
मध्य प्रदेश में ठंड ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दिन और रात के तापमान में 21 डिग्री से ज्यादा का अंतर दर्ज किया गया है, जो सेहत के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। मौसम विभाग के शीतलहर अलर्ट के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पूरे प्रदेश के अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों को अलर्ट मोड पर रखा है।
हाइपोथर्मिया घोषित मेडिकल इमरजेंसी
केंद्र सरकार की ओर से जारी एडवायजरी के तहत मध्य प्रदेश में हाइपोथर्मिया को मेडिकल इमरजेंसी घोषित किया गया है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कॉलेजों के डीन, सीएमएचओ और सिविल सर्जनों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
NDMA की पब्लिक हेल्थ एडवायजरी लागू
एनडीएमए (NDMA) की ओर से जारी निर्देश पब्लिक हेल्थ एडवायजरी के आधार पर तय किए गए हैं। शीतलहर के दौरान हाइपोथर्मिया और फ्रॉस्टबाइट जैसी बीमारियां जानलेवा साबित हो सकती हैं, इसलिए जागरूकता, तुरंत इलाज और अधिक जोखिम वाले समूहों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है।
यहां पढ़ें NDMA की एडवायजरी
हाइपोथर्मिया को मेडिकल इमरजेंसी माना जाए, लक्षण दिखते ही तुरंत अस्पताल जाएं।
65 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग, 5 साल से छोटे बच्चे, दिल और सांस की बीमारियों से पीड़ित मरीजों और बेघर लोगों को अधिक खतरा।
फ्रॉस्टबाइट में सुन्नता, सफेदी या काले छाले दिखें तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
अस्पतालों में इमरजेंसी सेवाएं, जरूरी दवाएं, कंबल और उपकरण पर्याप्त संख्या में रखें।
ठंड से बचने और इस दौरान अनावश्यक यात्रा न करने की सलाह।
संतुलित आहार, विटामिन-सी युक्त फल-सब्जियां और गर्म तरल पदार्थों का सेवन करें।
21 डिग्री का अंतर सेहत पर पड़ सकता है भारी
राजधानी भोपाल में दिन का तापमान 26 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा दर्ज किया गया, जबकि रात का तापमान 5 डिग्री तक पहुंच गया। दिन और रात के तापमान में 21 डिग्री का यह अंतर सेहत के लिए खतरनाक माना जा रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, यह स्थिति स्किन एलर्जी और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी बढ़ा सकती है।
क्या है हाइपोथर्मिया?
हार्ट और अस्थमा विशेषज्ञ डॉ. विनोद कोठारी का कहना है कि, “हाइपोथर्मिया वह स्थिति है, जिसमें शरीर का तापमान सामान्य 37 डिग्री सेल्सियस से खतरनाक स्तर पर कम होने लगता है। ये 35 डिग्री सेल्सियस तक या उससे भी नीचे चला जाता है। यह स्थिति तब होती है, जब शरीर जितनी गर्मी पैदा करता है, उससे अधिक तेजी से गर्मी शरीर से खोती जाती है। ऐसी स्थिति में दिल, दिमाग और अन्य अंगों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। तुरंत इलाज न मिलने पर मरीज की जान भी जा सकती है। इसलिए इसे मेडिकल इमरजेंसी घोषित किया गया है।”
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