
भोपाल। इस मानसून सीजन में मध्यप्रदेश में बारिश की की के चलते सूखे का संकट मंडरा रहा है। अगस्त महीने का एक हफ्ता बीत जाने के बाद भी बारिश का आंकड़ा माइनस में है। पूरे प्रदेश में सामान्य बारिश से भी 18 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई है।नदी, तालाब और अन्य जलाशयों का पेट खाली पड़ा है।मानसून की एंट्री होने के बाद से प्रदेश के कुछ ही जिलों में अच्छी बारिश देखी गई जिसके चलते मात्र 7 जिलों ग्वालियर,भिंड,बुरहानपुर,देवास, खरगोन, बड़वानी और खंडवा में ही औसत से अधिक बारिश दर्ज की गई है। वहीं राजधानी भोपाल,इंदौर,सीहोर,रायसेन,राजगढ़, विदिशा,धार,अलीराजपुर,झाबुआ,नर्दमपुरम,दतिया,धार, गुना,हरदा,बैतूल,छिंदवाड़ा,सिवनी,बालाघाट,पांढुर्णा,डिंडौरी,मंडला,जबलपुर,कटनी,उमरियासागर,सतना,शहडोल सहित प्रदेश के शेष 48 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है।
3 दिन उत्तरी हिस्से में भारी बारिश का अलर्ट
मध्यप्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से मानसून का स्ट्रॉन्ग सिस्टम बन रहा है लेकिन यह सिर्फ प्रदेश के उत्तरी हिस्से में ही अपना असर दिखाएगा। मौसम विभाग ने शुक्रवार को मुरैना, टीकमगढ़,शिवपुरी,श्योपुर,गुना,सागर और छतरपुर में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इसी तरह अगले 3 दिनों तक प्रदेश के उत्तरी हिस्से के अलग अलग जिलों में भारी बारिश देखने को मिलेगी वहीं बाकी जिलों में हल्की व मध्यम बारिश ही होने की संभावना है।बारिश की बेरुखी के चलते कृषि पर भी संकट देखा जा रहा है।अगर इस माह अच्छी बारिश नहीं हुई तो अनाज की पैदावार में भारी गिरावट हो सकती है जिसका असर सीधे तौर पर महंगाई बढ़ने के रूप में दिखाई देगा।अगस्त के महीने में प्रदेश में अच्छी बारिश होने का ट्रेंड है अगर यह सिलसिला इस साल भी जारी रहा तो प्रदेश में बारिश की कमी से कुछ हद तक राहत मिल सकती है नहीं तो आने वाले दिनों में सामान्य बारिश में कमी का आंकड़ें में गिरावट का दौर जारी रहेगा।
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