
भोपाल। बीते नवंबर के बाद अब दिसंबर में भी मध्य प्रदेश में ठंड ने रिकॉर्ड बना दिया है। भोपाल, इंदौर और राजगढ़ जिले में 6 दिसंबर से शीतलहर का असर लगातार देखने को मिल रहा है। हैरानी की बात यह है कि बीते पांच वर्षों में दिसंबर महीने में ऐसी स्थिति कभी नहीं बनी थी। लोग दिनभर ठंड से कांपने को मजबूर हैं और रातें और भी सर्द होती जा रही हैं।
एक-दो दिन राहत, लेकिन ठंड रहेगी बरकरार
मौसम विभाग ने आगामी एक-दो दिन शीतलहर से कुछ राहत के आसार जताए हैं, लेकिन इसके बावजूद राज्य के अधिकतर हिस्सों में कड़ाके की ठंड बनी रहने की संभावना है। खासतौर पर ग्वालियर-चंबल संभाग के जिलों में घने कोहरे की चेतावनी जारी की गई है।
तापमान में भारी गिरावट, राजगढ़ सबसे ठंडा
मौसम विभाग के अनुसार, राजस्थान की ओर से लगातार आ रही सर्द और शुष्क हवाएं इस ठंड की मुख्य वजह हैं। रविवार को राजगढ़ में रात का न्यूनतम तापमान 5.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इंदौर में भी शीतलहर का प्रभाव साफ नजर आया। प्रदेश के 21 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया।
कोहरे ने बढ़ाई मुश्किलें
रीवा में सुबह न्यूनतम दृश्यता घटकर मात्र 50 मीटर रह गई। वहीं सतना, सीधी, ग्वालियर और दतिया जिलों में दृश्यता 500 से 1000 मीटर के बीच दर्ज की गई। मौसम विभाग के मुताबिक, ग्वालियर, चंबल, सागर और रीवा संभाग के जिलों में सुबह के समय घना कोहरा छाने की संभावना बनी हुई है।
पश्चिमी विक्षोभ और जेट स्ट्रीम का असर
मौसम विभाग के अनुसार, वर्तमान में उत्तरी पाकिस्तान और उसके आसपास पश्चिमी विक्षोभ हवा के ऊपरी भाग में चक्रवात के रूप में बना हुआ है। उत्तर-पूर्व भारत के ऊपर 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर 176 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से जेट स्ट्रीम हवाएं चल रही हैं। इसके अलावा 17 दिसंबर की रात से एक नया पश्चिमी विक्षोभ हिमालयीन क्षेत्र में सक्रिय होने की उम्मीद है।
पहाड़ों की ठंड और राजस्थान की शुष्क हवाएं जिम्मेदार
मौसम विभाग का कहना है कि इस बार नवंबर और दिसंबर में तीव्र आवृत्ति वाले पश्चिमी विक्षोभ नहीं आए। उत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। वहां से आने वाली बर्फीली हवाओं के साथ-साथ राजस्थान की ओर से भी शुष्क और सर्द हवाएं लगातार मध्य प्रदेश की ओर आ रही हैं। इसी कारण भोपाल, इंदौर और राजगढ़ जिलों के तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। फिलहाल, ऐसी स्थिति आगे भी बनी रहने की संभावना जताई गई है।
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