
भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अब इलेक्ट्रिक कार से सफर करते नजर आएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील के बाद मुख्यमंत्री ने बड़ा कदम उठाया है। महिंद्रा की नई इलेक्ट्रिक कारें स्टेट गैरेज पहुंच चुकी हैं और जल्द ही CM काफिले में शामिल की जाएंगी। ड्राइवरों की ट्रेनिंग और जरूरी सुरक्षा प्रोटोकॉल पूरे होने के बाद इन EV Cars का इस्तेमाल शुरू होगा। माना जा रहा है कि डॉ. मोहन यादव देश के उन चुनिंदा मुख्यमंत्रियों में शामिल होंगे, जिन्होंने सरकारी काफिले में इलेक्ट्रिक व्हीकल को प्राथमिकता दी है।
PM मोदी की अपील का असर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार देशवासियों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने की अपील कर रहे हैं। इसी दिशा में मुख्यमंत्री मोहन यादव पहले भी अपने काफिले की गाड़ियों की संख्या घटा चुके हैं। पहले मुख्यमंत्री का काफिला 13 गाड़ियों का होता था, जिसे घटाकर अब 8 गाड़ियां कर दिया गया है। इसे ईंधन बचत और सादगी का संदेश माना गया था।
अब काफिले में शामिल होंगी EV Cars
जानकारी के मुताबिक महिंद्रा की 4 नई इलेक्ट्रिक कारें स्टेट गैरेज पहुंच चुकी हैं। इन वाहनों को मुख्यमंत्री सुरक्षा प्रोटोकॉल के हिसाब से तैयार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री की सुरक्षा में NSG के साथ राज्य पुलिस के अधिकारी और जवान भी तैनात रहते हैं। ऐसे में EV Cars को सुरक्षा मानकों के अनुरूप शामिल करने की प्रक्रिया जारी है।
मंत्रियों और अधिकारियों पर भी असर
PM मोदी की अपील का असर अब सिर्फ आम लोगों तक सीमित नहीं रहा। मध्य प्रदेश में कई मंत्री, जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल शुरू कर चुके हैं। सरकार इसे ईंधन बचत के साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम मान रही है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में सरकारी वाहनों में EV का इस्तेमाल तेजी से बढ़ सकता है।
मिडिल ईस्ट संकट से बढ़ा दबाव
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और क्रूड ऑयल सप्लाई पर असर का प्रभाव भारत में भी दिख रहा है। तेल कंपनियों पर बढ़ते दबाव के बीच पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पिछले 11 दिनों में पेट्रोल और डीजल के दाम में करीब 7 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मध्य प्रदेश के कई जिलों में पेट्रोल की कीमत 115 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गई है।
जनता को संदेश देने की कोशिश
मुख्यमंत्री मोहन यादव का EV अपनाने का फैसला सिर्फ सरकारी बदलाव नहीं, बल्कि एक बड़ा सार्वजनिक संदेश भी माना जा रहा है। सरकार इसे ऊर्जा बचत और आत्मनिर्भरता से जोड़कर देख रही है।
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