
रायपुर। वित्त मंत्री ओपी चौधरी की ओर से विधानसभा में प्रस्तुत छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल अधिनियम, 1972 (संशोधन) विधेयक 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। उन्होंने बताया कि दो वर्षों में मंडल ने करीब 3,050 करोड़ रुपये की लागत से 78 नई परियोजनाएं शुरू कीं। प्रदेश सरकार ने 735 करोड़ रुपए का ऋण भुगतान कर मंडल को ऋणमुक्त कराया है। प्रधानमंत्री आवास योजना-2.0) के अंतर्गत 2,000 ईडब्ल्यूएस आवासों के निर्माण को स्वीकृति मिली है।
मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि 650 करोड़ रुपए से अधिक की 6 रिडेवलपमेंट परियोजनाओं की डीपीआर तैयार हो चुकी है। नवंबर 2025 में आयोजित राज्य स्तरीय आवास मेले में 2,060 करोड़ रुपये की 56 नई परियोजनाओं का शुभारंभ किया गया, जिसमें 2,517 संपत्तियों की बुकिंग और 1,477 का आवंटन किया जा चुका है। वर्तमान में मंडल छत्तीसगढ़ के 33 में से 27 जिलों में सक्रिय है और प्रक्रियात्मक सुधारों के माध्यम से रजिस्ट्री के साथ भौतिक कब्जा सुनिश्चित किया जा रहा है।
इसके अलावा, 858 करोड़ रुपये की लागत से 146 विकासखंडों में शासकीय आवासों का निर्माण कर मंडल ने अपनी तकनीकी क्षमता भी सिद्ध की है। उन्होंने कहा कि रायपुर, नवा रायपुर, भिलाई-दुर्ग और राजनांदगांव को एकीकृत कर एक शहरी कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसमें गृह निर्माण मंडल की भूमिका अहम होगी।
संशोधन गृह निर्माण मंडल को एक सशक्त, सक्षम और बहुआयामी संस्था के रूप में स्थापित करेगा
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि संशोधन के तहत मंडल को केवल आवास निर्माण तक सीमित न रखते हुए टाउन प्लानिंग स्कीम, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप, जॉइंट वेंचर, रिडेवलपमेंट, स्लम पुनर्विकास और मिश्रित भूमि उपयोग जैसी आधुनिक विकास अवधारणाओं को लागू करने की अनुमति दी गई है। यह संशोधन गृह निर्माण मंडल को एक सशक्त, सक्षम और बहुआयामी संस्था के रूप में स्थापित करेगा। इससे राज्य में सुनियोजित, टिकाऊ और समावेशी शहरी विकास को बढ़ावा मिलेगा तथा आम नागरिकों को बेहतर आवास और आधुनिक अधोसंरचना सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
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