल क्षेत्र में अवैध रेत खनन और उससे जुड़ी गतिविधियों पर निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना है। सुरक्षा के लिए 100 एसएएफ जवान और 200 फॉरेस्ट गार्ड तैनात किए जा रहे हैं। इससे मौके पर वन विभाग की मौजूदगी बढ़ेगी।


34 अनुभवी वनरक्षकों को मुरैना भेजा

वन विभाग ने 12 संवेदनशील जिलों में तैनात अपने 34 अनुभवी वनरक्षकों का तबादला तत्काल प्रभाव से मुरैना कर दिया है। इन वनरक्षकों को वन माफिया के खिलाफ कार्रवाई का पहले से अनुभव है। इनमें अधिकांश ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के मूल निवासी हैं और स्थानीय बीहड़ के भूगोल के साथ माफिया नेटवर्क से परिचित हैं।


किन जिलों से आए कितने वनरक्षक?

मुरैना भेजे गए 34 वनरक्षकों का जिला-वार ब्योरा इस प्रकार है:

- ग्वालियर — 9

- बालाघाट — 6

- श्योपुर — 5

- भिंड — 2

- दतिया — 2

- सागर — 2

- उमरिया — 2

- छिंदवाड़ा — 2

- भोपाल — 1

- खंडवा — 1

- खरगोन — 1

- अशोकनगर — 1


वनकर्मियों को मिला कार्रवाई का कानूनी कवच

नई तैनाती ऐसे फैसले के बाद हुई है, जिसके तहत वनकर्मियों को ड्यूटी के दौरान बंदूक चलाने का अधिकार दिया गया है। कार्रवाई के दौरान उन्हें बिना मजिस्ट्रियल जांच के सीधे एफआईआर दर्ज कराने और गिरफ्तारी से कानूनी सुरक्षा भी प्रदान की गई है। इससे अवैध गतिविधियों के खिलाफ मौके पर कार्रवाई करने वाले वनकर्मियों को अतिरिक्त कानूनी संरक्षण मिलेगा।


सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद बढ़ी तैयारी

राष्ट्रीय चंबल सेंचुरी में अवैध रेत खनन पर रोक लगाने के लिए वन विभाग की यह पूरी व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद लागू की जा रही है। स्मार्ट चेकपोस्ट, ड्रोन निगरानी, रियल टाइम कैमरा मॉनिटरिंग और बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती के जरिए मुरैना में निगरानी तंत्र को मजबूत करने की योजना है।

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