शनिवार, 25 जुलाई 2026
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Madhaya Pradesh

सीएम डॉ. मोहन यादव बोले- प्रदेश में दलहन का उत्पादन तेजी से बढ़ाएंगे, केंद्र सरकार के साथ कदम मिलाकर करेंगे काम

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CM Dr Mohan Yadav and Central Minister Shivraj Singh Chauhan

CM Dr Mohan Yadav and Central Minister Shivraj Singh Chauhan

Hitesh Kumar Singh
डेस्क रिपोर्टर
Hitesh Kumar Singh

भोपाल। सीएम डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को सीहोर के अमलाहा स्थित खाद्य दलहन अनुसंधान केंद्र में आयोजित सम्मेलन में कहा कि दाल हर भारतीय परिवार की प्रतिदिन की थाली का अभिन्न हिस्सा व हर मौसम में भारतीय परिवारों की जरूरत है। इसका उत्पादन और खपत बताता है कि दलहन क्षेत्र में हमें और अधिक काम करने की जरूरत है। इसलिए अब मध्यप्रदेश में दलहन फसलों का उत्पादन तेजी से बढ़ायेंगे। इसके लिए हम केंद्र सरकार के साथ कदम मिलाकर काम करेंगे।

दलहन आत्मनिर्भरता राष्ट्रीय मिशन के अंतर्गत आयोजित राष्ट्रीय परामर्श एवं रणनीति सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार दालों के मामले में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार के हर मिशन, हर संकल्प की पूर्ति में हर जरूरी सहयोग देगी। हम देश में दाल समृद्धि का संकल्प मिल-जुलकर पूरा करेंगे। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की उपजाऊ धरती, समृद्ध जल संसाधन और अनुकूल जलवायु हमारी सबसे बड़ी ताकत है। इकार्डा जैसे अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थान का सशक्त होना प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। 

 

सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश ‘कृषक कल्याण वर्ष’ मना रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘बीज से बाजार तक’ किसान के साथ खड़ी सरकार ने दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की शुरुआत की है। इसका लक्ष्य वर्ष 2030-31 तक दलहन उत्पादन को 350 लाख टन तक पहुंचाना, आयात निर्भरता कम करना और किसानों की आय बढ़ाना है। इस मिशन किसानों को बेहतर बीज, आधुनिक भंडारण और सुनिश्चित विपणन की सुविधाएं मिलेंगी। उन्होंने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा दाल उत्पादक एवं उपभोक्ता देश है। दलहन उत्पादन में मध्यप्रदेश देश में पहले स्थान पर है, जिससे इस मिशन का सर्वाधिक लाभ प्रदेश के किसानों को मिलेगा। 

 

सीहोर का शरबती गेहूं दुनिया में धूम मचाएगा: शिवराज सिंह चौहान

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अमेरिका और यूरोप के 27 देशों से हमारा समझौता हुआ है। अमेरिका के साथ कृषि समझौते में किसानों के हितों की रक्षा की गई है। उन्होंने कहा कि सीहोर का शरबती गेहूं दुनिया में धूम मचाएगा। देश के बासमती चावल और मसालों को 18 प्रतिशत टैरिफ से लाभ मिलेगा। टेक्सटाइल निर्यात बढ़ने से कपास उत्पादक किसानों को फायदा होगा। देश को दलहन में आत्मनिर्भर बनाना है। देश में मूंग को छोड़कर अन्य दालों का उत्पादन घट गया। दाल हमें विदेश से आयात करना पड़े यह देश के हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारा मध्यप्रदेश आज भी दलहन उत्पादन में अग्रणी है। साथ ही कहा कि किसानों को केवल गेहूं, सोयाबीन और धान ही नहीं उगाना चाहिए, बल्कि फसल चक्रण पर ध्यान देना चाहिए। देश में चना, मसूर और उड़द का उत्पादन बढ़ाना है। इकार्डा के माध्यम से दलहन फसलों के उन्नत बीज तैयार किए जाएंगे।

 

इकार्डा के सहयोग से बीज ग्राम और बीज हब बनाए जाएंगे

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि दलहन आत्म निर्भरता मिशन के अंगर्तग दालों के कलस्टर बनाए जाएंगे। इकार्डा के सहयोग से बीज ग्राम और बीज हब बनाए जाएंगे। प्रगतिशील और आदर्श किसानों को एक हैक्टेयर में दलहन उत्पादन के लिए 10 हजार रुपए प्रोत्साहन दिया जायेगा। इस कलस्टर में अगर कोई दाल मिल शुरू करना चाहता है तो इसके लिए भारत सरकार 25 लाख रुपए का अनुदान देगी। किसानों को उपज का सही दाम दिलाने के लिए देशभर में 1000 दाल मिल खुलेंगी, जिसमें से 55 मध्यप्रदेश में स्थापित होंगी। मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किया है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय राज्य सरकार के साथ है। केन्द्र सरकार किसानों से 8000 रुपए प्रति क्विंटल तुअर, 7800 रुपए प्रति क्विंटल उड़द, 5875 रुपए प्रति क्विंटल चना, 7000 रुपए प्रति क्विंटल मसूर खरीदेगी। केंद्र सरकार सभी दलहन फसलों की शत-प्रतिशत खरीदी करेगी। 

 

किसान जब खुशहाल होगा, तभी देश और प्रदेश भी खुशहाल होगा: एदल सिंह कंषाना

प्रदेश के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों की आय दो गुना करने का लक्ष्य रखा है। राज्य सरकार किसान कल्याण के लिए कार्य कर रही है। किसान जब खुशहाल होगा, तभी देश और प्रदेश भी खुशहाल होगा। अभी हमारे किसान पारम्परिक तरीके से खेती करते हैं। बदलते दौर में अब तकनीक आधारित आधुनिक प्रणाली से खेती करने की आवश्यकता है।

 

राष्ट्रीय सम्मेलन में इनकी भी मौजूदगी

राष्ट्रीय सम्मेलन में संयुक्त सचिव केन्द्रीय कृषि मंत्रालय संजीव कुमार अग्रवाल, अंतर्राष्ट्रीय शुष्क क्षेत्र कृषि अनुसंधान केंद्र (इकार्डा) के महानिदेशक अली अबुर साबा, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. एमएल जाट, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री द्वय रामनाथ ठाकुर व भागीरथ चौधरी, प्रदेश के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं सीहोर जिले की प्रभारी मंत्री कृष्णा गौर, राज्यों के कृषि मंत्रियों में ओडिशा के उप-मुख्यमंत्री सह कृषि मंत्री केवी सिंहदेव, उत्तरप्रदेश से सूर्य प्रताप शाही, हरियाणा से श्याम सिंह राणा, गुजरात से रमेशभाई भूराभाई कटारा, छत्तीसगढ़ से रामविचार नेताम, महाराष्ट्र से आशीष जायसवाल, राजस्थान से डॉ. किरोड़ी लाल मीणा, बिहार से रामकृपाल यादव, इकार्डा के निदेशक शिवकुमार अग्रवाल, केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के निदेशक अविनाश लवानिया मौजूद थे। 

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