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अपने ही सरकार के कामकाज की सबसे बड़ी समीक्षा करने जा रहे सीएम मोहन यादव, चार दिन चलेगा मंथन, पूरा शेड्यूल तय

01 दिस, 20250 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
अपने ही सरकार के कामकाज की सबसे बड़ी समीक्षा करने जा रहे सीएम मोहन यादव, चार दिन चलेगा मंथन, पूरा शेड्यूल तय

अपने ही सरकार के कामकाज की सबसे बड़ी समीक्षा करने जा रहे सीएम मोहन यादव, चार दिन चलेगा मंथन, पूरा शेड्यूल तय

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार अपने दो साल पूरे करने जा रही है। इस मौके पर सरकार अपने ही कामकाज की सबसे बड़ी समीक्षा करने जा रही है। मुख्यमंत्री स्वयं मंत्रियों के पिछले दो वर्षों के कार्यों की समीक्षा करेंगे और आगामी योजनाओं पर चर्चा करेंगे। इस समीक्षा बैठक में सरकार की उपलब्धियों, नए इनोवेशन, भविष्य के लक्ष्यों और मौजूदा चुनौतियों पर विस्तार से मंथन होगा। इसके साथ ही हर मंत्री का रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जाएगा, जिससे यह तय होगा कि किस विभाग का प्रदर्शन कैसा रहा।


अधिकारी भी रहेंगे मौजूद, कमियों पर होगी सीधी बात

इस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मंत्रियों के साथ-साथ मुख्य सचिव और वरिष्ठ विभागीय अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। बैठकों में विभागवार कमियां और समस्याएं रखी जाएंगी ताकि उनका समाधान निकाला जा सके। इसके अलावा आने वाले तीन वर्षों के लिए लक्ष्य भी तय किए जाएंगे और इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए मंत्रियों से उनकी कार्ययोजना मांगी जाएगी। सरकार इस दौरान यह भी सुनिश्चित करेगी कि नीतियां सिर्फ कागजों तक न रहें, बल्कि धरातल पर दिखाई दें।


चार दिन चलेगा मंथन, पूरा शेड्यूल तय

मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में यह समीक्षा बैठक चार दिन तक चलेगी। इसका पूरा कार्यक्रम तय कर दिया गया है, जिसमें अलग-अलग विभागों की प्रस्तुतियां होंगी और मंत्रियों से सीधे सवाल-जवाब किए जाएंगे।


पहला दिन: 2 दिसंबर को विधानसभा में होगी बैठक

पहले दिन यानी 2 दिसंबर 2025 को विधानसभा में समीक्षा बैठक होगी। दोपहर 2 से 2:30 बजे तक पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की समीक्षा प्रहलाद सिंह पटेल करेंगे। दोपहर 3 से 3:30 बजे तक स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा उदय प्रताप सिंह के साथ होगी। शाम 4 से 4:30 बजे तक नर्मदा घाटी विकास और जल संसाधन विभाग की समीक्षा मुख्यमंत्री मोहन यादव और तुलसीराम सिलावट की मौजूदगी में होगी। इसके बाद शाम 4:30 से 5:30 बजे तक ऊर्जा, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा विभाग की बैठक प्रद्युम्न सिंह तोमर और राकेश शुक्ला के साथ होगी।


दूसरा दिन: 3 दिसंबर को वल्लभ भवन में समीक्षा

दूसरे दिन यानी 3 दिसंबर 2025 को वल्लभ भवन में बैठक होगी। सुबह 11 बजे से दोपहर 12 बजे तक लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की समीक्षा उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल करेंगे। इसके बाद सहकारिता विभाग की समीक्षा विश्वास सारंग के साथ होगी। महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा निर्मला भूरिया द्वारा की जाएगी। वहीं पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की समीक्षा कृष्णा गौर के साथ होगी। शाम को सामाजिक न्याय एवं निःशक्तजन कल्याण विभाग और कृषि, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की समीक्षा होगी।


तीसरा दिन: 8 दिसंबर खजुराहो में बैठेंगे मंत्री

तीसरे दिन 8 दिसंबर को खजुराहो में समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। इस दिन खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग की समीक्षा गोविंद सिंह राजपूत करेंगे। वाणिज्यिक कर विभाग की बैठक उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के साथ होगी। पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग की समीक्षा लखन पटेल करेंगे। नगरीय विकास एवं आवास विभाग की समीक्षा कैलाश विजयवर्गीय के साथ होगी। वहीं जनजातीय कार्य और अनुसूचित जाति विकास विभाग की बैठक कुंवर विजय शाह और नागर सिंह चौहान के साथ होगी। इसके अलावा उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा विभाग की समीक्षा भी इसी दिन होगी।


चौथा दिन: 9 दिसंबर को कैबिनेट मीटिंग

चौथे दिन यानी 9 दिसंबर 2025 को भी बैठक खजुराहो में ही होगी। इस दिन लोक निर्माण विभाग और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की समीक्षा के बाद दोपहर 3 बजे से कैबिनेट बैठक होगी, जिसमें कई अहम फैसले लिए जा सकते हैं।


खजुराहो में होगी खास कैबिनेट बैठक, बुंदेलखंड रहेगा फोकस

9 दिसंबर को खजुराहो में होने वाली कैबिनेट बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है। इस बैठक का मुख्य एजेंडा केन-बेतवा लिंक परियोजना और बुंदेलखंड क्षेत्र का विकास रहेगा। माना जा रहा है कि इस दौरान कई बड़े निर्णय लिए जा सकते हैं। इससे पहले सिंग्रामपुर, महेश्वर और इंदौर के राजबाड़ा में भी डेस्टिनेशन कैबिनेट बैठकें हो चुकी हैं।


इस समीक्षा में तय होगी सरकार की आगे की दिशा

इन समीक्षा बैठकों के बाद यह साफ हो जाएगा कि कौन से विभाग आगे हैं और कौन पीछे। साथ ही सरकार की आगामी रणनीति, योजनाओं की गति और विकास का खाका भी तैयार होगा। राजनीतिक हलकों में इसे मुख्यमंत्री मोहन यादव के अगले तीन साल के रोडमैप की शुरुआत माना जा रहा है।

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